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Hindi Essay, Paragraph on “Tsunami”, “सुनामी” 700 words Complete Essay for Students of Class 9, 10 and 12 Examination.

सुनामी

Tsunami

‘सुनामी’ एक जापानी शब्द है, जो दो शब्दों सु + नामी से मिलकर बना है। जापानी भाषा में सु का अर्थ होता है ‘बंदरगाह’ एवं नामी का अर्थ होता है ‘लहर’ । कुछ लोग सुनामी लहरों का संबंध ज्वारीय लहरों से जोड़ते हैं, लेकिन वास्तव में सुनामी लहरें ज्वारीय लहरें नहीं होती हैं। सुनामी लहरें ज्वारीय लहरों से सर्वथा भिन्न होती हैं।

सुनामी तरंगों की एक ऐसी शृंखला है, जो पानी के अंदर हलचल मचने पर जल स्तंभ के विस्थापन से उठती है। इसकी चपेट में निचले तटवर्ती इलाके बुरी तरह आते हैं। ज्वारीय लहरों की भांति सुनामी लहरें कभी अकेली नहीं होतीं। बल्कि सुनामी लहरें उसे 10 मिनट के अंतराल में एक के बाद एक आकर तबाही मचाती हैं। यद्यपि खले एवं गहरे समुद्र में ‘सुनामी लहरें विनाशकारी नहीं होती। तथापि जैसे-जैसे ये छिछले सागरीय क्षेत्रों एवं तटीय क्षेत्रों में पहुंचती जाती हैं इनका रौद्र रूप बढ़ता जाता है। यहां प्रश्न यह भी उठता है कि सुनामी लहरें कैसे और किन कारणों से उठती हैं?

जब सागर के अंदर उठा-पटक की शक्ति जल स्तंभ उठा देती हैं।

जब समुद्र तल में उठा-पटक से ऊपर भी हलचल मचती है।

जब गुरुत्वीय प्रभाव से जल में ऊपर से हलचल बढ़ती है।

जब ऊपर वर्णित कारणों से सुनामी जैसी लहरें कोहराम पैदा करती है।

सुनामी लहरें इतनी भयंकर विनाशकारी होती हैं कि वैज्ञानिक इसे ‘त्रियो लॉजीकल टाइमबम’ कहकर पुकारते हैं। ये सुनामी लहरें वृत्ताकार तरंगों के रूप में एक के बाद एक जल के स्पर्श बिंदु से निकलकर चारों तरफ प्रसारित होती है। स्पर्श बिंदु से निकलते समय इन तरंगों की मोटाई काफी कम होती है। किंतु जैसे-जैसे लहरें किनारे पर पहुंचती जाती हैं, इनकी ऊंचाई एवं मोटाई बढ़ती जाती है अर्थात् जब समुद्र के किसी क्षेत्र में शक्तिशाली भूकंप आता है, जो जल के ऊपरी सतह पर केंद्रीय बिंदु से कुछ सेंटीमीटर लंबी जल की वृत्ताकार तरगें निकल कर आगे प्रसारित होने लगती हैं। उत्पत्ति के समय से तरंगें हानिकारक नहीं होती हैं लेकिन जैसे-जैसे ये लहरें छिछले जल वाले तटवर्ती क्षेत्रों की ओर बढ़ती हैं, विनाशकारी होती जाती हैं एवं सब कुछ अपने अंदर समेट लेती हैं। ये सुनामी लहरें जेट विमान से भी तेज गति से चलती हैं क्योंकि भूकंप के कारण जब धरती बुरी तरह कांपती है तो भूकंप के झटकों से लचीली तरगें उत्पन्न होकर ठोस धरती से होकर गतिशील हो जाती हैं। यह स्थिति जब समुद्र के भीतर या समुद्र के तटवर्ती क्षेत्रों में उत्पन्न होती है, तो भूकंप के केंद्र पर समुद्र की आंतरिक सतह तीव्र गति से ऊपर उठती है एवं पुनः अंदर जाती है, जिसके चलते समुद्री जल भी दबाव की क्रिया से ऊपर उठता है एवं पुनः नीचे जाता है। भूकंप से मुक्त हुई ऊर्जा समुद्री जल को सामान्य स्तर से ऊपर उठाकर स्थितिज ऊर्जा सुनामी लहरों के उत्पन्न होते ही गतिज ऊर्जा में परिवर्तित कर देती हैं। एवं इन तरंगों को धक्का देकर प्रसारित करने लगती है। कुछ समय के बाद ही गतिज ऊर्जा से ओत-प्रोत ये तरंगें शक्तिशाली सुनामी लहरों के रूप में बदल जाती हैं। ये शक्तिशाली लहरें अपने मार्ग में आने वाली प्रत्येक वस्तु को नष्ट करते हुए दैत्याकार रूप में आगे बढ़ने लगती हैं।

गहरे समुद्री जल में उत्पन्न सुनामी लहरों की वेव लेंथ 500 कि.मी. से अधिक होती है एवं लगभग एक घंटे तक बरकरार रहती हैं। सुनामी लहरें 550 मील प्रति घंटे की रफ्तार से आगे बढ़ेंगी। इस तरह स्पष्ट है कि इस गति से ये सुनामी लहरें जेट विमान की गति को भी पीछे छोड़ सकती हैं एवं 24 घंटे से भी कम समय में ही संपूर्ण समुद्र क्षेत्र को आर-पार कर सकती हैं।

सुनामी लहरें बीते वर्षों में कब-कब आईं और क्या-क्या कर गईं इसका संक्षिप्त विवरण इस प्रकार है-

  1. सुनामी लहरों से 1 नवंबर, 1755 में पुर्तगाल और समस्त यूरोप में 60,000 से ज्यादा लोग मारे गए।
  2. सुनामी लहरों से 27 अगस्त, 1883 में इंडोनेशिया के जावा और सुमात्रा द्वीपों में करीब 36,000 लोग मारे गए।
  3. सुनामी लहरों से 15 जून, 1856 में जापान के पूर्वी तटवर्ती क्षेत्र में लगभग 27,000 लोग मारे गए।
  4. सुनामी लहरों से 23 अगस्त, 1976 में दक्षिण-पश्चिम फिलिपींस में लगभग 80,000 लोग मारे गए।
  5. सुनामी लहरों में 26 जनवरी, 2004 में इंडोनेशिया, भारत, श्रीलंका, थाइलैंड, म्यांमार, सोमालिया, मालदीब, मलेशिया, बांग्लादेश, तंजानिया में लगभग 2,00,000 लोग मारे गए। भारत सरकार ने सुनामीको एक महाआपदा और बताते हुए बचाव के कई उपाय सुझाए हैं और महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं।

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