Home » Languages » Hindi (Sr. Secondary) » Hindi Essay on “Mahanagar Ki Samasya” , ”महानगर की समस्याएँ” Complete Hindi Essay for Class 10, Class 12 and Graduation and other classes.

Hindi Essay on “Mahanagar Ki Samasya” , ”महानगर की समस्याएँ” Complete Hindi Essay for Class 10, Class 12 and Graduation and other classes.

महानगर की समस्याएँ

छोटी बस्तियाँ फैलकर गाँव , गाँव फैलकर कस्बे , कस्बे-नगर तथा नगर-महानगर में परिवर्तित हो जाया करते है , ऐसा प्रकृति का नियम है | परन्तु जब से देश के ग्रामीण उद्दोग –धन्धे नष्टप्राय: होने लगे तो नगरो तथा महानगरो का विकास प्रारम्भ होने लगा | तभी से वास्तव में महानगरीय जीवन समस्या –प्रधान बनने लगा | ग्राम- व्यवस्था के चरमराने के उपरान्त नगरो –महानगरो पर सबसे पहले तो आबादी का दबाव पड़ना प्रारम्भ हो गया | एक तो नहरों – महानगरो की जनसंख्या वृद्दि की रफ्तार पहले ही तेज थी , उस पर काम – धन्धे की खोज में देहातो पलायन कर आने वाले लोगो ने दबाव को और भी बढ़ा दिया | अंत: निरन्तर बढती जनसंख्या का दबाव महानगरो की एक विकट समस्या है दूसरी समस्या है आवास की , जो बढती जनसंख्या का परिणाम है | जनसंख्या वृद्धि के अनुपात में आवास की व्यवस्था न हो पाने के कारण , महानगरो के आलिशान भवनों की बगल में झोपड-पट्टियों का निर्माण होने लगा | धीरे- धीरे इसने एक विकट समस्या का रूप धारण कर लिया है | फलस्वरूप महानगरो में गन्दगी बढती गई, जिसका निदान आज तक भी संभव न हो सका |

इनके अतिरिक्त निरन्तर हो रहे औद्दोगीकरण ने भी महानगरीय जीवन को कई तरह से प्रदूषित एव समस्याग्रस्त बना रखा है | इन उद्दोगो , कल –कारखानों व् छोटी- छोटी फैक्टरियों से निकलने वाले धुएँ, कचरे, गन्दे पानी आदि के फैलने से वातावरण दूषित होता जा रहा है | उस पर तरह – तरह के बढ़ते वाहनों का दबाव उनसे निकलता धुआं और जहरीली गैसों ने महानगरो के वातावरण को विषाक्त एव दमघोटू बना दिया है | परिणामस्वरूप पर्यावरण प्रदूषित होता जा रहा है | वहाँ के नागरिक उस दमघोटू माहौल में रहने को विवश है इनके साथ-साथ ध्वनि – प्रदुषण की समस्या भी बड़ी गम्भीर है |

महानगरो की एक अन्य समस्या है उनके आकर का बेतरतीबी से लगातार बढ़ते जाना, जिसके फलस्वरूप वहाँ शुद्ध हवा, पानी का न मिल पाना | बिजली की समस्या तो वहाँ सदा से ही व्याप्त है | वहाँ के लोगो का आधा जीवन घर से कार्यलय जाने तथा आने में व्यतीत  हो जाता है | वहाँ की जनसंख्या के अनुपात में यातायात के साधनों के अभाव के कारण लोगो को बसों में धक्के – मुक्के खाकर आना जाना पड़ता है | महानगर निवासियों को ताजे फल, दूध तथा सब्जियों के लिए प्राय : टीआरएस जाना पड़ता है | राशन तक भी अच्छा और समयबद्ध रूप से नही मिल पाता है |

महानगरो को इन समस्याओ से कैसे छुटकारा दिया जा सकता है ? इसका उत्तम उपाय है – विकेन्द्रीय | सरकारी कार्यालयों को महानगरो से बाहर रखा जाए तथा उद्दोग- धन्धो को भी देहातो में बेकार पड़ी बंजर जमीन पर लगाया जाए | इससे महानगरो पर जनसंख्या का दबाव भी कम होगा तथा पर्यावरण भी दूषित होने से बचेगा |

About

The main objective of this website is to provide quality study material to all students (from 1st to 12th class of any board) irrespective of their background as our motto is “Education for Everyone”. It is also a very good platform for teachers who want to share their valuable knowledge.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *