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Hindi Essay on “Yadi mein Adhyapak Hota”, “यदि मैं अध्यापक होता” Complete Essay, Paragraph, Speech for Class 7, 8, 9, 10, 12 Students.

यदि मैं अध्यापक होता

Yadi mein Adhyapak Hota

 

विद्यालय में छात्रों को मार्ग दिखाने के लिए अध्यापक की आवश्यकता होती है। अध्यापक शिक्षा द्वारा छात्रों के भविष्य का निर्माण करता है। दूसरे शब्दों में हम कह सकते हैं कि अध्यापक राष्ट्र का निर्माता होता है। इस दृष्टि से अध्यापक का कार्य सबसे अधिक महत्त्वपूर्ण होता है।

मैं सोचता हूँ यदि मैं अध्यापक होता तो मैं विद्यार्थियों के लिए, स्कूल के लिए, देश के लिए क्या करता ? यदि मैं अध्यापक होता तो मेरी वही स्थिति होती जो मस्तिष्क की शरीर में, इंजन की रेलगाड़ी में, पंखे की वायुयान में होती है। मुझे अध्यापन कार्य तथा छात्रों का दिशा-बोध करना पड़ता। अध्यापन कार्य करना सरल नहीं है, इस स्थिति में मेरा कार्य भी काफी कठिन होता। अनेक कठिनाईयां, चुनौतियां हर कदम पर मेरे रास्ते में रूकावटें डालती हुई दिखाई देती परन्तु में दृढ़ निश्चय से अपने पांव आगे की ओर बढ़ाता जाता ।

यदि मैं अध्यापक होता तो सबसे पहले स्वयं अनुशासन में रहता ताकि मेरे विद्यार्थी मेरा अनुसरण करें । मैं कक्षा में सबसे पहले अनुशासन स्थापित करता क्योंकि अनुशासन राष्ट्र की नींव होती है। इसके लिए मैं एक निश्चित योजना बनाता । अनुशासन तभी टूटता है जब बच्चों की इच्छाओं की ओर ध्यान न दिया जाए । मैं कक्षा में बच्चों की रूचियों, प्रवृतियों, स्वभाव, आदतों की जानकारी लेता और उनकी रुचियों, प्रवृत्तियों के अनुसार कक्षा का पाठ-योजना बनाता और शिक्षण कार्य आरम्भ करता । इससे श्रेणी का सारा काम अनुशासन के अन्दर रह कर पूरा होता ।

मैं विद्यालय के अनेक कार्यों में छात्रों का सहयोग प्राप्त करता । मैं उन्हें सहकारी समिति बनाने को कहता । वे अपने चुनाव करते और देर से आने वाले छात्रों के लिए स्वयं ही दण्ड निर्धारित करते । इस प्रकार वे स्वयं को विद्यालय का एक अंग मानने लगते । ऐसा करके मैं उनका विश्वास जीत कर उनके हृदय में अपना स्थान बना लेता ।

यदि मैं अध्यापक होता तो मैं विद्यार्थियों के निजी जीवन में आने वाली कठिनाईयों की उनसे जानकारी लेता । मैं अपने सहयोगी अध्यापकों से पूछता कि वे किस प्रकार की आदर्श शिक्षा देना चाहते हैं। इस तथ्य को ध्यान में रखते हुए मैं ऐसी नीति बनाता जिससे छात्रों के लिए शिक्षा आसान बन जाए और उनका पढ़ाई में मन लग जाए । इससे उनमें आत्मविश्वास और सन्तोष की भावना दढ होती । मैं पाठयक्रम में ऐसे सुधार करता जिससे बच्चे अपने बड़े बुर्जुगों,माता-पिता का मान-सम्मान करना सीख पाएं । शिक्षा द्वारा वे अपने भारतीय संस्कारों से जुड़ें । वे भारतीय बने, उन्हें भारतीयता से लगाव हो । वे भारतीय होने में गर्व अनुभव करें । मैं उनमें नैतिकता का प्रचार करता ताकि वह नैतिक मूल्यों को समझ सकें ।

यदि मैं अध्यापक होता तो मैं उनका उचित मार्ग-दर्शन करके उनमें देश के कर्णधार बनने की योग्यता पैदा करता । आज के बच्चे कल के नेता हैं। यदि स्कूलों में उनका उचित पथ-प्रदर्शन किया जाए तो वह सदाचारी नेता बनकर देश का भविष्य संवार सकते हैं। एक राष्ट तभी उन्नति कर सकता है जब छात्रों में स्कूल शिक्षा के दिनों में ही नेतृत्व के गुण पैदा किए जाएं । मैं उनमें एक अच्छे नेता के गुण पैदा कर देता ताकि राष्ट्र उनके नेतृत्त्व से लाभ उठा सके ।

मैं उन्हें उपदेश देने की बजाए स्वयं एक आदर्श बनकर उनके सामने आता ताकि वह मेरे जैसा बनने का प्रयत्न करें । अध्यापक बच्चों के लिए एक “आदर्श” होता है। मैं उन्हें कुछ कहने की अपेक्षा स्वयं कुछ करके दिखाता । इससे अन्य अध्यापक भी मुझसे प्रेरित होकर कर्मशील हो जाते । छात्रों में अनुकरण की आदत होती है अतः वे मुझे और अध्यापकों को कार्य में लगे देखकर प्रेरित होते ।

मैं दण्ड में नहीं सहृदयता में विश्वास रखता हूं । मैं अपने छात्रों के साथ मित्रतापूर्ण व्यवहार करता । किसी पर भी अनुचित दबाव न डालता । काश ! मैं अध्यापक होता और अपने स्वप्नों को साकार रूप दे सकता ।

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