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Hindi Essay, Paragraph, Speech on “Vasant Ritu”, “वसंत ऋतु” Complete Essay for Class 9, 10, 12 Students.

वसंत ऋतु

Vasant Ritu

निबंध नंबर : 01

भारत ऋतुओं का देश है जितनी ऋतुओं का आनंद यहाँ के लोग उठाते हैं। वह अन्यत्र दुर्लभ है। यहाँ का ऋतु-क्रम इस प्रकार है-वसंत, ग्रीष्म, पावस (वर्षा), शरद्, हेमंत और शिशिर ऋतु। इनमें वसंत ऋतु को प्रथम स्थान प्राप्त है और इसे ऋतुराज (ऋतुओं का राजा) कहा जाता है। हेमंत और शिशिर की शीतलहरी जब ठहर जाती है, तब प्रकृति में सुंदरता बिखेरते ऋतुराज वसंत का शुभागमन होता है। वसंत का आगमन वैसे तो फाल्गुन से ही माना जाता है, किंतु इसकी अवधि चैत और वैशाख तक है।

वसंत के आते ही मंद पश्चिमी हवा चलने लगती है। वृक्षों के जीर्ण-शीर्ण पत्ते गिरने लगते हैं और उनके स्थान पर नए किसलय (कोमल पत्ते) डालियों पर सज जाते हैं। विभिन्न पुष्पों की सुगंध सभी दिशाओं में अपनी मादकता का संचार करने लगती है। आम के वृक्षों में मंजरियाँ लग जाती हैं। भौंरों के गुंजार से सारा वातावरण गुंजरित हो उठता की खेतों में सरसों के पीले-पीले, तीसी के नीले-नीले फूल और गेहूँ की सुनहली बालियाँ झूमने लगती हैं। जलवायु सम हो जाती है। न शीत की कठोरता और न ग्रीष्म का ताप। सर्वत्र नई स्फूर्ति उमड़ने लगती है।

वसंत ऋतु में प्रकृति के कण-कण में नवजीवन का संचार हो जाता है। वसंत में सारा वातावरण मस्ती में डूब जाता है। इस ऋतु में ऐसा प्रतीत होता है मानो संसार में सुख-ही-सुख, आनंद-ही-आनंद है। वसंत ऋतु में ही वसंत पंचमी, होली आदि त्योहार मनाए जाते हैं।

 

ऋतुराज – वसंत

Rituraj Vasant

निबंध नंबर : 02

ऋतु ठण्ड की ऋतु लगभग समाप्त हो चुकी है। वातावरण में हल्की गर्मी का अहसास है। मंद चलती हवा में भीनी-भीनी खुशबू है। यह वसंत ऋतु है। पतझड़ के बाद पेड़ों में उगे नये पत्ते इस ऋतु की आगवानी करते ऐसे प्रतीत होते हैं, जैसे उन्होंने नये वस्त्र पहन रखे हों। वसंत ऋतु में फूलों की बहार अपने पूरे यौवन पर होती है।

शहरों में लोग तो कैलेण्डर से जानते हैं कि वसंत ऋतु आ गयी है, लेकिन गाँवों में तो चारों ओर देखते ही पता चल जाता है कि वसंत आ गया। यह फसल आने से समृद्धि का मौसम है।

इस ऋतु में बाहर सैर-सपाटा की इच्छा होती है। पेड़ों पर बैठे पंछी चहचहाते हैं। अठखेलियाँ करते हैं; जोड़े बनाते हैं। वन हो या उपवन, पहाड़ हो या दर्रा-खाई सब जगह हरितिमा और लाल-पीले रंग की छटा बिखरी रहती है। प्रकृति की छटाएँ आँखों को तृप्त और मन को मुग्ध कर देती हैं। यह वसंत का ही प्रभाव है।

कुछ पेड़ अपने सिर पर फूलों का मुकुट पहनने की तैयारी कर रहे हैं। वे दूल्हे जैसे सजेंगे। फूलों से लदी कुछ बेलें दुल्हन की तरह सजेंगी। जब धरती पर पेड़-पौधे विवाह रचा रहे हों, तो मनुष्य ऐसा क्यों न करें। शायद इसीलिये यह विवाहों का भी मौसम है।

महाशिवरात्रि, होली-धुरेड़ी, रामनवमी जैसे महत्वपूर्ण त्योहार इसी ऋतु में मनाये जाते हैं। चारों ओर हँसी-खुशी, उत्साह-उल्लास बिखरता है। जीवन, इस ऋतु में रास-रंग और रस से सराबोर रहता है।

कवियों ने इस ऋतु को छंदों-ग्रथों में बाँधा है। चित्रकारों ने चित्रों में और कलाकारों ने नृत्यों में इस ऋतु के सौंदर्य को उकेरा है। लेकिन इस ऋतु की संपूर्ण सुंदरता को शब्दों या चित्रों में नहीं ढाला जा सकता है। बस इसे तो अनुभव किया जा सकता है। वसंत जीवन में नयी ऊर्जा का संचार करता है; आशा और विश्वास जगाता है; उल्लास और उमंग भरता है। इसीलिए तो वसंत ऋतु को ऋतुओं का राजा कहा जाता है।

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