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Hindi Essay on “Shri Rajiv Gandhi” , ”श्री राजीव गांधी” Complete Hindi Essay for Class 10, Class 12 and Graduation and other classes.

श्री राजीव गांधी

Shri Rajiv Gandhi 

        अल्प समय में भारतीय राजनीति में ’मिस्टर क्लीन’ के नाम से चर्चित स्व0 राजीव गांधी का जन्म 20 अगस्त 1944 ई0 को मुम्बई में हुआ था। इनकी माता का नाम इन्दिरा गांधी तथा पिता का नाम फिरोज गांधी था। इनकी प्रारम्भिक शिक्षा दिल्ली मंे हुई। आगे की शिक्षा के लिए राजीव गांधी देहरादून के वेलहोम स्कूल में दाखिल हुए। वहां से आई0एस-सी0 की परीक्षा पासकर इंग्लैण्ड के केम्ब्रिज विश्वविद्यालय में उच्च शिक्षा के लिए गये। केम्ब्रिज प्रवास के दौरान ही राजीव गांधी की मुलाकात इटली निवासी कुमारी सोनिया माइनो से हुई और सन् 1968 ई0 में दोनांे विवाह सूत्र में बंध गये।

        स्वदेश आकर राजीव गांधी ने वायुयान चालक का प्रशिक्षण प्राप्त किया। प्रशिक्षण पूरा होने पर इन्हें भारतीय वायुसेना में नौकरी मिल गयी। राजीव गांधी राजनीति में नहीं आना चाहते थे। लेकिन विधि के विधान के सामने बड़े-बड़े को घुटना टेकना पड़ता है। कहा भी गया है-’’तुलसी जस भवतव्यता को सहारा देने के लिए सक्रिय राजनीति मं आना पड़ा। अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के महासचिव बनकर एवं अमेठी से लोकसभा का चुनाव जीतकर इन्होंने अपनी राजनीतिक यात्रा शुरू की।

        31 अक्टूबर 1984 ई0 को अचानक इन्दिरा गांधी की हत्या के बाद राजीव गांधी भारत के कार्यवाहक प्रधानमन्त्री बने। इन्दिरा गांधी की हत्या से भड़के हिंसात्मक आन्दोलन को समाप्त कराने में इन्होंने काफी धैर्य, सहनशीलता एवं सूझ-बूझ का परिचय दिया। इनके प्रतिद्वन्द्वी (जो यह कहा करते थे कि एक विमान चालक देश को कैसे चला पायेगा) की बोलती बन्द हो गयी।

        राजीव गांधी भारत के युवा-हृदय सम्राट् कहलाने लगे। फलतः सन् 1985 ई0 में आम चुनाव में इन्हें अजेय बहुमत प्राप्त हुआ। लोकसभा की 540 सीटों में से 410 सीटें जीतकर इन्होनें लोकसभा एवं कांग्रेस पार्टी में एक रिकार्ड बनाया, जो आज तक अजेय हैं।

        सन् 1985 ई0 में पुनः प्रधानमन्त्री बनकर इन्होनं अनेक उत्कृष्ट कार्य किये। उलझी हुई पंजाब समस्या का समाधान किया। दल-बदल विरोधी कानून पारित करवाकर राजीव गांधी ने राजनीति में स्वच्छता लाने का सराहनीय प्रयत्न किया। उनके समय में विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी में भी भारत ने सराहनी प्रगति की। फलतः भारत इक्कीसवीं सदी की ओर बढ़ चला। अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर भी इनके द्वारा कुछ उल्लेखनीय कार्य हुए और इसके लिए इन्होंने सभी पड़ोसी देशों से अपने बेहतर सम्बन्ध बना लिये। श्रीलंका में शान्ति स्थापना हेतु इनके द्वारा सार्थक पहल की गयी। परन्तु दुर्भाग्यवश राजीव-जयवर्द्धने-समझौता लागू नहीं हो सका।

        राजीव गांधी की लोकप्रियता से चिढ़कर कुछ झूठे आरोप लगाये गये। इसके परिणामस्वरूप 1989 ई0 के आम चुनाव में इन्हें मुंह की खानी प़ड़ी। सच्चाई जनता के सामने आ जाने पर पुनः 1991 में इन्हें सफलता मिलना सम्भवतः तय था। परन्तु चुनाव प्रचार के दौरान 21 मई 1991 ई0 करे श्रीपेरम्बटर की एक सभा में राजीवजी आंतकवादियों के षड्यन्त्र का शिकार हो गये। इनकी मृत्यु पर समस्त मानव-समुदाय रो पड़ा। हम भारतीय इनकी कुर्बानी को सदा याद रखेंगे।

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