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Hindi Essay on “Rashtra Nirman me Vidhyarthiyo ka Yogdan”, “राष्ट्र निर्माण में विद्यार्थीयों का योगदान ” Complete Hindi Essay, Paragraph, Speech for Class 7, 8, 9, 10, 12 Students.

राष्ट्र निर्माण में विद्यार्थीयों का योगदान

Rashtra Nirman me Vidhyarthiyo ka Yogdan

निबंध संख्या :- 01 

किसी भी राष्ट्र की उन्नति का आधार और प्रतिष्ठा उसकी भावी पीढ़ी पर होता है । जो बासी हो गया, जीर्ण हो गया, समयातीत हो गया, उस फूल को डाल से चिपके रहने का कोई अधिकार नहीं है। यही सोचकर शायद कविवर जयशंकर प्रसाद जी ने ठीक ही कहा है-

प्रकृति के यौवन का श्रृंगार

करेंगे कभी बासी फूल।

इसलिए बासी फूलों को झड़ने दो, नये युवा फूलों को उनका स्थान ग्रहण करने दो। हम राजनीति के इतिहास पर एक विहंगम दृष्टि डालकर देखें तो हमें पता चलता है कि राष्ट्रों की भाग्यलिपियां विद्यार्थियों ने अपने रक्त की स्याही से लिखी हैं। जिस प्रकार नदी अपने तेज़ प्रवाह से अपने किनारों को तोड़ने की क्षमता रखती है तथा हवा तेज गति से चलकर आँधी का रूप धारण कर लेती है और बडे बडे बलशाली वृक्षों को जड़ से उखाड़ फेंकने की शक्ति रखती है इसी प्रकार विद्यार्थी के अन्दर भी वह प्रचण्ड शक्ति और अदमनीय साहस है जिससे यदि वह चाहे तो देश का स्वरूप बदल दे। किसी ने ठीक ही कहा है-

लोग कहते हैं बदलता है ज़माना अक्सर

मर्द वे हैं जो ज़माने को बदल देते हैं।

आज स्वतन्त्रता के लगभग 60 वर्ष पूर्ण हो जाने पर भी हमारे देश ने उतनी प्रगति नहीं कि जितनी कि उसे करना अपेक्षित था। इसका मुख्य कारण यह है देश की प्रगति में हाथ बंटाने का अधिकार कुछ वर्ग विशेष, कुछ अवस्था विशेष, कुछ जाति विशेष, कुछ आश्रम विशेष के व्यक्तियों को ही उपलब्ध हो रहा है। जो लोग स्वयं चलने में असमर्थ हैं वे देश को क्या चलाएंगे! इसलिए केवल युवा विद्यार्थीवर्ग ही राष्ट्र के निर्माण में अपनी निर्णायक भूमिका अदा कर सकता है। विद्यार्थीवर्ग का योगादन इस प्रकार है-

(i) शिक्षा के क्षेत्र में -यदि देश की प्रगति में विद्यार्थियों के योगदान पर गंभीरतापूर्वक विचार किया जाए तो पता चलता है कि उनका सबसे महत्त्वपूर्ण योगदान एक निष्ठ भाव से और एकाग्र मन से तथा अनुशासन बद्ध होकर विद्याध्ययन करना ही ठहरता है। यदि इस अवस्था में एक निष्ठता का अभाव रहा तो भावी जीवन के उद्देश्यों की पूर्ति बिल्कुल ही असम्भव प्रतीत होती है। भावी जीवन की आधारशिला यदि दुर्बल हुई तो उस पर जो भवन निर्माण होगा वह चिरस्थायी कभी नहीं होगा। वह केवल लड़खड़ाते हुए ही जीवन व्यतीत करेगा। आपकी प्रगति ही देश की प्रगति है। वे शिक्षण बनाने का कार्य भी अपने हाथ में ले सकते हैं तथा देश से अनपढ़ता जैसी लाहनत को दूर करने में अपना सहयोग दे सकते हैं।

ii) सामाजिक क्षेत्र में विद्यार्थी अपने इलाके में विभिन्न सभाओं का आयोजन करके समाज में फैली कुरीतियों, अन्धविश्वासों, जाति-पाति के नाम पर किया जा रहा भेद-भाव जो हमारे देश की नींव को खोखला बना रहा है और देश की प्रगति उत्पन्न कर रहा है, देश के चारित्रिक निर्माण में सहयोग दे सकते हैं। स्वयं मेवी संस्थाओं का निर्माण करके अकाल पीड़ितों, बाढ़ पीडितों, सैनिकों की शिवाओं के लिए लोगों द्वारा धन एकत्रित करके सहायता कर सकते हैं और राष्ट्र के निर्माण में अपना योगदान दे सकते हैं।

iii) राष्ट्र की सुरक्षा सेवाओं में भाग लेकरसेना राष्ट्र की सुरक्षा का एक महत्त्वपर्ण अंग है। विद्यार्थी अनुशासित तथा देश भक्त सैनिक बनकर राष्ट्र के निर्माण में अति महत्त्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। आज देश की सीमाएँ विदेशी षडयन्त्रों और आतंकवाद से त्रस्त हैं। देश की अस्मिता दांव पर लगी हुई है, देश की अखण्डता को निरन्तर चुनौतियां मिल रही है। ऐसे समय में विद्यार्थीवर्ग का उत्तरदायित्व बहुत अधिक बढ़ जाता है।

(iv) जागरुक नागरिक बनकरवास्तव में यदि विद्यार्थी देश की उन्नति में कोई महत्त्वपूर्ण योगदान दे सकते हैं तो वह है कि वे किसी भी कठिन से कठिन परिस्थिति में देश की सम्पत्ति को क्षति न पहँचाएं क्योंकि आए दिन अखबारों में पढ़ा जा रहा है, कानों से सुना जा रहा है, आँखों से देखा जा रहा है कि किसी स्थान पर छात्रों ने बसों को आग लगा दी. किसी स्थान पर विश्वविद्यालय का कार्यालय ही जला दिया, किसी स्थान पर पुलिस की गाड़ी पर मिट्टी का तेल छिड़क कर उसे जला दिया गया, इत्यादि-इत्यादि। यदि आज का भारतीय छात्र देश की सम्पत्ति को अपनी समझे और उसकी हानि को अपनी हानि तो निश्चय ही वह राष्ट्र के निर्माण में एक बहुत महत्त्वपूर्ण योगदान दे सकता है।

(v) राजनीति के क्षेत्र मेंइतिहास और राजनीति के छात्र देश की प्राचीन सभ्यता और संस्कृति को तथा लोकतंत्र का महत्त्व, मतदान की पुण्यता, नागरिक के अधिकार और कर्त्तव्य आदि विषयों को जनता को समझा कर देश कल्याण का कार्य कर सकते हैं। इन्जीनियरिंग तथा मैडीकल कालेज के छात्र अपने अवकाश के दिनों में गाँवों में जाकर ग्रामीणों की सेवा कर सकत हैं।

तात्पर्य यह है कि छात्रावस्था वह अवस्था होती है जिसमें मनुष्य अटूट शक्ति सम्पन्न होता है। उसमें कार्य करने की अभूतपूर्व क्षमता होती है। उस शक्ति और कार्यक्षमता को यदि सही दिशा मिलती रहे तो उसके मन और मस्तिष्क के घोर्ट सही दिशा में रहेंगे और अवश्य ही लाभदायी सिद्ध होंगे। अन्त में हम यही कहेंगे भारतीय छात्र अपनी पूर्ण शक्ति से देश को आगे बढ़ाएँ, इसी में उनका और देश का हित है।

 

राष्ट्र निर्माण में छात्रों का योगदान

Rashtra Nirman mein Chatro ka Yogdaan

निबंध संख्या :- 02

विद्यार्थी ही राष्ट्र की आधारशिला हैं। उनमें जिज्ञासा और उत्साह की भावना भरी रहती है। देश के प्रति जागरूक रहना उसका पुनीत कर्तव्य हैं। वे ही देश के भावी नागरिक हैं। राष्ट्र निर्माण के लिए जिस त्याग की आवश्यकता होती है, उसे विद्यार्थी पूरी करते आए हैं। भारत का इतिहास गवाह है कि राष्ट्रीय आंदोलन में विद्यार्थी का योगदान सर्वोपरि रहा है। आज हमें राष्ट्र का नवनिर्माण करना है। राष्ट्र के स्वरूप एवं सामाजिक, ढांचे में परिवर्तन लाना है, तब हमें ऐसे नवयुवकों की आवश्यकता है, जो निःस्वार्थ भाव से देश की सेवा कर सकें। जो देश के का नव-निर्माण करने में अपना सहयोग दे सकें। जब तक राष्ट्र बाहरी आक्रमण से सुरक्षित नहीं होगा तब तक नव-निर्माण की आशा नहीं की जा सकती। अतः सर्वप्रथम राष्ट्र की सुरक्षा का प्रश्न हमारे सामने आता है। कभी-कभी विदेशी शक्तियाँ इस प्रकार की स्थिति पैदा कर देती हैं, जिससे राष्ट्र की सर्वभौतिकता पर खतरा उपस्थित हो जाता है। तब राष्ट्र अपनी सुरक्षा की याचना करते हैं। वह नवयुवकों का त्याग और बलिदान मांगता है। इस पुकार को अनसुनी करना ठीक नहीं है। इसकी अवहेलना करना मरण के समान है। अतः विद्यार्थियों का यह परम कर्तव्य एवं धर्म है कि वे तन-मन-धन से राष्ट्र की रक्षा करें।

इस प्रकार की स्थिति में विद्यार्थियों को चाहिए कि वे जन-जागरण पैदा कर राष्ट्र को एकता सूत्र में बांधने का प्रयास करें। वे लोगों के मन में फैली शंकाओं का निवारण करें, लोगों में आत्मबल का संचार करें, देश में धार्मिकता, प्रांतीयता या जातीयता के नाम पर पनपने वाले झगड़ों को समूल नष्ट कर देने का प्रयास करें।

देश के नौजवान और विद्यार्थी अनेक बार अपने उत्तरदायित्व का परिचय दे चुके हैं। संकटकाल में धन की आवश्यकता होती है। नागरिक ठीक समय पर और ईमानदारी के साथ अपना टैक्स जमा करें, इसके लिए विद्यार्थियों को आगे कदम बढ़ाना चाहिए।

एक आदर्श विद्यार्थी ही राष्ट्र की डुबती नौका का कर्णधार होता है। उसके हृदय में मंडराती आग समाज की भावना शत्रुओं को नष्ट कर देती हैं। विद्यार्थी किसी भी परिस्थिति में जन-जन में जागरण पैदा करके देश की ध्वनि को विस्तारित करते हैं। विद्यार्थी नागरिकों के साथ मिलकर श्रमदान के माध्यम से नयी-नयी सड़कों, नहरों तथा बांधों के निर्माण में मदद करते हैं। नयी उम्र होने के कारण विद्यार्थियों में जोश होता हैं। वे दीवानापन के कारण किसी भी परिस्थिति में पूरे उत्साह के साथ भिड़ जाते हैं। राष्ट्र को छात्र-शक्ति पर हमेशा गर्व हुआ है। जापानी आक्रमण के समय चीन की बनी दीवार इस बात को प्रभावित करती है। यदि हम अपने ही देश को ले, तो देश के स्वतंत्रता संग्राम को सफल बनाने का पूरा श्रेय विद्यार्थियों को है। विद्यार्थियों के श्रमदान द्वारा अनेक महत्वपूर्ण कार्य संपन्न हुए हैं। एक उदाहरण सन् 1978 ई. में बंग्लादेश से भारत आए, शरणार्थियों के लिए भारतीय रेडक्रॉस द्वारा किया गया कार्य सराहनीय था।

इस प्रकार रेडक्रॉस एक पुनीत कार्य में लगा हुआ है। हमें तन-मन-धन से इस संस्था की मदद करनी चाहिए। रेडक्रॉस का झंडा हवा में लहराता हुआ संदेश देता है, ‘पीड़ित’ मानवता की सेवा ही धर्म है। रेडक्रॉस निश्चित रूप से एक अंतर्राष्ट्रीय सामाजिक संस्था है। इससे जनता को व्यापक स्तर पर लाभ मिल पाता है। इस संस्था का चरम उद्देश्य पीड़ित मानवता की सेवा है।

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