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Hindi Essay-Paragraph on “Aids – Ek Bhayavah Bimari” “एड्स: एक भयावह बीमारी” 500 words Complete Essay for Students of Class 10-12 and Competitive Examination.

एड्स: एक भयावह बीमारी

Aids – Ek Bhayavah Bimari

यह देखा जा रहा है कि चिकित्सा के क्षेत्र में एक ओर पूर्व परिचित बीमारियों से बचाव के उपाय किए जा रहे हैं, तो दूसरी ओर नयी-नयी बीमारियां उत्पन्न हो रही है। इनमें काली खांसी, राजयक्ष्मा आदि का उल्लेख किया जा सकता है। कभी ये बीमारियां समाज और राष्ट्र को आतंकित करती थीं। आज इससे ग्रस्त हो जाने के बाद भी लोग बीमार नहीं होते हैं, क्योंकि मन में इनके बचाव के लिए निकली दवाओं से लोग निश्चितता का अनुभव करते हैं। दुनिया के चिकित्सक भी इन रोगों से बचा लेने की गारंटी कर सकते हैं। कुछ रोग ऐसे भी होते हैं जिनसे मनुष्य की जान तो नहीं जाती लेकिन वह असाध्य जरूर है। उससे आदमी बेकार हो जाता है। वैसी बीमारियों में पोलियों भी एक है, एड्स से पहले कैंसर एक रोग है। जिसे अभी मौत का पर्याप्त माना जा सकता है। कैंसर से बचाव के लिए औषधियों का आविष्कार हो चुका है और होता जा रहा है। फिर भी कैंसर से ग्रस्त रोगियों के विषय में हमारी सोच है कि रोगी की आयु भले ही कुछ वर्षों के लिए बढ़ जाए, उसकी मौत तो निश्चित है।

अभी भारत ही नहीं विश्व की चिकित्सीय दुनिया में ‘एड्स’ सबसे खतरनाक और असाध्य रोग है। यह भारत में भी फैल चुका है। यह बीमारी भारत में विकसित देशों से आयातित है। इस बीमारी के प्रति सामान्य अवधारणा है कि यह असंयमित यौन-संबंधों से बढ़ती है। इस रोग का इलाज अब तक खोजा नहीं जा सका है।

एड्स को एक संक्रामक बीमारी माना जा रहा है। इसका पूरा नाम एक्वायार्ड इम्यून डिफ्रीशिएंसी सिंड्रोम’ है। जब एड्स की चर्चा होती है, तो एच.आई.वी. की भी चर्चा होती है। क्योंकि एड्स फैलाने में एच.आई.वी. की प्रमुख भूमिका है। एड्स एक विषाणु जनित रोग है। एड्स के विषाणु जब एक स्वस्थ शरीर में प्रवेश कर जाता है, तब वह व्यक्ति एच.आई.वी. संक्रमित कहलाता है। इस विषाणु के मनुष्य शरीर में प्रवेश करने के दस-पंद्रह वर्षों बाद लक्षण दिखाई पड़ते हैं। यह रोग शरीर में रोग प्रतिरोधक क्षमता को घटाता है।

  1. रोग प्रभावित इंजेक्शन या रक्त से,
  2. यौन संबंध से,
  3. रोगी व्यक्ति के रक्त चढ़ाने से,
  4. गर्भवती मां से।

जिसे कोई रोग नहीं है उसे अगर विषाणु संक्रमित करता है, तो वह कुछ दिनों तक जीवित रहता है। परंतु रोग ग्रस्त व्यक्ति शीघ्र ही मर जाता है।

एड्स का इलाज संभव नहीं है। अतः इसका बचाव इसके संक्रमण से दूर रहने से ही हो सकता है।

भारत में अशिक्षितों और अज्ञानता के कारण इसके फैलने की आशंका प्रबल होती जा रही है। अतः सरकार ने नाको द्वारा प्रायोजित कार्यक्रम को प्रसारित कर तथा विज्ञापनों द्वारा इस रोग से लोगों को अवगत कराती है। इसके बचने के उपाय बताती है। एड्स रोगी की देखभाल संबंधी बातों की जानकारी देती है। इस रोग से संबंधित भ्रांतियां, जो फैली हुई है उसे दूर करती है।

अतः एड्स रोगी के साथ मानवता पूर्ण व्यवहार करना चाहिए। एड्स के बचाव के लिए आम जनता का सहयोग भी अपेक्षित है। जागरूकता ही इस रोग की रोकथाम है। अतः हमें इसके प्रायोजित कार्यक्रम में सहयोग देना चाहिए। तभी हमारा समाज और भविष्य सुरक्षित रह पाएगा।

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