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Hindi Essay/Paragraph/Speech on “Bharat me Cinema ke Prabhav”, “भारत में सिनेमा के प्रभाव” Complete Essay, Speech for Class 10, Class 12 and Graduation and other classes.

भारत में सिनेमा के प्रभाव

Bharat me Cinema ke Prabhav

प्रस्तावना : विगत छ: सात दशकों में विज्ञान के जिन आविष्कारों ने जीवन में सुख एवं समृद्धि की लहर उत्पन्न की, उनमें चलचित्र विशेष रूप से उल्लेखनीय है। हमारा मस्तिष्क एवं रहन-सहन इसके प्रभाव से वंचित न रह सका। सच तो यह है कि इस आधुनिक युग के प्राणी को इस आविष्कार ने बिल्कुल ही बदल डाला है।

चलचित्र का आविष्कार : चलचित्र का आविष्कार छाया चित्रण की कला के क्रमिक विकास से हुआ है। दिन प्रतिदिन छाया चित्रों की बढ़ोतरी पर इन चित्रों को किसी यंत्र द्वारा श्वेत आवरण पट पर क्रम से फेंकने और इस तरह उन्हें दिखाने की बात वैज्ञानिकों के मन में घुसी, सफलता ने चरण छुए अमरीकी वैज्ञानिक एडीसन के और चित्रपट का आविष्कार हुआ । इसके बाद मूक रूप में अनेक कथांशों के चित्रों को क्रम से सँजोकर पर्दे पर एक नाटक की भाँति दिखाया जाने लगा। उस समय इन्हें मौन चित्र का नाम दिया गया। कुछ समय पश्चात् इसमें स्वर की योजना बनाई गई। तब से इन्हें वाणी चित्र कहा जाने लगा। भारत में इनका आगमन प्रथम महायुद्ध से कुछ समय पूर्व ही हुआ था।

चलचित्र की प्रगति : आज विज्ञान का यह आविष्कार प्रगति पर है। इन्हें दिखाने के लिए आधुनिकतम प्रसाधनों से युक्त सुन्दर ‘छविगृहों’ का निर्माण हो चुका है। इनमें दर्शक आराम से बैठते हैं। उनके समक्ष एक बड़े श्वेत पट पर छविगृह के पिछले भाग से । निक्षेपक यन्त्र द्वारा छोटे-छोटे चित्रों को बड़े आकार में उभारा जाता। है और इस प्रकार जीती-जागती तस्वीर दर्शकों के सम्मुख आती है। स्वर-ध्वनि का प्रबन्ध भी उसी अवस्था से किया जाता है।

चलचित्र : मनोरंजन के साधन : चलचित्र आज के युग में मनोरंजन का सबसे बढ़िया और सस्ता साधन है। इसके द्वारा दो-ढाई । घंटे में मनोरंजन की इतनी सामग्री मिल जाती है, जो अन्य किसी उपाय से सम्भव नहीं।  आज इसके द्वारा शिक्षा का प्रसार किया जा रहा है। निरक्षर को साक्षर किया जा रहा है। भारतीय जन-जन को अनेक जटिल समस्याओं से अवगत कराने के लिये, देश-विदेश की गतिविधियों से प्रत्यक्ष कराने के लिये इसका सहारा लिया जा रहा है; क्योंकि इसका प्रभाव व्यापक एवं स्थायी होता है। विदेशों में तो इनके द्वारा शिशुओं को भूगोल, इतिहास और गणित आदि की शिक्षा दी जाती है।

साहित्य के क्षेत्र में चलचित्रों की सबसे बड़ी प्रतियोगिता नाटकों के द्वारा हुई । इसके प्रसार ने शीघ्र ही नाट्य-कम्पनियों का बिस्तर गोल कर दिया।

चलचित्रों का भारत में स्थान : चलचित्रों में हमारे देश का तीसरा स्थान है। पहला स्थान हालीवुड और दूसरा स्थान जापान का है। सच तो यह है कि चलचित्रों द्वारा किसी देश की संस्कृति, सभ्यता, सामाजिक परिस्थितियाँ और समय-समय पर होने वाली रीतियों का दिग्दर्शन होता रहता है। अतः हालीवुड में निर्मित । चलचित्रों के कथानक प्रेम एवं मार-धाड़ पर ही आधारित होते हैं। जापान में निर्मित चित्र वहाँ के परम्परागत सौन्दर्य के ही दर्शन कराते हैं। रूसी चित्रों में साम्यवाद के प्रचार की झलक स्पष्ट है ।

फैशन का जन्मदाता : दूसरी वस्तुओं की तरह चलचित्र भी अच्छाई और बुराई दोनों से घिरा हुआ है। अश्लील चित्रों द्वारा समाज में ऐश्वर्य की भावना बढ़ती है। युवक-युवतियाँ अपने धर्म से गिर जाते हैं। अनेक प्रकार के अपराध बढ़ जाते हैं। चोरी, डकैती, जुआ। और मदिरापान आदि बुरी आदतें भी इसी के द्वारा लग जाया करती हैं। धन एवं समय का दुरुपयोग भी होता है। इस पर भी यदि इसे फैशन का जन्मदाता कहा जाये तो अतिशयोक्ति न होगी।

आदर्शवादी चलचित्र : इसके साथ-साथ ही चलचित्र सौन्दर्य की भावना की सन्तुष्टि और हृदय के कोमल स्थलों को स्पर्श करने में अद्वितीय है। आदर्शवादी चलचित्रों द्वारा मानव को ऊँचा उठने की प्रेरणा भी मिलती है वह इनके द्वारा अपने पूर्वजों की सभ्यता एवं संस्कृति को यथाशीघ्र हृदयंगम कर सकता है। समर की विभीषिकाओ से युक्त कथानक वाले चलचित्रों से समर के विरुद्ध और शान्ति के पक्ष में जनमत पैदा हुआ है। डॉक्यूमेंट्री चित्रों द्वारा देश की आर्थिक समस्याओं, विस्तृत निर्माण कार्यों एवं दुर्गम से दुर्गम स्थलों के दृश्य जनता के समक्ष उपस्थित किये जाते हैं, जिससे एक प्रान्त के दूसरे प्रान्त वालों से सम्पर्क बढ़ता है और देश की अखण्डता में सहयोग मिलता है। इसके अतिरिक्त व्यावसायिक दृष्टिकोण से भी इसका कम महत्त्व नहीं है। लाखों लोगों की बेकारी इससे दूर होती है। प्रचारकों एवं विज्ञापनदाताओं के लिये उनकी सफलता का यह सबसे बढ़िया साधन है।

उपसंहार : गुण व दोष का संगम होते हुये भी चलचित्र आज हमारे सामाजिक एवं सांस्कृतिक जीवन का एक अंग बन चुका है। यदि धन-अर्जन के मोह को त्याग कर चित्रों का निर्माण किया जाये। तो वह दिन दूर नहीं जब समूचा राष्ट्र इस व्यवसाय से उज्ज्वल होगा ।

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