Home » Languages » Hindi (Sr. Secondary) » Hindi Essay/Paragraph/Speech on “Parmanu Bomb ki Upyogita”, “परमाणु बम की उपयोगिता” Complete Essay, Speech for Class 10, Class 12 and Graduation and other classes.

Hindi Essay/Paragraph/Speech on “Parmanu Bomb ki Upyogita”, “परमाणु बम की उपयोगिता” Complete Essay, Speech for Class 10, Class 12 and Graduation and other classes.

परमाणु बम की उपयोगिता

Parmanu Bomb ki Upyogita 

प्रस्तावना : उपयोगी और वह भी बम ! लेकिन फिर भी यह एक अनुभूत तथ्य है।  कि हर वस्तु का चाहे वह कितनी ही भयावह और मारक क्यों न हो, एक उजला एवं उपयोगी पक्ष भी हुआ करता है। साँप जी हाँ, साँप और उस का विष मात्र एक ही क्षण में मनुष्य के प्राण तक ले सकता है। लेकिन उसी विष से आरमीन से ही संसार में . अनेक महत्त्वपूर्ण प्राणरक्षक दवाइयों का निर्माण भी किया जा रहा है। सो ‘अणु बम की उपयोगिता जैसे विषय को सुनकर चौंकने या घबराने की कोई बात नहीं है। 

इस वस्तु सत्य से प्रत्येक व्यक्ति का परिचित रहना आवश्यक है। कि इस संसार में दृश्य-अदृश्य जो कुछ भी है। , वह सब अणुओं-परमाणुओं की ही रचना और देन है। यहाँ तक कि हमारा शरीर भी बहुत सारे अणुओं-परमाणुओं का ही इकट्ठा रूप है।  जिस दिन टूट जाएगा, उस दिन हमारा शरीर तो क्या, संसार और उसका प्रत्येक पदार्थ बिखर कर समाप्त हो जाएगा सो हमारे कहने का तात्पर्य यह है।  कि अणु में यदि विध्वंस या विनाश करने की अत्यधिक शक्ति छिपी हुई है। , तो उससे भी कहीं बढ़ कर निर्माण की अनन्त शक्ति भी उसमें विद्यमान है। 

अतीत में अण बम : अणु बम की उपयोगिता जैसे विषय सुनकर वास्तव में हम चौंक इस कारण उठते है। । कि अपने निकट अतीत में, द्वितीय विश्व युद्ध के अन्तिम चरण में जापान के हीरोशिमा और नागासाकी नामक नगरों पर हम इसका मारक प्रभाव देख चुके है। ।उसका लोमहर्षक दुष्प्रभाव और वहाँ होने वाली विनाशलीला स्मरण आकर’ आज भी रोंगटे खड़े कर देती है। लेकिन संसार-विशेषकरज्ञान-विज्ञान का संसार, राजनीति और उसके प्रभावों का संसार आज बहुत आगे बढ़ चुका है। फिर जहाँ तक अणु बमों के मारक स्वरूप का प्रश्न है। , आज उससे भी बढ़-चढ़ कर मारक शक्ति रखने वाले शस्त्रास्त्र विनिर्मित हो चुके है। ।फिर भी इस का यह अभिप्राय कदापि नहीं है।  कि ऐसा सब हो जाने पर अणु बम की अपनी उपयोगिता भी समाप्त हो गई है। नहीं, आज उसका अन्य कई प्रकार से प्रयोग एवं उपयोग होने लगा है। 

वर्तमान में दबाव-प्रभाव का अस्त्र : आज अणु बम का उपयोग कई कार्यों के लिए किया जा रहा है। अणु बम से चट्टानें उड़ा कर रास्ते , सड़कें, रेलपथ, सुरंगें आदि बनाना सरल हो गया है। इसका प्रयोग कर धरती का वक्ष चीर जल के स्रोत भी प्राप्त किए गए या किए जा सकते है। ।प्रकृति और पर्यावरण की रक्षा और जानकारी के लिए, वातावरण की मारक सघनता से छुटकारा पाने के लिए, कई प्रकार के भूगर्भीय एवं अन्तरिक्षीय अनुसन्धानों के लिए भी अणु बमों का उपयोग किया जा रहा या किया जा सकता है। इस प्रकार के ज्ञान-विज्ञान-सम्बन्धी कई प्रकार के उपयोगों के अतिरिक्त आज राजनीति निहित-स्वार्थों की पूर्ति के लिए भी अणु-शक्ति एवं अणु बमों का एक दबाव और प्रभाव डालने के लिए उपयोग किया जा रहा है। ” मैंने अणु बम बना लिया है।  -हमारे पास अणु बम है।  या हमने प्राप्त कर लिया है। ” इस प्रकार की घोषणाएँ कर के कोई छोटा एवं सामान्य देश भी बड़े सम्पन्न देशों को प्रभावित कर सकता है। उससे राजनीतिक और आर्थिक लाभ प्राप्त कर सकता है।  ; बल्कि कर रहा है। अणुबम निर्माण की दिशा में पाकिस्तान की सक्रियता उसका इसी प्रकार का उपयोग कर के लाभान्वित हो रही है। 

शस्ति-सन्तुलन, अपना प्रभाव और वर्चस्व बनाए रखना भी आज अणु बम का एक महत्त्वपूर्ण उपयोग है। अपना शक्ति-सन्तुलन बनाए रखने और किसी भी तरह उसे बिगड़ने न देने की उत्कट अभिलाषा से प्रेरित हो कर ही भारत ‘अणु-निषेध-सन्धि’ पर हस्ताक्षर कर अपने इस राष्ट्रीय-हित-साधन के प्रभाव एवं लाभ से वंचित नहीं होना चाहताआज यदि भारत जैसा शान्तिप्रिय, आज तक मात्र शान्ति-रक्षा और विस्तार के लिए ही अणु-शक्ति का उपयोग करने वाला देश अब अणु बम-निर्माण की बात करने लगा है। , तो यह जान करके ही कि अपनी सार्वभौमिकता, वर्चस्व की रक्षा एवं क्षेत्रीय शक्ति-सन्तुलन के लिए यह आवश्यक है। ऐसा करके वह आस-पड़ोस के कुण्ठित मनोवृत्तियों वाले पड़ोसियों एवं दूर-दराज के दादावृत्ति देशों के अपरचित-अकारण पड़ने वाले दबावों-प्रभावों से बच रह सकता है। उत्तरी कोरिया जैसे देश पर हाथ डालने की हिम्मत अमेरिका-समर्पित दक्षिणी कोरिया इसी कारण तो कर नहीं पा रहा कि अणु बम होने का उसका दबाव कायम है। सो स्पष्ट है।  कि दबाव-प्रभाव डालने या उस से बचे रहने के लिए अणु बम आज निश्चय ही एक अत्यन्त उपयोगी अस्त्र है। ।

अन्य उपयोग : अणुबम बनाने के लिए अणु-परमाणु का भेदन कर पाने की क्षमता हासिल कर पाना आवश्यक हुआ करता है। उस क्षमता के द्वारा अणु शक्ति के अन्य कई प्रकार के उपयोग भी सम्भव है। ।मानव-शरीर के निर्माता जैविक तत्त्वों की जानकारी पाई जा सकती है। कई रोगों का निदान एवं उपचार सम्भव है। आज जो एक्सरे और अल्ट्रा साउण्ड जैसी मशीनें, चिकित्सा सम्बन्धी अन्य कई तरह के उपकरण उपलब्ध है। । और नित नए-नए हो रहे है। ।, अन्य क्षेत्रों में भी कई प्रकार के यंत्रों का निर्माण होकर आगमन हो रहा है। , कम्प्यूटर एवं उसकी विविध प्रणालियाँ एवं उपयोग है। । ; ये सब अणु-शक्ति एवं अणु-विखण्ड का ही सत्परिणाम है। । और न भविष्य में ही हो सकते  है। ।।

उपसंहार : इस सारे विवेचन-विश्लेषण, तरह-तरह के परीक्षणों एवं अनुभवों के आधार से स्पष्ट है।  कि यदि एक अणु बम् अपनी मारक क्षमता के कारण घोर चिन्ता का विषय है। , तो दूसरी ओर वह मानव-जीवन को सुखी एवं समृद्ध बनाने की अनन्त उपयोगी सम्भावनाओं से भी सम्पन्न एवं परिपूर्ण है। ऐसे में वास्तविक आवश्यकता इस बात की है।  कि राजनीतिज्ञ एवं विज्ञानी मानव सहज मानवीय विवेक की डोर अपने हाथों से कभी न खिसकने दें तभी अणु बम या अणु शक्ति मानवता की रक्षक सिद्ध हो सकती है। , नहीं तो विनाशक तो सिद्ध है ही ।

About

The main objective of this website is to provide quality study material to all students (from 1st to 12th class of any board) irrespective of their background as our motto is “Education for Everyone”. It is also a very good platform for teachers who want to share their valuable knowledge.

Leave a Reply

Your email address will not be published.