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Hindi Letter “Mahilao par ho rahe Atyacharo par Chinta prakat karte hue Sampadak ko Patra”, “महिलाओं पर अत्याचारों पर चिंता प्रकट करते हुए संपादक को पत्र ”

महिलाओं पर अत्याचारों पर चिंता प्रकट करते हुए संपादक को पत्र

परीक्षा भवन

दिनांक……..

सेवा में,

कार्यकारी सम्पादक,

दैनिक अमर उजाला,

नोएडा,

उत्तर प्रदेश।

 

विषय : महिलाओं पर अत्याचारों पर चिंता

 

महोदय,

मैं आपका ध्यान स्त्री पर हो रहे निरन्तर अत्याचारों की ओर आकर्षित करना चाहता हूँ। जिस स्त्री को प्राचीन काल में विदुषी का सम्मान प्राप्त था। जिसके परिवार, धर्म और राष्ट्र की प्रगति में अमुल्य सुझाव मान्य होते थे, आज वही स्त्री पुरुषों के अमानुषिक अत्याचारों के कारण निरीह और अमानवीय जीवन व्यतीत करने पर विवश है। उस पर न केवल घरों में अत्याचार किए जाते हैं अपित बाहर भी किए जाते हैं। उसे समाज में अपना सम्मान बचाना कठिन हो रहा है। आज नारी देश और समाज में अपना योग दे रही है। पुरुषों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर परिवार समाज और देश की उन्नति में कार्यरत है, वहीं पुरुषों से पीड़ित भी है। उस पर कभी तो दहेज के नाम पर अत्याचार किए जाते हैं तो कभी यौन शोषण के नाम पर। कभी वह ठगी का शिकार हो जाती है। कभी वाहनों में उसके सम्मान को तार-तार कर दिया जाता है। दिल्ली का निर्भया काण्ड तो प्रकाश में आ गया, न जाने कितने अप्रत्यक्ष निर्भया कांड हैं जो नारियों को सहन करने पड़ रहे हैं। यह कितने दुर्भाग्य की बात है कि हमारे नेता नारी के साथ यौन अपराध को मामली गलती मानते हैं। सरकार को इस दृष्टि से कड़े कदम उठाने चाहिए। यौन अपराध गैरजमानती घोषित किया जाना चाहिए। नारी पर अत्याचार करने वाले अपराधियों के लिए कड़े दंड की व्यवस्था की जानी चाहिए।

भवदीय

विजयशंकर गुप्त

मथुरा, उत्तर प्रदेश।

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