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Hindi Essay/Paragraph/Speech on “Dr. Manmohan Singh”, “डॉ. मनमोहन सिंह” Complete Essay, Speech for Class 10, Class 12 and Graduation and other classes.

डॉ. मनमोहन सिंह

Dr. Manmohan Singh

भारतीय अर्थव्यवस्था के ‘मुक्तिदाता’ के नाम से प्रसिद्ध डॉ. मनमोहन सिंह भारतीय राजनीति के गैर-राजनीतिक चेहरों में से एक हैं। इनका जन्म 26 सितंबर, 1932 को पश्चिमी पंजाब (अब पाकिस्तान में) के गाह नामक स्थान पर हुआ था। उन्होंने चंडीगढ़ और कनाडा में

अर्थशास्त्र का अध्ययन किया। उनके शैक्षिक जीवन की शुरुआत पंजाब यूनिवर्सिटी, चंडीगढ़ में अर्थशास्त्र के प्रवक्ता के रूप में सन् 1957 से हुई, बाद में उन्होंने उसी यूनिवर्सिटी में अर्थशास्त्र के रीडर एवं प्रोफेसर के रूप में अध्यापन भी किया। उन्हें 1969 में दिल्ली विश्वविद्यालय के दिल्ली स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स में अंतर्राष्ट्रीय व्यापार का प्रोफेसर नियुक्त किया गया। वहाँ इस पद पर उन्होंने 1971 तक सेवा की। डॉ. सिंह ने राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद् (NCERT) के राष्ट्रीय शैक्षिक संस्थान में नेशनल फैलो के रूप में भी कार्य किया। इसके अतिरिक्त अन्य विदेशी कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में आनररी फैलो के रूप में भी इनकी सेवाएँ महत्त्वपूर्ण हैं।

डॉ. सिंह को भारतीय अर्थव्यवस्था सुधार कार्यक्रम का वास्तुविद् माना जाता है। ये एक कुशल अर्थशास्त्री हैं, और अपनी कुशलता से इन्होंने देश की अनेक रूपों में सेवा की। इनके अर्थशास्त्रीय जीवन का अधिकांश भाग भारतीय नौकरशाही के एक महत्त्वपूर्ण सदस्य के रूप में प्रशंसनीय है। 1982 से 1985 तक के वर्षों में इन्होंने रिजर्व बैंक के गवर्नर के रूप में अत्यंत महत्त्वपूर्ण कार्य किए। उसके बाद इन्हें राजनीति की ओर आकर्षित किया गया और ये श्री पी.वी.नरसिंहाराव की मंत्रिपरिषद में वित्तमंत्री बन गए।

1991 में जब इन्हें वित्तमंत्री बनाया गया था, उस समय भारत की अर्थव्यवस्था बड़ी ही अस्त-व्यस्त स्थिति में थी। देश का राजकोषीय घाटा GDP के 8.5 प्रतिशत के बराबर तक पहुँच गया था, जो वर्तमान घाटे की दर का लगभग दुगुना था। देश में भुगतान असंतुलन की गंभीर स्थिति बनी। हुई थी। चालू खाते का घा| GDP के 3.5 प्रतिशत तक पहुँच गया था, और उस समय इसे पूरा करने के लिए कोई भी विदेशी वित्तपोषक ऋण देने के लिए तैयार नहीं था। दूसरे शब्दों में, भारत दिवालियेपन की कगार पर पहुँच चुका था। ऐसी गंभीर परिस्थिति में डॉ. सिंह ने देश की अर्थव्यवस्था को वैश्वीकरण के मार्ग पर लाने के लिए उसका उदारीकरण किया। अंतर्राष्ट्रीय मुद्राकोष और एशिया विकास बैंक में अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर कार्य करने के अतिरिक्त डॉ. सिंह ने भारत की केंद्र सरकार में वित्तीय मामलों के सलाहकार के रूप में सेवा की।

भारत के वित्तमंत्री के रूप में डॉ. मनमोहन सिंह ने लालफीताशाही को समाप्त करके देश की कर प्रणाली को सरल बनाया। व्यापार के अनुकूल स्थिति उत्पन्न करने के लिए उन्होंने व्यापार पर लगे कड़े प्रतिबंधों और विनियमों को हटाया। फलस्वरूप, अर्थव्यवस्था पुनर्जीवित हुई, उद्योगों में वृधि हुई तथा मुद्रास्फीति में कमी अनुभव की गई। इस प्रकार विकास दर में भी काफी सुधार हुआ। डॉ. सिंह की अगुवाई में अर्थव्यवस्था की विकास दर 7 प्रतिशत वार्षिक तक पहुँच गई। जब वे भारत के वित्तमंत्री थे, उस समय उन्होंने अपनी राजनीतिक पूंजी श्री पी. वी. नरसिंहा राव से प्राप्त की। 1991 में इन्हें पहली बार राज्यसभा का सदस्य चुना गया और इस पद पर। उन्होंने कांग्रेस का प्रतिनिधित्व किया।

डॉ. मनमोहन सिंह का राजनीतिक कैरियर अत्यंत स्पष्ट एवं शांत रहा। है। 2004 के आम चुनावों के दौरान डॉ. सिंह श्रीमती सोनिया गांधी के सलाहकार रहे। श्रीमती गांधी के नेतृत्व में कांग्रेस पार्टी को आश्चर्यजनक सफलता मिली। वाममोर्चा ने कांग्रेस गठबंधन को बाहर से समर्थन देने का। फैसला किया। श्रीमती गांधी को कांग्रेस संसदीय दल का नेता चुना गया। और उन्होंने प्रधानमंत्री बनना भी स्वीकार कर लिया। परंतु बाद में, उन्होंने प्रधानमंत्री बनने से इंकार कर डॉ. मनमोहन सिंह को अप्रत्याशित रूप से प्रधानमंत्री पद के लिए नामांकित कर दिया। डॉ. सिंह को 22 मई, 2004 । को देश के 14वें प्रधानमंत्री के रूप में शपथ दिलाई गई।

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