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Hindi Essay-Paragraph on “Bharat mein Prajatantra Panali” “भारत में प्रजातंत्र प्रणाली” 600 words Complete Essay for Students of Class 10-12 and Subjective Examination.

भारत में प्रजातंत्र प्रणाली

Bharat mein Prajatantra Panali

प्रजातंत्र का मतलब है प्रजा का शासन अर्थात् जहां किसी एक व्यक्ति के हाथ में राज्य सत्ता न रहकर प्रजा के बहुमत पर ही निर्भर करती है। प्रजातंत्र को लोकतंत्र भी कहते हैं। प्रजातंत्र की परिभाषा दी जाती है- “प्रजातंत्र जनता का, जनता के लिए, जनता द्वारा किया गया शासन है।” महात्मा गांधी ने कहा था, “प्रजातंत्र का अर्थ मैं यह समझता हूं कि इसमें नीचे से नीचे और ऊंचे से ऊंचे आदमी को आगे बढ़ने का समान अवसर मिले।”

यह परिभाषा अब तक की सभी परिभाषाओं में से सरल-सबोध और सटीक है। इस शासन में जनता ही शासक होती है, लेकिन प्रकारांतर से होती है। जनता अपना प्रतिनिधि निर्वाचित करती है। सभी प्रतिनिधि संसद के सदस्य होते हैं और संसद के द्वारा देश की सरकार चलाई जाती है। इस तरह इसे प्रजातंत्र की संसदीय प्रणाली कहा जाता है। चूंकि शासन की प्रजातंत्र प्रणाली जनता द्वारा ही अपने हितार्थ निश्चित की जाती है, उसका बहुमुखी विकास मनुष्य मात्र का उत्थान और सुख ही इसका सर्वोपरि उद्देश्य होता है। इसी के लिए सरकार द्वारा हमने अनेक योजनाएं बनाई जाती हैं। बड़ी-बड़ी बहसों के उपरांत कानून बनाए जाते हैं। इसकी परम विशेषता है कि कानून सभी पदों से ऊपर होता है, चाहे वह राष्ट्रपति या प्रधानमंत्री का पद ही क्यों न हो। कानून की दृष्टि में सभी बराबर होते है। प्रजातंत्र जनता के हाथ में जन-प्रतिनिधियों के माध्यम से सत्ता की बागडोर है।

प्रजातंत्र प्रणाली का गुण है कि इस शासन में मानव को प्रकृति-प्रदत्त सभी – प्रकार की सुविधाएं मिलती हैं। वह व्यक्ति विशेष के द्वारा पशु की भांति नहीं हांका जाता। जनता के सुख-दुख की अभिव्यक्ति का पूर्ण अधिकार होता है। उसे सरकार ने मौलिक अधिकार दे दिया है। जनता अपनी किसी भी समस्या के लिए धरना, प्रदर्शन, अनशन, जुलूस आदि कार्यक्रम कर सकता है। जनता इच्छानुसार धर्म स्वीकार कर सकती है।

कुछ महत्त्वपूर्ण गुणों के कारण प्रजातंत्र जीवन का वरदान है। राजगोपालचारी का अभिमत है कि “प्रत्येक व्यक्ति की अच्छाई ही प्रजातंत्रीय शासन की सफलता का मूल सिद्धांत है।”

शासन-व्यवस्था जनता द्वारा ही निर्वाचित व्यक्तियों के हाथ में होने से परस्पर सद्भाव और स्नेह की भावना का उदय होता है। जनता जनार्दन के हित की प्रमुखता होने से ईमानदारी का उचित पालन होता है। इस प्रकार किसी भी परिस्थिति में जनता की आवाज को दबाया नहीं जा सकता। पदों या अधिकारों के दुरुपयोग होने पर अनेक राजनीतिक दल आलोचना को तत्पर रहते हैं। जनता का प्रतिनिधित्व प्रजातंत्र प्रणाली में ही मिल पाता है। प्रजातंत्र में समाचार-पत्रों के बाहुल्य के कारण भी मौजूदा सरकार अन्याय करने का साहस नहीं कर पाती है।

प्रजातंत्र में अनेकों गण के साथ कई दोष भी है। जनता के बहुमत की प्रधानता के कारण सांसदों में अशिक्षित, असभ्य, उदंड व्यक्ति भी निर्वाचित हो जाते हैं। फलतः अशिक्षित होने के कारण विकास तथा जन-अपेक्षाओं पर खरे नहीं उतर पाते हैं। आजकल अपराधी जनशक्ति का दुरुपयोग कर राजनीति में प्रवेश कर रहे हैं।

अनेक राजनीतिक दलों के कारण सत्ता संघर्ष बढ़ता जा रहा है। दल किसी भी प्रकार से सत्ता में बने रहना चाहता है, जिससे पारस्परिक द्वेष बढ़ता है। ये दल जनता में पारस्परिक द्वेष फैलाकर अपने स्वार्थों की पूर्ति करते हैं। चुनाव के समय असीमित राशि का अपव्यय होता है। इन दुर्गुणों के कारण प्रजातंत्र मूल उद्देश्यों से भटक गया है।

प्रजातंत्र-प्रणाली जहां गुणों से पूर्ण है वहीं इसमें दुर्गुणों की भी कमी नहीं है। फिर भी राजतंत्र की ओर देखने के बाद यही निष्कर्ष आता है कि दोष मुक्त प्रणाली होने के बावजूद प्रजातंत्र जनता के लिए सर्वश्रेष्ठ प्रणाली है। लेकिन डॉ. राहुल ने अपनी पुस्तक ‘प्रजातंत्र’ में लिखा है-

अब न यहां कोई प्रजा है

न तंत्र है

यह जनता के लिए एक कोरा

षड्यंत्र है।

वाकई आज प्रजातंत्रीय प्रणाली एक मजाक बनकर रह गई है इसमें सुधार अतिआवश्यक है।

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