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Hindi Essay/Paragraph/Speech on “Tajmahal”, “ताजमहल” Complete Hindi Essay, Nibandh, Speech for Class 10, Class 12 and Graduation and other classes.

ताजमहल

Taj Mahal

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Essay No. 01

आगरा एक ऐतिहासिक नगर है। यहाँ अनेक ऐतिहासिक भवन हैं, किंतु ताजमहल उन सबमें सुंदर है। ताजमहल विश्व के सात महान आश्चर्यों में से एक है। यह सुंदर इमारत भारत में ही नहीं बल्कि संपूर्ण विश्व में प्रसिद्ध है। यह मुगलकाल की वास्तुकला का सर्वोत्तम उदाहरण है। ताजमहल यमुना नदी के किनारे आगरा शहर के बाहरी भाग में बना है। इस भवन का निर्माण मुगल शासक शाहजहाँ ने अपनी प्रिय रानी अर्जुमंद बानो बेगम की याद में करवाया था। शाहजहाँ उसे मुमताज महल कहता था। शाहजहाँ मुमताज महल से अत्यधिक प्रेम करता था। उसकी मृत्यु होने पर उसकी याद में उसने यह स्मारक बनवाया। इसीलिए ताजमहल को प्रेम की निशानी भी माना जाता है। ताजमहल सफेद संगमरमर से बना है। यह बहुत विशाल इमारत है। इसे बनाने में लगभग 20000 हज़ार मजदूर लगे। पूरी इमारत लगभग बाइस वर्षों में बनी।

ताजमहल सन् 1631 में बनना आरंभ हुआ तथा सन् 1653 में इसका निर्माण कार्य पूर्ण रूप से समाप्त हुआ उस्ताद ईसा आफंदी, जो येन के रहने वाले थे तथा मो. शरीफ समरकंदी ताजमहल के प्रमुख वास्तुविद् थे। ताजमहल के लिए संगमरमर मकराना की खानों से लाया गया। ताजमहल के एक ओर मस्जिद तथा दूसरी ओर तस्वीहखाना निर्मित करवाया गया है। ताजमहल के चारों कोनों पर सफेद संगमरमर से बनी चार मीनारें हैं। बीच में बड़ा गुंबदनुमा भवन है। इसी भवन में मुमताज महल तथा शाहजहाँ की कब्र हैं। भवन की ऊपरी सतह पर नकली करें बनाई गई हैं। असली कब्र नीचे है। ताजमहल की सुंदरता को देखने के लिए देश-विदेश से पर्यटक आते हैं।

कवियों ने भी अपनी कविताओं में इसका वर्णन किया है। किसी ने ताजमहल को आँसू की बूँद कहा तो किसी ने चमकता मोती। किसी कवि ने ताजमहल को अलौकिक भवन बताया है, तो किसी कवि को वर्णन करने के लिए शब्द भी नहीं मिल पाते। वर्षा ऋतु के बाद पूर्णिमा के दिन जब इस पर चाँदनी पड़ती है, तो ताजमहल की सुंदरता कई गुणा बढ़ जाती है। वास्तव में ताजमहल मुगलकाल की कला का उत्कृष्ट नमूना है। मैं इसे कई बार देख चुका हूँ परंतु देखने की इच्छा बार-बार होती है। हमें अपनी इस सुंदर इमारत, जो भारतीय संस्कृति व कला का अंग है, पर गर्व है।

ताजमहल

Tajmahal

Essay No. 02

ताजमहल-हमारी सुन्दरतम धरोहर-विश्व के महान् आश्चर्यों में एक अपने सम्पूर्ण सौन्दर्य के साथ हमारी धरती का श्रृंगार करता है। ताजमहल-नाम से ही अपना गुण बखान करता है। इसे ताजों का महल कहें या महलों की ताज़-दोनों ही सटीक बैठता है इसके लिए। यूँ तो इसका निर्माण सिर्फ अपनी पत्नी के प्रति प्रेम प्रदर्शन के प्रतिक के रूप में करवाया गया था परन्तु यह सौन्दर्य और आश्चर्य को पर्याय बन गया। यह किसी परिचय का मोहताज नहीं।

ताजमहल का निर्माण आगस में यमुना नदी के तट पर अपनी पत्नी की कब्र पर 1654 ई. में तत्कालीन मुगल सम्राट शाहजहाँ द्वारा करवाया गया था। कहा जाता है इसके निर्माण में लगभग बाईस वर्ष लगे। लगभग 20 हजार कारीगरों ने इसके निर्माण में अपना योगदान दिया तथा लगभग तीन करोड़ रुपये का खर्च लगा था।

इसका निर्माण सफेद संगमरमर पत्थरों से कराया गया। ये पत्थर नागौर के मकराने से मंगवाया गया। इसमें जो लाल पत्थर लगे हैं, वे धौलपुर और फतेहपुरसीकरी से मंगाए गए थे। पीले तथा काले पत्थर नरबाद तथा चारकोह से लाए गए थे। इसके अलावा जो कीमती पत्थर और सोने-चाँदी इसमें लगे, वे दूर देशों के सम्राटों  से प्राप्त किए गए थे।

ताजमहल का सौन्दर्य चाँदनी रात में सबसे अधिक निखरता है। पूर्णिमा की रात को चाँद की किरणों के साथ इसकी चमक की कोई मिसाल नहीं। ताजमहल के मुख्य भवन के बाहर बहुत ऊँचा और सुन्दर दरवाज़ा है, जिसे बुलन्द दरवाज़ा कहते हैं। यह सुन्दर लाल पत्थरों से बना है। सम्पूर्ण ताजमहल की शिल्पकला और पच्चीकारी आज भी समझ से परे है। इसमें प्रवेश करने के लिए दरवाज़ों से गुजरना पड़ता है जिन पर ‘कुरान-शरीफ’ की आयतें लिखी हैं। इसके आगे भव्य उद्यान के बीचों-बीच ताज के मुख्य द्वार हैं। मध्य में एक सुन्दर झील है। इसकी बनावट अत्यन्त मनोहारी है।

शरद पूर्णिमा की रात तामहल के लिए सबसे सुहानी रात होती है। इस दिन चाँदनी में नहाया ताज आश्चर्यजनक ढंग से अपना सौन्दर्य बिखेरता है। पच्चीकारी में प्रयोग किए गए पत्थरों के रंग अचानक बदल जाते हैं। लाल और हरे रंग के पत्थरों की आभा हीरों-सी चमके लिए दिखाई पड़ती है।

ताजमहल का निर्माण चाहे जिस कारण से भी हुआ हो, जैसे भी हुआ हो, एक बात तो स्पष्ट है कि शाहजहाँ ने अपनी कल्पनाओं से भी ज्यादा अपनी भावनाओं को मूर्त रूप दिया। इसके शिल्पकारों ने भी अपने सम्पूर्ण कौशल का परिचय दिया। कहा जाता है कि उन शिल्पकारों के हाथ काट लिए गए थे ताकि वे इस जैसा दूसरा ताज न खड़ा कर सकें।

वर्ष 2004 में ताज ने 350 वर्ष पूरे किए। उत्तर प्रदेश सरकार ने ताज की शान में एक वर्ष समर्पित किया। पूरे साल सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया। जाता रहा। इस वर्षगाँठ को ‘ताज महोत्सव’ के नाम से मनाया गया और इसका उद्घाटन 27 सितम्बर 2004 को उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री द्वारा किया गया। एक वर्ष तक इसके चलते रहने की घोषणा की गई।

सर्वोच्च न्यायालय द्वारा ताज के रात्रिकालीन दर्शन पर से प्रतिबन्ध हटा लिया गया है। ताज को विश्व के सात आश्चर्यों की श्रेणी में स्थान दिलाने के लिए एक मुहिम-सी चल पड़ी है। सभी लोग अपने-अपने मत दे रहे हैं।

ताज की सबसे बड़ी सच्चाई यह है कि यह हमारा सर्वाधिक गौरवशाली अध्याय है। संपूर्ण विश्वभर से लोग इसे देखने आते हैं। निस्सन्देह ताज सौन्दर्य, प्रेम और आश्चर्य का अनूठा प्रतीक है।

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