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Hindi Essay/Paragraph/Speech on “Professor Amartya Sen”, “प्रो.अमर्त्य सेन” Complete Essay, Speech for Class 10, Class 12 and Graduation and other classes.

नोबेल पुरस्कार विजेता-प्रो.अमर्त्य सेन

Professor Amartya Sen

प्रो. अमर्त्य सेन का जन्म 3 नवंबर, सन् 1934 को बंगाल के छ। शांतिनिकेतन में हुआ था। कोलकाता के प्रेसीडेंसी कॉलेज से माध्यमिक शिक्षा ग्रहण करने के बाद उन्होंने कैम्ब्रिज के ट्रिनिटी कॉलेज से बी.ए., एम.ए. और पी.एच.डी. की उपाधियां ग्रहण कीं। ट्रिनिटी में उन्हें एडम स्मिथ पुरस्कार, रेनबरी स्कॉलरशिप और स्टीवेंशन पुरस्कार से सम्मानित किया गया। जादवपुर विश्वविद्यालय, दिल्ली विश्वविद्यालय, लंदन स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स, लंदन विश्वविद्यालय और ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय के अतिरिक्त उन्होंने भारत और इंग्लैंड के कई विश्वविद्यालयों में अर्थशास्त्र का अध्यापन कार्य किया। उसके बाद वे हॉर्वर्ड विश्वविद्यालय में अर्थशास्त्र और दर्शनशास्त्र के प्रोफेसर रहे। 1998 में उन्हें कैम्ब्रिज में मास्टर ऑफ ट्रिनिटी कॉलेज के रूप में चुना गया। प्रो. सेन नोबेल पुरस्कार प्राप्त करने वाले छह भारतीयों में अर्थशास्त्र के क्षेत्र में प्रथम व्यक्ति हैं। यह पुरस्कार उन्हें कल्याणकारी अर्थशास्त्र के क्षेत्र में उनके योगदानों और सामाजिक समस्याओं में उनकी रुचियों के कारण दिया गया।

खाद्यान की कमी के कारण उत्पन्न अकाल की स्थिति के कारणों की खोज से संबंधित प्रो. सेन के कार्य अत्यंत महत्त्वपूर्ण हैं। इस विषय में उनकी विशेष रुचि का कारण उनका व्यक्तिगत अनुभव है। 1943 का बंगाल को अकाल, जिसमें लगभग तीन मिलियन लोगों की भुखमरी से मृत्यु हो गई थी और जिसे अब तक के भयावह अकालों में से एक माना जाता है। उस अकाल के समय सेन की आयु मात्र 9 वर्ष थी, लेकिन तब भी उस स्थिति का उनके मन पर गहरा प्रभाव पड़ा। अकाल के विषय में डॉ. सेन का विश्वास है कि उस समय इतने लोगों के भूख से मरने का कारण अन्न की कमी नहीं, बल्कि असमान वितरण प्रणाली थी। जिससे केवल एक वर्ग-विशेष ही लाभांवित हो सका था, और बहुसंख्यक वर्ग के लिए वह पहुँच से परे की वस्तु थी।

अपनी पुस्तक ‘पॉवर्टी एण्ड फेमाइन’ में डॉ. सेन ने उद्घाटित किया है कि अकाल के अनेक मामलों में भोजन सामग्री की उचित आपूर्ति नहीं हो पाती है। उनका मानना है कि क्रियाशील लोकतंत्र में अकाल की स्थिति उत्पन्न नहीं होती, क्योंकि उनके नेता नागरिकों की मांग के प्रति ज्यादा उत्तरदायी होते हैं। डॉ. सेन के अनुसार, आर्थिक विकास प्राप्त करने के लिए सामाजिक सुधारों जैसे, शिक्षा और सार्वजनिक स्वास्थ्य में सुधार को आर्थिक सुधारों की अपेक्षा अधिक प्राथमिकता दी जानी चाहिए।

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