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Hindi Essay, Paragraph, Speech on “Visit to Circus” , ”सर्कस का भ्रमण” Complete Essay for Class 10, Class 12 and Graduation Classes.

सर्कस का भ्रमण

Circus ka Bhraman

Hindi-Essay-Hindi-Nibandh-Hindi

 Essay No. 01

सर्कस सभी के लिए आकर्षण का केंद्र होती है। यह बहुत मजा तथा मनोरंजन प्रदान करती है। यहां कई प्रकार के कलाकार, जोकर, जानवर तथा रिंग मास्टर होते हैं। वे आने वाले लोगों को कई प्रकार के करतब करके दिखाते हैं। यहां बच्चों, बढों तथा जवानों के लिए हर प्रकार का प्रदर्शन होता है।

पिछले साल कमला सर्कस नाम की एक सर्कस हमारे शहर में आई। उन्होंने बहुत बड़ा पंडाल लगाया। खंभों के ऊपर रंग-बिरंगे झंडे लगाए गए थे। सारे शहर की दीवारों पर सर्कस के प्रचार के लिए पोस्टर लगाए गए थे। बैंड बजाए गए। छोटे पोस्टर लोगों को बांटे गए। इससे लोगों में बहुत उत्साह भर गया।

मैं अपने परिवार के साथ सर्कस देखने गया। हम अपनी कार से वहां पहंचे। हमने टिकट खरीदी और पंडाल के अंदर गए। जिम्नास्टिक से सर्कस की शुरुआत हुई। लड़के-लडकियां इस में भाग ले रहे थे। एक लड़कियों के ग्रुप ने झूलों पर करतब करके दिखाए। वे जाल के ऊपर ऊंचाई पर करतब कर रहे थे। कुछ अपने शरीर को इस प्रकार से मोड़ रहे थे जैसे वे रबड़ से बने हों।

तभी वहां एक हाथी आ गया। उसने मेज पर अपना पैर रखकर हमें सलाम किया। पिंजरे में एक शेर को लाया गया। रिंगमास्टर ने उसे पिंजरे से बाहर निकाल दिया। लोग डर गए। फिर उसे वापिस पिंजरे में डाल दिया गया। फिर हमने एक औरत को रस्सी चलते हुए देखा। उसने हाथ में एक डंडा पकड़ा हुआ था जिससे वह खुद को संतुलित करती थी। आखिरी करतब मोटर साईकिल पर किया गया। मोटर साईकिल वाला आग के कुएँ में करतब दिखाने लगा। वह एक बहुत ही खतरनाक करतब था। सर्कस खत्म होने के बाद हम घर आ गए।

 

एक सर्कस की सैर

Ek Circus Ki Sair

 Essay No. 02

मनोरंजन मनुष्य को दैनिक जीवन के कार्यों से होने वाली थकावट तथा उबाऊपन से मुक्ति दिलाता है। मनोरंजन मनुष्य में एक नई शक्ति तथा स्फूर्ति भर देता है। मनोरंजन के बहुत से साधन हैं। जैसे कोई टी.वी. देखकर, किताबें पढ़कर अपना मनोरंजन करता है, तो कोई किसी स्थान का भ्रमण करके कोई खेल खेलकर अपना दिल बहलाता है वर्तमान समय में सर्कस भी आनंद तथा मनोरंजन का एक महत्त्वपूर्ण साधन है। इस वर्ष जुलाई माह में हमारे नगर में ‘आनंद सर्कस’ लगा था। यह केवल पच्चीस दिन के लिए हमारे शहर आया था। इस रविवार को मुझे भी सर्कस देखने का मौका मिला। मामा जी मुझे तथा घर के अन्य बच्चों को सर्कस दिखाने ले गए। एक आदमी ऊँचे स्थान पर बैठकर शा का संचालन कर रहा था। पूरा तंबू रोशनी से जगमगा रहा था। तभी सारे कलाकार अपने-अपने करतब दिखाने के लिए बने गोल घेरे में आ गए। उन्होंने दर्शकों का अभिवादन किया। उसके बाद खेल आरंभ हो गया। सबसे पहले चार छोटे-छोटे जोकर आए। उन्होंने एक-दूसरे की हजामत बनाई।

सभी दर्शक उनका खेल देखकर खूब हँसे। उसके बाद कुछ और कलाकार आए जो ऊँचाई पर बँधे झूलों पर जाकर आश्चर्यजनक करतब दिखाने लगे। यह सचमुच हैरतअंगेज़ लग रहा था। उसके बाद एक लड़की आई, उसने अपने सिर पर कप-प्लेट की लंबी लाइन खड़ी की और फिर चलकर दिखाया। एक भी कप को उसने गिरने नहीं दिया। फिर हाथी ने फुटबॉल का खेल दिखाया। कई बार हाथी ने गेंद को इतनी जोर से मारा कि गेंद दर्शकों के बीच आ गिरी। फिर जोकर आए। उन्होंने दर्शकों को कविताएँ सुनाईं। उनके रंग-बिरंगे कपड़े देखकर हँसी आ रही थी। फिर मोटर साइकिल सवार ने गहरे कुएँ में तेज गति से मोटर साइकिल चलाई। इसके बाद बंदर ने सब्जी बेची, तोते ने एक स्थान से दूसरे स्थान की यात्रा की। हाथी डॉक्टर बनकर भालू का उपचार किया। दवा सब जोकर ने पी ली। सबसे अंत में शेरों का खेल दिखाया गया। यह खेल दिखाने से पहले उस स्थान को जालीदार दरवाजों से बंद किया गया। फिर करतब स्थल पर आठ शेर आएँ। सबने आग के घेरे में छलाँग लगाई। उनके इस करतब से सब आश्चर्य में पड़ गए कि किस प्रकार जंगल का राजा मनुष्य के आदेशों का पालन कर रहा है। इस कार्यक्रम के बाद शो समाप्ति की घोषणा की गई। सब लोग घरों को लौटने लगे। मैंने इस सर्कस का भरपूर आनंद लिया।

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