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Hindi Essay-Paragraph on “Doordarshan ka Yug” “दूरदर्शन का युग” 500 words Complete Essay for Students of Class 10-12 and Subjective Examination.

दूरदर्शन का युग 

Doordarshan ka Yug

इस युग में विज्ञान के नये-नये आविष्कार रोज-ब-रोज हो रहे हैं। चारों तरफ मानव को दिए गए विज्ञान के उपहार भरे पड़े हैं। आज मनुष्य विज्ञा की शक्ति से आकाश में उड़ रहा है। देश-विदेशों की खबरें कुछ ही समय में देख-सुन रहा है। विज्ञान के चमत्कारों से कभी हर्षित और कभी भयभीत भी होता है। ऐसी ही एक चमत्कार टेलीविजन है।

‘टेलीविजन’ अंग्रेजी शब्द है, जिसका अर्थ ‘दूरदर्शन’ है। टेलीविजन का आविष्कार बीसवीं सदी के प्रारंभिक समय में हुआ था। भारत में टेलीविजन युग का प्रारंभ 1966 ई. से माना जाता है, जब ‘चंद समिति’ ने रेडियो के लिए नियम की स्थापना के साथ टेलीविजन कार्यक्रम को भी देश में लाने की संस्तुति की थी। सबसे पहले दिल्ली में टेलीविजन केंद्र स्थापित हुए। सन् 1972 ई. तक कोलकाता, मुंबई, पुणे, अमृतसर, श्रीनगर, चेन्नई, कानपुर में केंद्र की स्थापना हुई। अब पूरे देश में टेलीविजन केंद्र स्थापित हो चुके हैं तथा उपग्रह के माध्यम से इसका स्पष्ट प्रसारण देश के कोने-कोने तक हो चुका है।

टेलीविजन में जिस व्यक्ति या वस्तु का चित्र भेजना होता है, उससे प्रतीदिप्त प्रकाश की किरणों को पहले विद्युत तरंगों में बदला जाता है। टेलीविजन के कमरे में जो चित्र बनता है, उसे सहस्रों बिंदुओं में बांट दिया जाता है। फिर उसे एक-एक बिंद के प्रकाश और अंधकार को एक सिरे से क्रमशः विद्यत तरंगों में परिवर्तित किया जाता है। इन विद्युत तरंगों को ट्रांसमीटरों द्वारा रेडियो तरंगों में बदला जाता है। टेलीविजन के उपकरण इन तरंगों को ग्रहण करता है और टेलीविजन सेट में लगे पुर्जे इन तरंगों को बिजली के तरंगों में बदल देते हैं। विद्युत तरंगों से टेलीविजन सेट में लगे एक बड़ी ट्यूब के अंदर इलेक्ट्रॉन नामक विद्युत कणों की धारा उत्पन्न हो जाती है। इस ट्यूब के सामने के भाग में भीतरी दीवार पर एक ऐसा रसायन लगा होता है, जो इलेक्ट्रॉन के प्रहार से चमकने लगता है। उदाहरणस्वरूप सफेद कुर्ते वाले भाग पर अधिक चमक पैदा होगी, जबकि बालों पर इलेक्ट्रॉन का प्रहार नहीं हो पाएगा और बाल काला ही रह जाएगा। टेलीविजन के लिए विशेष स्टुडियो बनाए जाते हैं। जहां वक्ता, गायक, नर्तक आदि के चित्र टेलीविजन के कैमरामैन विभिन्न कोणों से प्रतिक्षण उतारते रहते हैं।

टेलीविजन मनोरंजन का आधुनिक साधन है। रेडियो केवल सुनने का साधन है, जबकि टेलीविजन में दृश्य और श्रवण दोनों होता है। टेलीविजन में हम कार्यक्रम में ले रहे व्यक्तियों को जीवित रूप में देखते हैं। मानो रंगमंच पर वे हमारे सामने ही सब कुछ कर रहे हैं। टेलीविजन के माध्यम से अनेक उपयोगी जानकारी प्राप्त हो रही है। शिक्षा के क्षेत्र में टेलीविजन का अधिकाधिक प्रयोग हो रहा है। धार्मिक, राजनीतिक, समसामयिक घटनाएं, सांस्कृतिक कार्यक्रम टेलीविजन के माध्यम से प्रसारित हो रहे हैं।

हमारे देश के कई विश्वविद्यालय दूर शिक्षा के कार्यक्रम इसी माध्यम से चला रहे हैं।

टेलीविजन का सबसे आश्चर्यजनक चमत्कार दूर स्थिति ग्रहों को साफ तस्वीर खींचकर चित्रित करना। इसकी सहायता से चंद्रमा, मंगल, बृहस्पति, शक्र आदि का प्रेक्षण किया गया है। सदर स्थित नये ग्रहों की खोज भी की गई है। अब रंगीन टेलीविजन का प्रचलन जोरों पर है। जो इसकी लोकप्रियता को लगातार बढ़ा रहा है। सरकार की योजनाओं के अनुसार 34 प्रतिशत शिक्षा, 16 प्रतिशत मनोरंजन, 22 प्रतिशत कृषि, 9 प्रतिशत समाचार, 8 प्रतिशत शिक्षण-व्यवस्था को समय दिया जाएगा।

टेलीविजन से गांव-गांव में संस्कृति परिवर्तन हो रहे हैं। व्यक्ति जागरूक और समझदार हो रहा है। जिससे कुछ जनसमस्याएं के निदान में सहायता मिलेगी। आशा है कि टेलीविजन भारत के पिछड़े तबकों के लिए काफी लाभकारी होगा।

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