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Hindi Essay-Paragraph on “Sethusamudram Project” “सेतु समुद्रम् परियोजना” 800 words Complete Essay for Students of Class 10-12.

सेतु समुद्रम् परियोजना

Sethusamudram Project

सेतु समुद्रम् परियोजना का मूल विषय है भारत और श्रीलंका के बीच के जलमार्ग से जहाजों के गुजरने की समस्या का समाधान। सेतु समुद्रम् परियोजना तमिल जनता की 145 साल पुरानी उस समय की कल्पित योजना है, जिस पर अमल किया जाना है। लगभग 145 साल पुरानी इस परियोजना को केंद्र सरकार ने मंजूरी दे दी है। इस परियोजना पर कुल लागत 242740 करोड़ रुपये आने की संभावना व्यक्त की गई है। केंद्र सरकार द्वारा निर्णय का कार्य जारी है। इस परियोजना के तहत भारत और श्रीलंका के बीच स्थिति पाक जलडमरूमध्य से होकर एक जलपोतों की चैनल की खुदाई की जाती है। इससे भारत के पूर्वी एवं पश्चिमी तटों से आने-जाने वाले जलपोतों की श्रीलंका का चक्कर लगाकर नहीं जाना पड़ेगा। वे अब सीधे चले जाएंगे। इससे जलपोतों की 429 नॉटिकल मील दूरी की बचत होगी तथा वे अपनी यात्रा का लगभग 30 घंटे बचा सकेंगे। सुरक्षा के दृष्टिकोण से भी यह परियोजना काफी लाभदायक सिद्ध होगी। सेतु समुद्रम् शिपिंग कैनाल प्रोजेक्ट से अब नौसैनिक तथा सीमा सुरक्षा गार्ड श्रीलंका का चक्कर लगाने के बजाय सीधे गश्त लगा सकेंगे।

इस महत्त्वाकांक्षी और विशाल परियोजना के पूरा हो जाने पर श्रीलंका और भारत के बीच के जलमार्ग से जहाजों के गुजरने में काफी आसानी हो जाएगी। अब तक होता यह है कि दोनों देशों के जलमार्ग के संकरा होने और उसमें कई भू-दरारें होने से जहाजों को श्रीलंका जाकर भारतीय तटों पर वापस लौटना पड़ता है। इस परियोजना के पूरा होने में तीन साल का समय लगेगा और जहाज पाक जलडमरू मध्य से भारतीय तटों पर आ सकेंगे और वहां जा सकेंगे। इससे दूरी में और लगने वाले समय में 30 घंटे की कमी आएगी। जहाजरानी मंत्रालय के अनुसार, 16 कि.मी. लंबी और 300 मी. चौड़ी सेतु समुद्र नहर से जहाज कंपनियों के ईंधन खर्च और ट्रांसपोर्ट के लागत में कमी आएगी। सरकार को भी बड़ी समुद्री हिस्से में सुरक्षा तंत्र को और मजबूत बना सकेगी। जहां तक विकास की बात है, यह बहुत अच्छी और लाभवाली परियोजना है। लेकिन जहां तक पर्यावरण का सवाल है, इस परियोजना का चौतरफा विरोध हो रहा है।

इस परियोजना के विरोध में जो प्रश्न उठ रहे हैं, वे निम्न प्रकार हैं-

  1. क्या परियोजना में मन्नार की खाड़ी के नाजुक जैव क्षेत्र के बारे में दी गई पर्यावरणवादियों की चेतावनी पर ध्यान दिया जा रहा है?
  2. क्या केंद्र सरकार ने संपन्न समुद्री जीवन पर परियोजना के पड़ने वाले असर का अध्ययन किया है? जिससे यह हमेशा के लिए बर्बाद हो सकता है।
  3. क्या सरकार ने समुद्री मोर्चे के ऐतिहासिक और पुरातात्विक महत्त्व पर विचार किया है?
  4. क्या परियोजना में जीवित मूंगों की खूबसूरत चादर और पर्यावरण पर ध्यान दिया गया है?
  5. क्या उन मछुआरों पर ध्यान दिया गया है जो इस परियोजना से विस्थापित होंगे?

इस परियोजना के विरोध में यह तर्क दिया जा रहा है कि इस परियोजना से मन्नार की खाड़ी का पर्यावरण और समुद्री पारिस्थितिक तंत्र बिगड़ जाएगा। जैव विविधता भी स्थाई रूप से प्रभावित होगी। मन्नार की खाड़ी में जीवित वैज्ञानिक प्रयोगशाला काम करती है, जिसका राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय महत्त्व है। इनमें पौधों

और प्राणियों की 3800 प्रजातियां हैं, जो इस जैव दृष्टि से भारत को संपन्न तटीय क्षेत्र बनाती है। पर्यावरण वादियों ने चार महत्त्वपूर्ण परिस्थिति तंत्रों पर चिंता व्यक्त की हैं।

ये तंत्र हैं-

मूंगे की संपन्न टीले, मैनग्रोव ईको सिस्टम, जैव विविध और 3.5 लाख की आबादी वाला मछुआरा समुदाय।

केवल पर्यावरण वादियों ने ही नहीं, समुद्र वैज्ञानिकों ने भी कुछ आपत्तियां दर्ज कराई हैं। सागर विज्ञानियों के मुताबिक अगर यह मान लिया जाए कि परियोजना में सभी बातों का ध्यान रखा गया है और खुदाई की गतिविधियों से पर्यावरण को नुकसान नहीं पहुंचेगा, तो भी जहाजों की आवाजाही में वृद्धि होने से नाजुक परिस्थितकी तंत्र नष्ट हो जाएगा। समुद्री अध्ययन विज्ञानी डॉ. अरुणाचलम के अनुसार सबसे अधिक चिंता की बात यह है कि जहाज बंदरगाह में प्रवेश करने से पहले गंदा पानी छोड़ते हैं जिसमें विदेशी प्रजाति के जीव और अंडे होते हैं और ये जीवन मन्नार की खाड़ी में भी आ सकते हैं और यहां के पौधों, प्राणियों और दूसरी चीजों को नुकसान पहुंचा सकते हैं।

इन विरोधों को ध्यान में रखकर केंद्र सरकार ने पर्यावरण प्रभावों के अध्ययन के लिए आठ सदस्यीय समिति का गठन किया है। यह समिति से बंधित संस्थाओं को परियोजना के प्रतिकूल प्रभावों के बारे में जानकारी देगी।

पर्यावरणवादियों की आपत्तियों के अलावा सेतु समुद्रम् परियोजना पर श्रीलंकाई सरकार ने भी आपत्तियां दर्ज कराई हैं।

श्रीलंका सरकार का विरोध निम्नलिखित बिंदुओं पर हैं-

  1. सूखा सहित जलवायु में बदलाव,
  2. पतनों में बाढ़ की संभावना,
  3. समुद्र का अपरदन।

चूंकि मन्नार की खाड़ी और बंगाल की खाड़ी का जलस्तर भिन्न है और परियोजना के पूरा हो जाने के बाद धारा प्रवाह में बदलाव आएगा, इसे श्रीलंकाई तटीय भूमि पर बाढ़ की संभावना बनी रहेगी। परिस्थितिकी तंत्र प्रभावित होने के कारण जलवायु भी परिवर्तित होगी और परियोजना से कोलंबो पत्तन के अंतर्राष्ट्रीय परिवहन पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा।

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