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Hindi Essay, Paragraph, Speech on “Antriksh me Bharat ki Uplabhdiya”, “अंतरिक्ष में भारत की उपलब्धियां” Complete Hindi Essay for Class 10, Class 12 and Graduation Classes.

 अंतरिक्ष में भारत की उपलब्धियां

Antriksh me Bharat ki Uplabhdiya

                भारत दुनिया के पहले कुछ ऐसे देशों में से एक है जिसने देश के विकास में ’स्पेस टेक्नोलाॅजी’ के महत्व को अच्छी तरह से समझा है। अंतरिक्ष कार्यक्रम की शुरूआत के बाद इन तीन दशकों में भारत ने इस क्षेत्र में जबर्दस्त सफलता हासिल की है। इंडियन नेशनल सैटेलाइट (इनसैट) और इंडियन रिमोट सेसिंग (आई. आर. एस.) सैटेलाइट विकसित कर इस दिशा मंे महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल हुई है। देश ने अपने बल पर सैटेलाइट लाँच करने में भी सफलता हासिल की है। यहाँ तक कि इस क्षेत्र में भारत कई विकसित देशों से भी आग निकल गया है।

                भारत ने 1975-76 में ही दुनिया का सबसे बड़ा सैटेलाइट इंस्ट्रक्शनल टेलीविजन एक्सपेरिमेंट लाँच किया था, जब अमेरिकी सैटेलाइट ए.टी. एस-6 के जरिए देश के ढाई हजार से भी ज्यादा गाँवों में स्वास्थय, परिवार नियोजन और कृषि आदि विषयों पर शिक्षाप्रद कार्यक्रमों की शुरूआत की गई थी। फिर 1977-79 के दौरान सैटेलाइट टेलीकम्युनिकेशन एकसपेरिमेंटल प्रोजेक्ट चलाया गया। इन अनुभवों के आधार पर ही 1983 में इनसेट की स्थापना संभव हो सकी और आज यह दुनिया के सबसे बड़े घरेलू संचार सैटेलाइट सिस्टमों में से एक है। इनसेट ने दूरसंचार, टेलीविजन, ब्राॅडकास्टिंग, मौसम विज्ञान और खतरे की चेतावनी देने वाली सेवाओं के क्षेत्र में एक नई क्रान्ति ला दी। इसके जरिए सैंकड़ों अर्थ स्टेशनों को जोड़ने में मदद मिल सकी, वे भी जो देश के दूरदराज के क्षेत्रों और द्वीपांे में स्थित थे। भारत में आज टी.वी. की पहुँच 80 प्रतिशत आबादी तक है।

                इनसेट का उपयोग न केवल दूरसंचार, टेलीविजन और मौसम की जानकारियों के लिए किया जा रहा है बल्कि इसके जरिए जमीनी स्तर पर शिक्षाप्रद कार्यक्रमों के प्रसारण और इंटीरेक्टिव ट्रेनिंग में भी मदद मिल रही है। कई राज्य सरकारों और एजेंसियों ने आज इसका इस्तेमाल शिक्षा, उद्योगों में काम करने वाले कर्मचारियों के लिए इंस्टीटूयशनल ट्रेनिंग, सामाजिक कल्याण कार्यक्रमों के प्रशिक्षण के लिए किया है। मध्य प्रदेश में झाबुआ डेवलपमेंटल कम्युनिकेशन प्रोजेक्ट नवंबर 1996 में शुरू हुआ था, जिसके तहत इनसेट की तकनीक का इस्तेमाल कर आदिवासी लोगों के लिए स्वास्थय, सफाई, परिवार नियोजन और महिला अधिकारों आदि विषयों पर शिक्षाप्रद कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं। टेलीमेडिसन भी एक ऐसा क्षेत्र है जिसमें इनसेट के जरिए शहरों में बैठे डाॅक्टर दूरदराज के ग्रामीण इलाकों में बैठे लोगों को डाॅक्टरी सलाह दे सकते हैं। उदाहरणस्वरूप ’अंडमान एंड निकोबार टेलीमेडिसन प्रोजेक्ट’ की शुरूआत 3 जुलाई 2002 को हुई, जिसके तहत पोर्ट ब्लेयर स्थित जी.बी. पंत अस्पताल को चेन्नै के श्री रामचंद्र मेडिकल काॅलेज एंड रिसर्च इंस्टीट्यूट से जोड़ दिया गया। इसके अलावा चेन्नै-श्रीहरिकोटा, बंेगलूर-चामराजनगर-सरगूर, कोलकता-बेंगलूर-दक्षिणी त्रिपुरा नई, दिल्ली-लेह-गुवाहटी, कोची-कवाराती और लखनऊ-बेहरामपुर-बुर्ला के बीच भी यह प्रणाली शुरू की गई है।

                दूरसंचार के क्षेत्र में तो इनसेट का बहुधा प्रयोग हो ही रहा है, साथ ही मौसम विज्ञान के क्षेत्र में भी यह काफी मददगार साबित हुआ है। इसके जरिए चक्रवात की पूर्व सूचना मिल जाने से तटीय इलाकों में रहने वाले लोगों और मछुआरों को पहले से ही सतर्क कर दिया जाता है। इनसेट सैटेलाइट की संख्या बढ़ाए जाने की बढ़ती माँग को देखते हुए अब दूरसंचार और मौसम विज्ञान के लिए अलग-अलग सैटेलाइट छोड़ना जरूरी हो गया है। जल्द ही छोड़ा जाने वाला मेटसेट इस तरह का पहला सेटेलाइट होगा जो भारत के अपने पी. एस. एल. वी. के जरिए छोड़ा जाएगा। 70 के दशक के अंत में और 80 के दशक की शुरूआत में भास्कर-1 और भास्कर-2 सैटेलाइट छोड़े गए। रिमोट सेंसिग सैटलाइट के क्षेत्र में भारत का आज अग्रणी स्थान है। आई.आर.एस. सैटलाइट के जरिए देश की प्रमुख फसलों के उत्पादन, वनों के सर्वेक्षण, सूखें की भविष्यवाणी, बाढ़ के खतरों जैस कई महत्वपूर्ण क्षेत्रों में मदद ली जा रही है।

                भारतीय अंतरिक्ष वैज्ञानिक चाँद पर जाने की अपनी महत्वाकां़क्षी योजना को पूरा करने में जुटे हुए हैं हालांकि यह योजना नई नहीं हैं। इस दिशा में प्रारम्भिक तैयारी पूरी हो चुकी है। भारतीय अंतरिक्ष तैयारी पूरी हो चुकी है। भारतीय अंतरिक्ष शोध संस्थान ने सरकार को एक रिपोर्ट भेजी है, जिसमें दावा किया गया है कि वैज्ञानिकों ने तकनीकी क्षमता हासिल कर ली है।

                रक्षा विशेषज्ञांे का मानना है कि इस अभियान के तहत राॅकेट टेक्नोलाॅजी में जो विकास होगा, उसका इंटरकाॅन्टीनेंटल बैलिस्टिक मिसाइलों के प्रक्षेपण में प्रभावी इस्तेमाल किया जा सकता है। इसरों का यह भी कहना है कि पड़ोसी चीन भी अंतरिक्ष में मानव दल भेजने की तैयारी कर रहा है। ऐसे में भारत के इस अभियान की सफलता का महत्व और भी बढ़ गया है।

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