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Hindi Essay/Paragraph/Speech on “Dr. Manmohan Singh”, “डॉ. मनमोहन सिंह” Complete Essay, Speech for Class 10, Class 12 and Graduation and other classes.

डॉ. मनमोहन सिंह

Dr. Manmohan Singh

भारत के 14 वें प्रधानमंत्री के रूप में डॉ. मनमोहन सिंह जी शरारत के भविष्य निर्माता हैं। एक लंबे समय के पश्चात् सत्ता परिवर्तन द्वारा काँग्रेस पार्टी की सरकार बनीं। 1991 में डॉ. मनमोहन सिंह जी वित्त मंत्री भी रह चुके हैं। भारत की आर्थिक स्थिति को मजबूत करने के लिए सत्ता की भूमिका अहम होती है।

डॉ. मनमोहन सिंह का जन्म पंजाब के एक गांव गाह (जो अब पाकिस्तान में है) 26-9-1932 में हुआ। इनके पिता सरदार गुरूमुख सिंह और माँ अमित कौर थे। प्रारंभिक शिक्षा प्राप्त कर वे 1952 में पंजाब यूनिवर्सिटी से प्रथम श्रेणी में बी.ए. (वो भी ऑनर्स) किया। उसी वर्ष प्रथम श्रेणी में अर्थशास्त्र में भी परीक्षा उत्तीर्ण की। सेंट जोंस कॉलेज कैम्ब्रिज ने सन् 1957 में डॉ. मनमोहन सिंह को पढ़ाई में अच्छा प्रदर्शन करने के लिए पुरस्कृत भी किया। इसके बाद 1957 में ही उन्हें पी.एच.डी. का शोध कार्य ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी से किया।

उनका विवाह सन् 1958 को गुरशरन कौर से हुआ। उनकी तीन पुत्रियां हुईं। इसी दौरान वे अर्थशास्त्र के वरिष्ठ प्रवक्ता के रूप में कार्य करते रहे। सन् 1959 से 1963 तक अर्थशास्त्र के प्रोफेसर के रूप में पंजाब विश्वविद्यालय, चंडीगढ़ में कार्य किया। इसके पश्चात् सन् 1963 से 1965 तक देहली स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स में अध्यापन का कार्य किया। और इसी क्षेत्र में सन् 1969 से 1971 तक जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय में अवैतनिक प्रोफेसर रहे।

वे विभिन्न पदों पर कार्य करते रहे, सन् 1976 से 1980 तक रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया के निदेशक रहे। सन् 1976 से 1980 तक वित्त मंत्रालय में सचिव रहे। सन् 1980 से 1982 तक योजना आयोग के सचिव सदस्य पद पर रहे। सन् 1982 से 1985 तक रिजर्व बैंक के गर्वनर रहे। सन् 1985 में इंडियन इकॉनोमिक्स एसोसिएशन के अध्यक्ष बने। सन् 1985 से 1987 तक पुनः योजना आयोग के उपाध्यक्ष बने। सन् 1990 से 1991 तक आर्थिक मामलों में प्रधानमंत्री के सलाहकार रहे और सन् 1991 मार्च से 1991 जून तक विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के अध्यक्ष।।

विमर्शों के साथ 1991 में सत्ता में पुनः वापिस लौटी काँग्रेस सरकार के तत्कालिन प्रधानमंत्री नरसिम्हा राव ने मनमोहन सिंह को वित्त मंत्री नियुक्त किया। वे भारत के अब तक के लंबे समय तक रहने वाले वित्त मंत्री बने । उनका राजनीतिक सफर वित्त मंत्री के रूप में ही आरंभ हुआ था। वे बेदाग कार्य करते रहे और न ही किसी विवाद में पड़े। उनका व्यक्तित्व सीदा-सादा रहा। वे अंहकार नहीं करते थे।

डॉ. मनमोहन सिंह तीन बार राज्यसभा के लिए निर्वाचित हुए। सन् 1996 में वह वित्त मंत्रालय की सलाहकार समिति के सदस्य बनाए गए। वर्ष 1998 से 2001 तक संसदीय समिति के सदस्य। भाग्य बदलने वाला था, खुदा को कुछ और करना था। उनका भाग्य पलटा और नाम प्रधानमंत्री के पद के लिए पेश किया गया। अंततः वे भारत के प्रथन के प्रथम सिक्ख प्रधानमंत्री के रूप में नियुक्त हुए।

डॉ. मनमोहन सिंह एक अच्छे लेखक के रूप में भी जाने जाते हैं। उनकी पुस्तक – India’s Export Trends & Prospects for Self Sustained Growth काफी चर्चित रही। सन् 1964 में ऑक्सफॉर्ड विश्वविद्यालय प्रेस द्वारा उनके निबंधों का संग्रह भी प्रकाशन किया गया। उन्हें कई पुरस्कार भी प्राप्त हुए। सन् 1987 में भारत सरकार द्वारा उन्हें पद्मभूषण से सम्मानित किया गया। | डॉ. मनमोहन सिंह ने एक शिक्षक के रूप में एक लंबा समय बिताया है। उनके छात्र आज भी उन्हें एक महान शिक्षक के रूप में सराहते हैं। वे निष्ठावान धार्मिक व्यक्ति हैं, हालाँकि धर्म को ये ढोते नहीं है। यह भारत के प्रथम अल्पसंख्यक समुदाय के प्रदानमंत्री हैं। इनकी गैर-विवादित छवि से भारत के नागरिकों को, हर वर्ग को काफी उम्मीदें हैं। इन्हें भारत के कई विरोधाभासों के साथ सामंजस्य स्थापित कर देश चलाना है क्योंकि भारत का वर्तमान राजनैतिक परिप्रेक्ष्य इतना स्तरहीन हो गया है कि उनके जैसे साफ-सुथरी छवि वाले व्यक्ति के लिए इसे संभालना मुश्किल पड़ सकता है। फिर भी उनके धैर्य, तीक्ष्णता, कर्तव्यपरायणता, निष्ठा, ईमानदारी को देखते हुए कहा जा सकता है कि किसी भी परिस्थिति से जूझने की क्षमता उनमें है, उन्होंने अपनी शपथ ग्रहण के बाद ही प्रेस कान्फ्रेंस में अपनी प्राथमिकताएँ स्पष्ट कर दी थीं।

| अब उन्हें देश की बागडोर संभालना है, सब जानते हैं कि वे उदारवादी हैं। इस राजनीतिक संत का दृष्टिकोण राजनीति के प्रति बहुत साफ है। वे जीवन के हर क्षेत्रों में अपनी भूमिका गंभीरता से निभाते हैं तथा भारत को एक महान् देश के स्थान पर देखने के अभिलाषी हैं।

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