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Hindi Essay-Paragraph on “Sachin Tendulkar” “सचिन तेंदुलकर” 600 words Complete Essay for Students of Class 10-12 and Subjective Examination.

सचिन तेंदुलकर

Sachin Tendulkar 

भारतीय क्रिकेट की शान व विश्व के नंबर एक बल्लेबाज का रूतबा रखने वाले मास्टर बल्लेबाज सचिन तेंदुलकर ने बहुत ही कम समय व उम्र में क्रिकेट में ऐसे रिकार्ड बना डाले हैं, जिन्हें तोडना आसान नहीं। रन बनाने व नये कीर्तिमान बनाने की भख अभी मिटी नहीं है। क्रिकेट इतिहास के स्वर्णिम पन्नों पर वे अपना नाम दर्ज करा चके हैं। 1989 में अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट में सचि का कदम रखना, सभी भारतीयों के मस्तिष्क में आज भी है। बीते समय में हमेशा भारतीयों की उम्मीदों की पतवार सचिन का बल्ला ही बना है।

परंपरागत प्रतिद्वंद्वी पाकिस्तान के खिलाफ सन् 1989 में पहला मैच खेलने वाले सोलह वर्ष के सचिन ने महान लेग स्पिनर अब्दुल कादिर की गेंदों की जमकर धुनाई करते हुए एक ही ओवर में चार चौके लगाते हुए 27 रन बनाकर सनसनी फैला दी थी। सन् 2003 में आयोजित विश्वकप में पाकिस्तान के रावलपिंडी एक्सप्रेस के नाम से पहचाने जाने वाले गेंदबाज शोएब अख्तर के पहले ही ओवर में 18 रन बनाए थे। अपने ही रिकार्ड तोड़ने और नये रिकार्ड बनाने की कहानी तो वह कई सालों से लिखते आ रहे हैं।

कई बार भारत की जीत और हार के बीच खड़े होने वाले तेंदुलकर ने जिस कौशल से दबावों का सामना किया है, उसने उन्हें कुंदन बना दिया है। उन्होंने साबित कर दिखाया कि प्रतिकूल परिस्थितियों में भी प्रतिभा के प्रसून प्रस्फुटित होते हैं। सचिन का बनाया रिकार्ड ही उनकी प्रतिभा की बानगी देने के लिए काफी है। सचिन ने सन 2009 तक 165 टेस्ट मैचों में 55.57 की औसत से 13000 से अधिक रन बनाए हैं, जिनमें 45 शतक तथा 56 अर्धशतक हैं। उच्चतम स्कोर 248 है। एक दिवसीय क्रिकेट में अब तक 433 मैच खेले हैं। 44.33 की औसत से 17000 से अधिक रन बनाए हैं, जिनमें 100 अर्धशतक तथा 46 शतक शामिल है। उच्चतम स्कोर 186 हैं। रनों का पहाड़ बना चुके सचिन तेंदुलकर जब क्रिकेट को अलविदा कहेंगे तो न जाने वे तब तक कितने रिकार्ड और बना चुके होंगे। इसमें से कई ऐसे होंगे, जिन्हें तोड़ना कोई आसान काम नहीं होगा। अभी तो यह क्रम जारी है। आज विश्व के सबसे लोकप्रिय क्रिकेटर बन चुके तेंदुलकर बहुत अधिक पारिवारिक इंसान हैं। अपना खाली समय वे अपने परिवार के साथ बिताना पसंद करते हैं। उनके प्रशसंक उनकी लंबी आयु और अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट में नये आयामों की कामना करते हैं।

सचिन ने सन् 1989 में केवल सोलह वर्ष की आयु में पाकिस्तान दौरे के साथ अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट में कदम रखा था। क्रिकेट मैदान में कदम रखते ही उन्होंने अपने देश की अपनी योग्यता का भरोसा दिला दिया था।

क्रिकेट जगत् में सचिन तेंदुलकर एक जीती-जागती मिसाल बन गए हैं। किसी भी मैच में हार-जीत की उम्मीद सचिन के खेल पर ही निर्भर करती है। मैदान में गेंदबाजों की धुनाई करते देख एक अजीब-सा उत्साह हर किसी के मन में भर उठता है। उनके बारे में सचिन के प्रशिक्षक रमाकांत आचरेकर ने कहा कि मैदान में आक्रामक व गंभीर दिखने वाले सचिन बचपन में काफी शरारती थे। स्वर सम्राज्ञी लता मंगेश्कर ने सचिन के बारे में टिप्पणी करते हुए कहा कि मैं सचिन को धरती पर भेजा गया ईश्वर का चमत्कार मानती हूं।

सचिन ने कहा कि मुझे जब तेज खेलना होता है, तो मैं लता मंगेश्करजी का तेज गीत गुनगुनाने लगता हूं। धीमे खेलने के लिए कोई दर्द भरा नगमा याद कर लेता हूं। इस पर लता ने कहा कि मुझे रियाज के समय जब कोई लंबी तान छेड़नी होती है, तो मैं सचिन का छक्का याद कर लेती हूं।

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