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Hindi Essay, Paragraph, Speech on “Rashtra Bhasha Hindi”, ”राष्ट्र भाषा हिन्दी” Complete Hindi Essay for Class 8, 9, 10, Class 12 and Graduation and other classes.

राष्ट्र भाषा हिन्दी

Rashtra Bhasha Hindi

 

संसार के सभी स्वतंत्र एवं आत्माभिमानी देशों की अपनी राष्ट्र भाषा होती है। सभी स्वतंत्र राष्ट्र अपने देश का कार्य अपनी राष्ट्र भाषा में ही करते हैं। किसी भी देश की राष्ट्र भाषा उस देश की राजनीतिक, आर्थिक, सामाजिक तथा सांस्कृतिक विचार धाराओं की वाहिनी होती है। बिना अपनी राष्ट्रभाषा के कोई भी देश न तो विकास कर सकता है न ही जीवित रह सकता है।

जिस प्रकार चीन की राष्ट्र भाषा चीनी है, फ्रांस की फ्रैंच है, इंग्लैण्ड की अंग्रेजी है, जापान की जापानी है, उसी प्रकार भारत की राष्ट्रभाषा भी। इस देश की ही भाषा हो सकती है। राष्ट्र भाषा वही भाषा बनसकती है, जो देशमें सर्वाधिक व्यापक हो।

भारत एक विशाल देश है। यहाँ अनेकों सशक्त एवं समर्थ भाषाएँ हैं। लोकतंत्र में हर एक विषय का निर्णय बहुमत से होता है। भारतीय संविधान बनाते समय राष्ट्रभाषा के निर्णय पर भी विचार किया गया। सभी भाषाओं को राष्ट्र भाषा के लिए विचार करने पर कुछ तथ्य सामने आए। कुछ लोगों के विचार से अंग्रेजी को ही राष्ट्र भाषा मानना उचित था पर बहुमत इसके पक्ष में न था। किसी विदेशी भाषा को देश की राष्ट्रभाषा मानना देश का अपमान था। भारत जैसे विशाल जनसंख्या वाले देश में उस समय एक करोड़ जनता भी अंग्रेजी से परिचित नहीं थी।

उस समय हिन्दी को ही राष्ट्र भाषा चुना गया। हिन्दी के पक्ष में कई बातें थी। अन्य प्रान्तीय भाषा बोलने और समझने वालों की संख्या सीमिति थी। उस भाषा का अपने प्रान्त के अतिरिक्त अन्यप्रदेश में प्रचलन नहीं था। हिन्दी को क्षेत्र व्यापक है। उस भाषा को मातृभाषा मानने वालों की संख्या उस समय 15 करोड़ थी, जो सभी प्रान्तीय भाषा जानने वालों की संख्या सेभी बहुत अधिक थी। इसके अतिरिक्त प्राय सभी प्रान्तों में इसको समझने वालों की संख्या भी पर्याप्त थी।

हिन्दी का संबंध देश की सभी प्रान्तीय भाषाओं से होने के कारण इसको सरलता से सीखा जा सकता हैं। सभी भाषाओं की मूल संस्कृत होने के कारण हिन्दी के शब्दों का पर्याप्त प्रतिशत भारतीय भाषाओं में पाया जाता है। इसकी लिपि देवनागरी है जो भारत की अधिकांश प्रान्तीय भाषाओं की भी है।

हिन्दी में भारतीय राजनीति, धार्मिक, सांस्कृतिक एवं शैक्षणिक सभी प्रकार के कार्य व्यवहार की संचालन क्षमता हैं। संविधान में उपरोक्त कारणों को ध्यान में रखते हुए हिन्दी को राष्ट्र भाषा का गौरव प्रदान किया गया।

कोई भाषा एकाएक ही प्रयोग नहीं की जा सकती। उसके लिए तैयारी की आवश्यकता होती है। अतएवं 15 वर्षों का समय दिया गया ताकि कर्मचारी इस समय में भाषा सीख कर अपने कार्य में कुशल बन जाए। 1965 से हिन्दी को अंग्रेजी का स्थान दे देने की योजना थी।

इसके लिए सरकार ने केन्द्रीय कार्यालयों के कर्मचारियों को हिन्दी में काम करने के लिए हिन्दी के वर्ग चलाए। उनको अनेक पारितोषिक देकर हिन्दी सीखने की रुचि बढ़ाई। हिन्दी का विकास करने की योजनाएँ भी चलाई। हिन्दी का पारिभाषिक शब्द कोश तैयार किया गया, हिन्दी को समृद्ध बनाने के लिए उसमें प्रादेशिक भाषाओं के शब्दों को भी ग्रहण किया गया।

केन्द्रीय सरकार ने हिन्दी निदेशालय खोलकर हिन्दी के विकास कार्य को आगे बढ़ाया है। केन्द्रीय सरकार के कार्यालयों में अब तक पर्याप्त कार्य हिन्दी में होने लगा है। हिन्दी भाषी प्रान्तों में तो सरकारी कार्य लगभग पूर्ण रूप से हिन्दी में ही होने लगा है। हिन्दी में टंकन यंत्र, आशुलिपि का भी चलन हो चुका है। कम्प्यूटर भी हिन्दी में आ चुके हैं।

दक्षिण भारत में कुछ राजनीतिक कारणों से हिन्दी को राष्ट्र भाषा के रूप में प्रयोग करने का विरोध, सामने आरहा है। यह देश की एकता एवं उन्नति में बाधक है। दक्षिण भारतीय अंग्रेजी को ही पकड़े हुए हैं। उनका विचार है कि अंग्रेजी अंतर्राष्ट्रीय भाषा है। सभी देश इसका उपयोग करते है। अतएव हिन्दी के स्थान पर अंग्रेजी का प्रयोग जारी रखा जाए। पर उनका तर्क कसौटी पर खरा नहीं उतरता। क्या चीन, जापान, रूस, जर्मनी आदि उन्नत देश अंग्रेजी के द्वारा ही समृद्ध हुए हैं। नहीं, वे अपनी ही भाषा को प्रयोग में लाते हैं।

हम कह सकते हैं कि इन वर्षों में हिन्दी ने लगातार उन्नति की है। यद्यपि उसकी गति धीमी है पर देश को साथ लेकर चलना ही श्रेयस्कर है। आगामी वर्षों में हिन्दी राष्ट्र भाषा के रूप में अधिकाधिक प्रयोग में आएगी, उसका भविष्य उज्वल है।

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commentscomments

  1. mike testing says:

    hiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiii

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