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Hindi Essay, Paragraph, Speech on “Nelson Mandela”, ”नेल्सन मंडेला” Complete Hindi Nibandh for Class 8, 9, 10, Class 12 and Graduation Classes

नेल्सन मंडेला

Nelson Mandela

डॉ. नेल्सन रोलीहलाला मंडेला का जन्म 18 जुलाई, 1918 को दक्षिण अफ्रीका में केप प्रांत में ट्रांसकी नामक इलाके में हुआ था। 12 वर्ष की अल्पायु में ही उनके पिता हेनरी गडला मंडेला का स्वर्गवास हो गया। 1941 में नेल्सन मंडेला जोहन्सबर्ग आ गये। यहां उन्हें खानों में काम करना पड़ा।

दक्षिण अफ्रीका में कई शताब्दियों पहले से यूरोप के अनेक देशों के अल्पसंख्यक गोरी नस्ल के लोग आकर बस गये थे। वे मनमाने ढंग से शासन करते थे और दक्षिण अफ्रीका के स्थानीय बहुसंख्यक काले लोगों के साथ गुलामों जैसा व्यवहार करते थे। कुछ समय बाद दक्षिण अफ्रीका अंग्रेजों के शासन के अधीन आ गया तथा काले रंग के मूल स्थानीय अफ्रीकावासियों और वहां जाकर बसे अन्य अश्वेत लोगों को, जो वहां बहुसंख्यक थे, कोई लोकतांत्रिक अधिकार प्राप्त नहीं थे। इसके विपरीत सरकार ने वहां रंग-भेद की नीति लागू की। इस नीति के अन्तर्गत नस्ली भेद-भाव किया गया तथा सभी अश्वेतों को उनके राजनैतिक अधिकारों से वंचित कर दिया गया और उन्हें अपनी पसंद के स्थान पर जाने, बसने तथा उपासना करने का भी अधिकार नहीं रहा। अपने राजनीतिक दल, अफ्रीकन नेशनल कांग्रेस (ए.एन.सी.) के झण्डे के नीचे डाक्टर मंडेला ने रंग-भेद की नीति के विरुद्ध संघर्ष किया और स्वदेश शासन की मांग की।

26 वर्ष की आयु में नेल्सन मंडेला ने एवेलीन से विवाह कर लिया। इसी वर्ष उनका राजनैतिक जीवन भी आरंभ हुआ, जब उन्होंने ए. एन. सी. यूथ लीग की स्थापना की। 1950 में मंडेला इस यूथ लीग के प्रेसीडेण्ट बने।

जून 1952 में जब मंडेला ने अवज्ञा आन्दोलन शुरू किया, तो श्वेत शासन के साथ उनका टकराव बढ़ गया। इसी सिलसिले में मंडेला को 9 महीने की सजा काटनी पड़ी।

1956 में मंडेला पर देशद्रोह का आरोप लगाया गया। लेकिन यह आरोप सिद्ध नहीं हो पाया और 29 मार्च, 1961 को उन्हें बरी कर दिया गया। अगस्त 1962 में उन्हें वाल्टर सिसुलु और छ: अन्य साथियों के साथ नेटाल में गिरफ्तार कर लिया गया और उन पर आरोप यह था कि वे लोगों को हिंसा कि लिए उकसाते थे और वह बिना पासपोर्ट लिए देश से बाहर गए थे। जून 1964 के मुकदमे में उन्हें राजद्रोह के आरोप में आजीवन कारावास की सजा दी गई। मंडेला को रॉबेन द्वीप की जेल में रखा गया।

सारे संसार के नेताओं ने दक्षिण अफ्रीका की सरकार पर दबाव डाला कि वह नेल्सन मंडेला को जेल से रिहा कर दे किन्तु उस पर कोई असर नहीं पड़ा।

लेकिन मंडेला अडिग रहे, वह विचलित नहीं हुए। जनवरी 1985 में दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति पी.डब्ल्यू. बोथा ने प्रस्ताव रखा कि यदि मंडेला हिंसा का रास्ता छोड दें तो उन्हें रिहा कर दिया जायेगा। लेकिन मंडेला ने इस शर्त पर रिहा होने से इनकार कर दिया। जून 1989 में बोथा और डि क्लार्क पुनः मंडेला से मिले; इस प्रकार वार्ता का एक सिलसिला शुरू हुआ और फरवरी 1990 में 27 वर्ष के लम्बे कारावास के बाद उन्हें जेल से मुक्त कर दिया गया। जेल से मुक्त होने के बाद उन्होंने एक सभा को संबोधित किया, जिसमें 50,000 लोगों की भारी भीड़ थी।

इसी बीच दक्षिण अफ्रीका में 1990 से शान्तिपूर्ण ढंग से रंग-भेद और नस्ल-भेद समाप्त करने के प्रयासों के लिए 1993 में नेल्सन मंडेला (75) और डि क्लार्क (58) को नोबेल शांति पुरस्कार से सम्मानित किया गया।

थोड़े समय बाद मार्च 1990 में मंडेला को ए. एन. सी. का डिप्टी प्रसीडेण्ट बनाया गया। इसके बाद ए. एन. सी. ने 29 सालों से चले आ रहे सशस्त्र संघर्ष को स्थगित कर दिया। 1991 में ओलिवर टैम्बो के स्थान पर मंडेला को ए. एन. सी. का प्रेसीडेण्ट बनाया गया। यह वर्ष इसलिए भी महत्त्वपूर्ण रहा था कि इसी समय से राजनैतिक प्रक्रिया शुरू करने की वार्ता का सिलसिला शुरू हुआ। इसी समय राजनैतिक सुधार के प्रश्न पर जनमत संग्रह कराया गया। इसमें श्वेतों ने राजनैतिक सुधार के पक्ष में अपनी बहुमत राय दी।

मंडेला ने एक भविष्यदृष्टा के रूप में भविष्य के घटनाचक्र को भांप लिया था और सितम्बर 1993 में उन्होंने घोषणा की थी कि दक्षिण अफ्रीका में कुछ ही दिनों में लोकतंत्र की स्थापना हो जायेगी। इसी अवसर पर उन्होंने आग्रह किया था कि उनके देश पर लगे सभी प्रकार के प्रतिबन्ध (आर्थिक, राजनैतिक तथा व्यापारिक) हटा लिये जायें।

तीन महीने के अन्दर ही बहुदलीय वार्ता समिति ने घोषणा कर दी कि 27 अप्रैल 1994 को लोकतांत्रिक चुनाव होंगे, जिसमें सभी नस्लों के लोगों को वोट देने का अधिकार होगा। इन चुनावों में देश की 400 लाख जनसंख्या में प्रगतिशील नेल्सन मंडेला के नेतृत्व में ए. एन. सी. को 62.65 प्रतिशत वोट मिले। नेशनल एसेम्बली ने जब नेल्सन मंडेला को पहला अश्वेत राष्ट्राध्यक्ष (प्रेसीडेण्ट) निर्वाचित किया, तो दक्षिण अफ्रीका में एक नए युग का सूत्रपात हुआ। मंडेला द्वारा प्रेसीडेण्ट पद संभालने के साथ ही इस देश में 342 वर्षों से चला आ रहा श्वेतों का शासन (प्रभुत्व) समाप्त हो गया। 10 मई, 1994 को अपना पदभार संभालने के बाद उन्होंने कहा “आइये हम सब मिलकर एक ऐसे बहुरंगी राष्ट्र का निर्माण करें जिसमें आन्तरिक शान्ति हो और अन्य देशों के साथ जिसके मधुर सम्बन्ध हों।”

राष्ट्रपति का पद संभालने के बाद डॉ. नेल्सन मंडेला मुख्य अतिथि के रूप में 1995 के गणतन्त्र समारोह में उपस्थित हुए। इसी दौरान (जनवरी 1995 में) भारत सरकार ने द्विपक्षीय आर्थिक समझौतों पर हस्ताक्षर किए।

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