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Hindi Essay/Paragraph/Speech on “Sacha Mitra”, “सच्चा मित्र” Complete Essay, Speech for Class 10, Class 12 and Graduation and other classes.

सच्चा मित्र

Sacha Mitra 

निबंध नंबर : 01

  • सच्चा मित्र कौन? • मुख्य विशेषताएँ व कर्तव्य कैसे करें चुनाव?

 

सच्चा मित्र वही है जो मित्र के दु:ख में काम आता है। वह मित्र के कण जैसे दु:ख को भी मेरु के समान भारी मानकर उसकी सहायता करता है। एक सच्चा मित्र प्राणों से भी अधिक मूल्यवान होता है। मित्रता के अभाव में जीवन सूना हो जाता है। आचार्य रामचंद्र शुक्ल के अनुसार- “सच्ची मित्रता में उत्तम वैद्य की-सी निपुणता और परख होती है। अच्छी-से-अच्छी माता का सा धैर्य और कोमलता होती है।” गोस्वामी तुलसीदास ने सच्चे मित्र के विषय में कहा है-

जे न मित्र दुःख होहिं दुखारी,

तिन्हहि बिलोकत पातक भारी।

निज दुःख गिरि सम रजे करि जाना,

मित्रक दु:ख रज मेरु समाना।।

सच्चा मित्र हमारे लिए प्रेरक, सहायक और मार्गदर्शक का काम करता है। जब भी हम निराश होते हैं, मित्र हमारी हिम्मत बढ़ाता है। जब हम परास्त होते हैं, वह उत्साह देता है। सच्चा मित्र हमारे लिए शक्तिवर्धक औषधि बनकर सामने आता है। वह हमें पथभ्रष्ट होने से भी बचाता है और सन्मार्ग की ओर अग्रसर करता है। सच्चा मित्र | सरलता से नहीं मिलता। इसलिए मित्र का चुनाव सोच-समझकर करना चाहिए। केवल बाहरी चमक-दमक, वाक्प टुता अथवा आर्थिक स्थिति को देखकर ही मित्र का चयन कर लेना उचित नहीं है, इसके लिए उसके व्यवहार, आचरण तथा अन्य बातों पर ध्यान देना आवश्यक होता है। सच्चा मित्र सच्चरित्र, विनम्र, सदाचारी तथा विश्वास पात्र होना चाहिए, क्योंकि सच्ची मित्रता मनुष्य के लिए वरदान है। किसी ने ठीक ही कहा है- ‘सच्चा प्रेम दुर्लभ है, सच्ची मित्रता उससे भी दुर्लभ।’

निबंध नंबर : 02

मेरा सच्चा मित्र

Mera Sacha Mitra 

मित्रता का यह सिद्धान्त है कि मित्र कम भले ही हों, लेकिन जो भी हों विश्वासपात्र हों। ऐसे मित्र सर्वत्र नहीं मिल पाते, ढूंढ़ने पर ही मिलते हैं। अगर आपके पास मित्रों पर उड़ाने के लिए पर्याप्त पैसा हो, तो सैकड़ों मित्र बन जाएंगे। और अगर आप गरीबी में जीवन बिता रहे हों तो बहुत कम लोगों को आपकी चिन्ता होगी।

दुनिया में ऐसे बहुत से व्यक्ति होंगे जो आपके प्रति सद्भावना रखते होंगे, लेकिन उन्हें मित्रता के योग्य नहीं माना जा सकता। उनमें से बहुत-से स्वार्थी भी हो सकते हैं, जो मौका पड़ने पर बड़ी आसानी से मुंह फेर सकते हैं।

सच्चे मित्र की पहचान किसी विपत्ति या दुःख के समय ही हो सकती है। सुख व समृद्धि के समय तो सैकड़ों लोग मित्र होने का दावा करते रहते हैं, लेकिन परेशानी या दुःख के समय बहुत गिने-चुने लोग ही पास दिखाई देंगे। वही ऐसे लोग हैं जिन्हें सच्चे अर्थों में दोस्त कहा जा सकता है। बहुत-से लोग बेहद स्वार्थी होते हैं और वे अपना मतलब सिद्ध करना अच्छी तरह जानते हैं। उनके मन में सहानुभूति या सद्भावना का नाम लेश-मात्र भी नहीं होता। वे तो बस औरों का शोषण करना जानते हैं, इसलिए अच्छे मित्र के लिए हमें काफी भटकना पड़ता है।

मेरे कुल चार मित्र ऐसे हैं जो मुसीबत के समय कसौटी पर खरे उतरे हैं। उनमें भी श्री गोविन्द लाल सबसे अधिक विश्वासपात्र सिद्ध हुए। एक बार की बात है, मैं बस में सफर कर रहा था, कि अचानक मेरी जेब कट गई। वह मेरे साथ थे। उन्होंने बडी बहादुरी के साथ आगे बढ़कर जेबकतरे को पकड़ लिया और उससे मेरा मनीबैग छीनकर मुझे दे दिया। उसके बाद उस जेबकतरे को पुलिस चौकी ले जाकर उन्होंने पुलिस के हवाले कर दिया। इस तरह उन्होंने मेरा धन और जीवन दोनों की रक्षा की। उस दिन के बाद से हम दोनों अभिन्न मित्र हो गए। वे एक धनी पिता की सन्तान हैं। उनके पिता एक बहुत बड़ी फैक्ट्री के मालिक हैं, लेकिन वे बड़े वीर, स्पष्टवक्ता और ईमानदार भी हैं।

मैं न तो झूठ बोलता हूँ और न झूठ बोलने वालों को पसन्द करता हूँ। श्री गोविन्द लाल एक सच्चे इन्सान हैं और सच्चाई में ही उनका विश्वास है। संयोग से वह मेरे सहपाठी भी हैं।

पढ़ने में वह मुझसे काफी कमजोर हैं, इसलिए हर रोज शाम को मैं उनकी सहायता खुले दिल से करने को तत्पर रहता हूँ। हम लोग घूमने-फिरने भी साथ-साथ जाते हैं। गोविन्द लाल को कहानी सुनाने का बहुत शौक है। मुझे भी वे अजीबो-गरीब कहानियां सुनाते रहते हैं। वह मेरे घर भी आते हैं और मेरी मां उन्हें सगे बेटे के तरह स्नेह करती हैं।

श्री गोविन्द लाल अपनी पढ़ाई के प्रति बेहद मुस्तैद हैं, लेकिन पढ़ाई में मेरी मदद की उन्हें बड़ी आवश्यकता पड़ती है। चूंकि मेरी दृष्टि में वह छल-कपट से दूर एक निश्छल इन्सान हैं, इसलिए मैं भी हरदम उनकी मदद के लिए तैयार रहता हूँ। मैं भी प्रायः उनके घर जाता रहता हूँ और हम दोनों घण्टों साथ-साथ रहते हैं।

उनका घर एक बंगले में है। उसमें एक छोटी-सी वाटिका भी है। हम दोनों पेड़ों की घनी छाया में बैठकर घण्टों पढ़ते रहते हैं। चारों ओर फूलों की महक फैली रहती हैं और हमारा अध्ययन चलता रहता है। केवल अवकाश वाले दिन ही हम इकट्ठे अध्ययन करते हैं।

मेरे मित्र श्री गोविन्द लाल को धूम्रपान और मद्यपान से बेहद घृणा है। झूठ बोलने से भी उन्हें बहुत चिढ़ है। हर तरह के ऊपरी दिखावे को वह नापसन्द करते हैं। वह दिल से बहुत अच्छे और ईमानदार हैं और किसी के प्रति भी ईर्ष्या भाव नहीं रखते हैं। वह बड़ा मजाकिया है। वह मजाक करता रहता है और हम हंसी-खुशी अपना समय बिताते हैं।

आपको भली-भांति पता है कि ऐसे दोस्त बड़ी मुश्किल से मिल पाते हैं। इस दृष्टि से मैं अपने आपको बेहद भाग्यशाली मानता हूँ कि मेरा एक सच्चा दोस्त है। सच्चे दोस्त या मित्र की सबसे बड़ी पहचान यही है कि वह मुसीबत में कभी पीठ नहीं दिखाता। जबकि मतलबी और स्वार्थी मित्र ऐसा मौका आते ही फौरन भाग खड़े होते हैं। कसौटी पर खरा उतरने वाला मित्र ही सच्चा मित्र कहलाता है।

आप यह दावा नहीं कर सकते कि सारी दुनिया के लोग आपके मित्र हैं। थोड़े-से लोग ही ऐसे मिल पाएंगे जो मित्रता के गुणों से युक्त होंगे और ऐसे ही लोगों के साथ आपकी मित्रता लम्बे अरसे तक निभ सकेगी।

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commentscomments

  1. It’s very helpful for me

  2. Yedant wanjari says:

    Thank you for helping and clearing my doubts.

    • Angel says:

      अखिल भारतीय निबंध प्रतियोगिता
      बाल वर्ग : (कक्षा 6,7,8,)
      विषय :- मित्रक दु:ख रज मेरू समाना | ( मित्रता निभाना)

      इस विषय पर विद्यालय में 13 सितंबर 2021 को निबंध प्रतियोगिता आयोजित की जा रही है ,सभी छात्राओं को इसमें भाग लेना अनिवार्य है|

      शव्द सीमा : 90 से 120
      समय सीमा: 1 घंटा mujhe ya batado ikameans

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