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Mitra ko Dahej ki Kupratha ke bare me batate hue patra “अपने मित्र को एक पत्र लिखिए जिसमें दहेज की कुप्रथा के बारे में लिखा हो।” for Class 9, 10 and 12 Students.

अपने मित्र को एक पत्र लिखिए जिसमें दहेज की कुप्रथा के बारे में लिखा हो।

Mitra ko Dahej ki Kupratha ke bare me batate hue patra

777, वैशाली,

गाजियाबाद

दिनांक: 9/11/09

प्रिय मित्र अशोक,

सप्रेम नमस्ते।

तुम्हारा पत्र मिला, मन खिल उठा। तुमने मुझसे अपनी छोटी बहिन शैली की मँगनी के विषय में परामर्श माँगा है तथा दहेज के विषय में मेरी राय मांगी है। इसके लिए मेरे विचार इस प्रकार हैं।

मेरे विचार से जिस घर में नारियों की पूजा होती है, उस घर में देवता निवास करते हैं, पर आज यह आदर्श समाप्त हो गया है। जिसके घर में कन्या पैदा होती है, उस पर मुसीबतों का पहाड़ है। मेरी राय से इन सब बुरी भावनाओं का मूल कारण केवल दहेज प्रथा है।

आज की प्रचलित दहेज प्रथा ने कई देवियों को पतित होने पर विवश किया है। कुछ ने अपने माता-पिता को कष्ट में देखकर आत्म-हत्याएँ की हैं। तुम्हें मेरठ की नीलम की आत्म-हत्या की घटना याद नहीं। माता-पिता की इज्जत की रक्षा के लिए उसने अपने प्राणों की बलि दे दी थी। इसके बावजूद भी समाज सुधारकों की आँखें नहीं खुली।

मेरी राय में तो कन्यादान ही महान दान है। जिसने अपने दिल का टुकड़ा दे दिया, उसका यह त्याग क्या कम है। आज के नौजवानों की दहेज के प्रति बढ़ती लालसा मुझे बिल्कुल पसंद नहीं है। वरों की इस प्रकार से बढ़ती कीमतें समाज के भविष्य के लिए भी महान संकट बन रही हैं।

मेरी राय में शैली के लिए ऐसा वर ढूँढों जो हर प्रकार से योग्य, शिक्षित, स्वस्थ और रोजगार वाला हो। धनी और लालची लोगों की तरफ नजर मत डालो वैसे भी दहेज देना कानूनन अपराध है। मेरे योग्य कोई सेवा हो तो अवश्य लिखना।

तुम्हारा अभिन्न मित्र,

प्रियंक

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