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Hindi Essay/Paragraph/Speech on “Parivar Niyojan”, “परिवार नियोजन” Complete Essay, Speech for Class 10, Class 12 and Graduation and other classes.

परिवार नियोजन

Parivar Niyojan

प्रस्तावना : सैकड़ों वर्षों की दासता के पश्चात् स्वतन्त्रता का आलिंगन कर भारत ने आर्थिक, सामाजिक, शैक्षिक और औद्योगिक आदि क्षेत्रों में पर्याप्त उन्नति की। आज के वैज्ञानिक युग में अच्छा स्वास्थ्य लाभ औषधियों के माध्यम से प्राप्त किया। मानव के अन्दर स्वाभाविक रूप से प्रजनन की प्रक्रिया में वृद्धि हो गई। मनुष्य के जीवन की समस्त प्रसन्नता उसके परिवार में निहित होती है; किन्तु यदि परिवार सीमा से अधिक विस्तृत हो जाता है, तो यही सुख अभिशाप बन जाता है। हमारे कर्णधारों ने परिवार नियोजन की आवश्यकता पर जोर दिया है।

परिवार नियोजन का अर्थ : परिवार नियोजन का सामान्य अर्थ है अपने परिवार को इस प्रकार से नियोजित करना कि परिवार के प्रत्येक सदस्य को सामान्य सुख सुविधाएँ प्राप्त हो सकें। आधुनिक विद्वान् एक या दो बच्चे वाले परिवार को सीमित तथा उपयुक्त परिवार मानते हैं।

परिवार नियोजन के प्रकार : परिवार नियोजन के विभिन्न तरीके हैं। इनमें सबसे अच्छा उपाय आत्मसंयम है। इससे शरीर स्वस्थ रहेगा, आयु अपनी तथा बच्चे की भी दीर्घ होगी। यही कारण है कि पहले के लोग बलिष्ठ तथा दीर्घजीवी होते थे। भारतीय योगासन भी इसमें सहयोग देते हैं। यह प्राचीन विधियाँ आज के वैज्ञानिक युग एवं सिनेमा जगत में कुछ कार्य नहीं कर पा रही हैं। अत: भारतीय सरकार ने पुरुषों के लिए नसबन्दी’ तथा स्त्रियों के लिये ‘ऑपरेशन’ और ‘लूप’ प्रणाली को प्रारम्भ किया। जो लोग इन विधियों को नहीं अपनाना चाहते हैं। उनके लिये ‘निरोध’ एवं दवाई की गोलियाँ जैसे साधन बनाए। परन्तु इन साधनों में धोखे का भय है।

परिवार नियोजन से लाभ : परिवार नियोजन से अनेक लाभ हैं। जिनमें प्रमुख लाभ इस प्रकार हैं :

जनसंख्या की वृद्धि पर रोक : परिवार नियोजन से जनसंख्या की अनाप-सनाप वृद्धि टिक जायेगी।

स्वास्थ्य लाभ : शीघ्रता से सन्तान होने से गाताओं का स्वास्थ्य जो खराब हो जाता है उसमें रुकावट होगी । कम सन्तान होने पर। अच्छा खाने को मिलेगा। इससे स्वास्थ्य स्वयं अच्छा होगा।

आर्थिक समृद्धि : परिवार में सदस्यों की कम संख्या होने से। भोजन, वस्त्र आदि पर कम व्यय होगा, जिससे आर्थिक स्थिति में सुधार होगा।

उपज में वृद्धि : परिवार नियोजन होने से उत्तराधिकारी कम होंगे। अतः अधिक भूमि हिस्से में पड़ेगी, तो उपज स्वत: अधिक होगी।

देश की उन्नति : ज़ब देश के प्रायः परिवार सुखी होंगे, तो देश शिक्षा एवं स्वास्थ्य आदि सभी दृष्टिकोणों से उन्नति करेगा।

परिवार नियोज़न से हानियाँ : अभी तक लूप, नसबन्दी और ऑपरेशन सम्पूर्णत: लाभप्रद नहीं सिद्ध हुए हैं। उससे कैंसर और टिट्नस आदि रोगों के उत्पन्न होने का प्राय: भय बना रहता है। इसके साथ ही साथ परिवार नियोजन के साधनों पर केवल निर्भर रहने वाले भीषण विपत्ति में भी प्रायः पड़ते देखे गए हैं। आज प्रायः लूप अविवाहिताओं, विधवाओं के तथा ऑपरेशन पत्नी हीन युवा पुरुषों के हो रहे हैं, इससे भ्रटाचार को खुले आम बढ़ावा प्राप्त हुआ और खुले आम हमारे देश में अविवाहित मातृत्व की संख्या में वृद्धि हुई है। कुछ लड़कियाँ तो लूप या निरोध में धोखा खा जाती हैं और मौत तक की शिकार हो जाती हैं, एक नहीं ऐसी अनेक घटनाएँ होती हैं।

मार्ग की बाधाएँ : यद्यपि हमारी जनप्रिय सरकार परिवार नियोजन के लिए पर्याप्त प्रयास कर रही है; परन्तु उसके मार्ग में अनेक बाधाएँ हैं, जिनमें से प्रमुख इस प्रकार हैं :

अशिक्षा : अभी भी भारतीय जनता अधिकतर अशिक्षित है। अत: वह लूप, ऑपरेशन व नसबन्दी से डरते हैं।

धर्म भावना : भारत के धर्म भीरु जन सन्तानोत्पत्ति को ईश्वरेच्छा कहकर उसमें बाधा नहीं डालना चाहते हैं। ईसाइयों में भी कैथोलिक धर्म परिवार नियोजन’ का विरोध करता है।

भाग्यवाद : बहुत से व्यक्ति कहते हैं, सब अपने भाग्य का खाते हैं और हम चाहे कितना प्रयत्न करें जितनी सन्ताने भाग्य में लिखी होंगी, वह हमको मिलेंगी ही। यह सभी बातें परिवार नियोजन में बाधाएँ हैं।

परिवार नियोजन के क्षेत्र में भारत में किए गए कार्य : हमारी सरकार इसके लिए बहुत प्रयत्न कर रही है। प्रतिवर्ष इसका लक्ष्य निश्चित किया जाता है। आजकल सरकार विज्ञान के माध्यम से रासायनिक एवं यान्त्रिक उपकरणों एवं नवीनतम विधियों द्वारा बर्थ कन्ट्रोल को बड़े जोरों से उपक्रम कर रही है।

प्रसार एवं प्रचार के उपाय : इतना अधिक व्यय करने के पश्चात् भी सरकार को इसका पूरा लाभ नहीं हो रहा है। वास्तव में आज इसका प्रसार तथा प्रचार देश के हित के लिए अति आवश्यक है। अतः इसके लिये निम्न उपाय आवश्यक हैं –

शिक्षा का प्रसार : शिक्षा के प्रसार से व्यक्ति भाग्यवाद को त्याग कर अपना तथा देश का हित समझेगा । इससे परिवार नियोजन की उसकी स्वतः प्रवृत्ति होगी।

धर्म के सही अर्थ का प्रचार : धर्म का अर्थ धारण रहना अर्थात् आनन्द के साथ जीवन बिताना है। आनन्द के साथ जीवन आज के महँगाई के युग में सीमित परिवार में ही बिताया जा सकता है।

प्रचार की तीव्रता : यद्यपि हमारी जनप्रिय सरकार पोस्टरों एवं चलचित्रों के माध्यम से दो या तीन बच्चे, होते हैं, घर में अच्छे, ‘छोटा परिवार, सुखी परिवार’, ‘चौथा पलना मत ला अंगना, बिक जायेगा मेरा कंगना’ जैसे आदर्श वाक्यों के माध्यम से परिवार नियोजन के प्रयास कर रही है, फिर भी अभी यह प्रचार नगरों तक सीमित है। इसका अधिकाधिक प्रचार अशिक्षित देहाती क्षेत्रों में होना चाहिए।

सुविधाएँ प्रदान करना : अस्पतालों में नशबन्दी, लूप आदि का प्रबन्ध तो है, किन्तु अधिकारी इस प्रकार के व्यक्तियों पर विशेष ध्यान नहीं देती, उन्हें विशेष ध्यान देकर प्रोत्साहित करना चाहिए। सरकार कर्मचारियों को कर आदि से मुक्ति का प्रलोभन देकर इसे बढावा दे सकती है।

विवाह की अवस्था में वृद्धि : सरकार अनिवार्य रूप से विवाह की अवस्था में वृद्धि कर दे, इससे भी कुछ लाभ अवश्य होगा।

उपसंहार : आज के अशिक्षित समाज में मनोरंजन का साधन एकमात्र पत्नी है। परिणामस्वरूप दस-दस बारह बारह छगरी जैसे बच्चे घूम रहे हैं और हम आज दिन-रात नमक-तेल लकड़ी की चिन्ता में पिसे जा रहे हैं। आज कार्य की व्यस्तता में हम कोल्हू के बैल हो रहे हैं।

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