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Hindi Essay on “Mera Priya Khel Cricket” , ”मेरा प्रिय खेल : क्रिकेट” Complete Hindi Essay for Class 10, Class 12 and Graduation and other classes.

मेरा प्रिय खेल : क्रिकेट

Mera Priya Khel Cricket

निबंध नंबर :- 01

वर्तमान समय में क्रिकेट सबसे ज्यादा लोकप्रिय खेल है। इसके चाहनेवालों की संख्या असीमित है। जब क्रिकेट की शुरुआत हुई थी तब लोगों में बहुत ज्यादा दिलचस्पी नहीं थी। तब यह खेल शाही खेल माना जाता था। काफी समय तक क्रिकेट राजा-महाराजाओं और धनी लोगों का खेल बना रहा। पोलो की तरह क्रिकेट केवल बड़े लोग ही खेला करते थे।

क्रिकेट को जन्म देने वाला देश ग्रेट ब्रिटेन है। इंज्लैंडवासी जब भारत में आए तब अपने साथ क्रिकेट का खेल भी लेकर आए थे। क्रिकेट के खेल का आरंभ लगभग छह सौ वर्ष पूर्व हुआ था। सबसे पहला क्रिकेट मैच 18 जून 1744 को केंट और लंदन के बीच खेला गया।

कलकता क्रिकेट क्लब भारत की पहली क्रिकेट संस्था है। संसार की सबसे पुरानी संस्था का नाम एम.सी.सी. है। कलकता के बाद बंबई में क्रिकेट की शुरुआत सन 1797 में हुई। मद्रास में यह खेल सन 1846 में शुरु हुआ था।

सन 1878 में एक प्रोफेसर ने प्रथम भारतीय क्रिकेट क्लब की स्थापना प्रेसीडेंसी कॉलेज क्रिकेट क्लब के नाम से की थी।

यह खेल सर्वत्र लोकप्रिय है। च्यारह खिलाडिय़ों के बीच क्रिकेट खेला जाता है। दोनों टीमों का एक-एक कप्तान होता है। शेष खिलाड़ी कप्तान के नेतृत्व में खेल खेलते हैं। इस खेल की क्रीड़ा-पट्टिका 22 गज वाली होती है। खेला का निर्णय करने के लिए दो निर्णयक होते हैं। उनका निर्णय अंतिम एंव सर्वमान्य होता है। एक अंपायर जहां से गेंदबाजी होती है, वहां होता है, यानी विकेट के दूसरे छोर पर। दूसरा अंपायर वहां खड़ा होता है, जहां बल्लेबाजी होती है। स्क्वायर लेग के पास। इस अंपायर को स्क्वायर लेग अंपायर भी कहते हैं। प्रत्येक ओवर के बाद अंपायर एक-दूसरे का स्थान ग्रहण करते हैं।

रन-संख्या की देखभाल करने के लिए दोनों दलों के एक-एक स्कोरर होते हैं। गेंद का वजन साढ़े पांच औंस होता है। बल्ला चौड़ाई में 4.25 इंच के लगभग होता है और लंबाई में 38 इंच। दोनों छोरों पर तीन-तीन स्टंप होते हैं। प्रत्येक स्टंप चौड़ाई में 9 इंच का होता है।

यह इंज्लैंड का राष्ट्रीय खेल है। अब तो इसे भारत, पाकिस्तान, वेस्टइंडीज, इंज्लैंड, ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड, श्रीलंका, दक्षिण अफ्रीका, जिंबाब्वे आदि देशों ने भी अपना लिया है। यह खेल अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बहुत लोकप्रिय है।

टेस्ट मैच और एकदिवसीय अंतरराष्ट्रीय मैच होते ही हैं, विभिन्न ट्रॉफियों के लिए भी इस खेल का आयोजन वर्ष भर होता रहता है। अपने देश में रणजी ट्रॉफी, दिलीप ट्रॉफी, शीश महल ट्रॉफी, रानी झांसी ट्रॉफी, बिजी ट्रॉफी, ईरानी ट्रॉफी और अब्दुल्लाह गोल्ड कप के नाम पर क्रिकेट की प्रतियोगितांए होती रहती हैं। विदेशों में रोहिंटन बरिया ट्रॉफी और एशेज प्रतियोगितांए होती हैं।

निबंध नंबर :- 02

मेरा प्रिय खेल -क्रिकेट

Mera Priya Khel Cricket

 

जिस प्रकार शिक्षा मानव के मस्तिष्क को स्वस्थ बनाने के लिए आवश्यक है उसी प्रकार खेल मानव शरीर को स्वस्थ बनाने के लिए अत्यन्त आवश्यक हैं। मानव जीवन में खेलों का विशेष महत्त्व है। विश्व में अनेक खेल खेले जाते हैं। उन्हीं में से एक क्रिकेट का खेल है। क्रिकेट का खेल अन्तर्राष्ट्रीय महत्त्व का खेल है। आज संसार के सभी क्षेत्रों के क्रीड़ाप्रिय लोगों का ध्यान इस खेल ने अपनी ओर आकृष्ट कर लिया है। पहले केवल अंग्रेज़ी स्कूल और कालेज के छात्र ही इसमें दिलचस्पी लेते थे परन्तु अब तो छात्रों के अतिरिक्त युवा और प्रौढ़ युवक एवं युवतियाँ भी इसमें बहुत अधिक रुचि लेने लगे हैं। कुछ नागरिक तो क्रिकेट के मोह में इतने मोह ग्रस्त हो गए हैं कि वे खाना पीना भूल कर केवल क्रिकेट का खेल देखना ही पसन्द करते हैं। यद्यपि यह खेल विदेशी मूल का है फिर भी भारतीयों ने अपनी बुद्धि तथा बाहुबल से इस खेल में अभूतपूर्व उन्नति की है। यही कारण है कि भारतीय क्रिकेट टीम ने विदेशों में जाकर भी अनेक स्थानों पर बड़े-बड़े आश्चर्यजनक प्रदर्शन किए हैं।

ब्रिटिश संग्रहालय में लगे हुए चित्रों से यह प्रतीत होता है कि इस खेल को पहले बालक खेलते थे। सन् 1478 में फ्रांसीसी खेलों में इसकी सर्वप्रथम चर्चा मिलती है।  डॉ. जॉनसन ने इस खेल का वर्णन करते हुए एक स्थान पर लिखा है कि खेलने वाले गेन्द में छड़ी मारकर खेलते थे। इस खेल का नियमानुसार प्रदर्शन सर्वप्रथम 1850 ई. में गिलफोर्ड नामक फ्रांस के स्कूल में हुआ । इसकी विधिवत् शिक्षा देने के लिए क्लबों की स्थापना हुई । इससे आर्थिक लाभ भी हुआ । सन् 1936 में लगभग उत्तर और दक्षिण के कई देशों में बड़े-बड़े सफल मैच खेले गए। काफी देशों में इस खेल का बहुत अधिक प्रचार है।

भारत सदैव ही अपनी गुण ग्राह्यता शक्ति के लिए विख्यात रहा है। जब अंग्रेज़ एक विदेशी कम्पनी के रूप में भारत आए तब अपने साथ अपनी भाषा संस्कृति, सभ्यता एवं खेल भी लाए । 19वीं शताब्दी में बम्बई क्रिकेट क्लब की स्थापना तत्कालीन गर्वनर के हाथों हुई। जब बम्बई में यह खेल लोकप्रिय हो गया तो क्रिकेट का राजगुरु टूर्नामैंट आरम्भ हो गया। सन् 1927 में क्रिकेट की टीम ने सम्पूर्ण भारत का दौरा किया । 1928 में भारतीय क्रिकेट टीम इंग्लैंड भी गई। अब तो यह खेल इतना लोकप्रिय है कि इसके लिए टिकट भी लगा दिए जाते हैं। विदेशों में भारतीय टीम अपनी कला का प्रदर्शन करने के लिए जाती है। राष्ट्र की ओर से खिलाड़ियों को पुरस्कार प्राप्त होता है। साधारण खिलाडी अपने अनथक प्रयासों से इसे अपनी जीविका का साधन बना लेता है। कुछ भारतीय खिलाड़ियों ने तो अपनी यश चन्द्रिका समस्त विश्व में विकीर्ण कर दी है। आज उन्हें अन्तर्राष्ट्रीय सम्मान प्राप्त है।

क्रिकेट के खेल में दो निर्णायक होते हैं जिन्हें ‘एम्पायर’ कहा जाता है। इन निर्णायकों का निर्णय ही अन्तिम होता है। खेल यदि पाँच दिवसीय हो तो खेल का समय प्रायः प्रातः 10 से 12 बजे तक, दोपहर को 1 से 3 तक तथा फिर 3-20 से 5 बजे तक रहता है। आजकल एक दिवसीय मैचों का महत्त्व अधिक बढ़ गया है। एक दिवसीय मैच तो कृत्रिम रोशनी लगाकर दिन-रात भी खेले जाते हैं। इसमें प्रत्येक टीम 50-50 ओवर खेलती है।

क्रिकेट एक विशाल मैदान में खेला जाने वाला खेल है। ग्यारह-ग्यारह खिलाड़ियों की अलग-अलग दो टीमें होती हैं। मैदान के बीचों बीच 22 गज लम्बा पिच तैयार किया जाता है। इसके दोनों तरफ तीन तीन इन्च की दूरी पर तीन तीन विकेट गाडे जाते हैं। प्रत्येक टीम का एक कप्तान होता है जो अपनी टीम का संचालन करता है। खेल आरम्भ होने से पूर्व निर्णायक तथा दोनों दलों के कप्तान मैदान में उतरते हैं और एक सिक्का उछालते हैं। जो टॉस जीत जाता है उसको ही प्रथम खेलने अथवा क्षेत्ररक्षण का हक होता है। क्षेत्र-रक्षण के चारों ओर रेखा खिंची होती है। यदि बल्लेबाज़ द्वारा मारी गई बॉल सीमा रेखा को पार कर जाए तो 4 रन की प्राप्ति होती है और हवा में ही अगर गेंद रेखा पार कर जाए तो छः रन घोषित किए जाते हैं।

एक पक्ष के खिलाड़ी बैट लेकर आगे आते हैं। गेंद फेंकने वाला एक ओर से गेन्द फेंकता है। दूसरे पक्ष का खिलाडी, जो बैटिंग कर रहा होता है, वह बैट की सहायता से उसे रोकता है। यदि वह गेन्द डण्डे (विकट) से स्पर्श कर जाती है या बल्ले से लगी गेंद हवा में ही किसी क्षेत्र रक्षक द्वारा लपक ली जाती हे तो बल्लेबाज़ आऊट हो जाता है। इसके बाद उसी पक्ष का दूसरा खिलाड़ी खेलने आता है। जब इस प्रकार खेलते हुए एक पक्ष के दस खिलाड़ी आऊट हो जाते हैं तो दूसरी पार्टी के खिलाड़ी बल्लेबाजी के लिए मैदान में आते हैं। तब पहले वाली टीम क्षेत्ररक्षण करती है। जब बैटसमैन गेंद को अपने बल्ले से दूर फेंकता है तो दोनों ओर से बैट वाले खिलाडी दौडते हैं। गेंद से पहले बैट वाले जितनी बार दौड़ लगाते हैं उतनी दौड़ें बन जाती है। दोनों टीमें दो दो पारी खेलती हैं। इस प्रकार जिस पक्ष की अधिक दौड़ें बन जाती हैं वही पक्ष विजयी घोषित कर दिया जाता है। यदि समयाभाव या किसी कारण से दोनों पारियां पूरी न हो सकें तो मैच अनिर्णीत घोषित कर दिया जाता है। आम तौर पर एक श्रृंखला में 5 टैस्ट मैच खेले जाते हैं। पाँच में से तीन या अधिक मैच जीतने वाला दल ही विजयी होता है।

आजकल एक दिवसीय मैच ज्यादा प्रचलित हैं क्योंकि एक ही दिन में हार जीत का फैसला हो जाता है। ऐसे मैचों में 50-50 ओवर निर्धारित होते हैं। पहली टीम जो 50 ओवर में लक्ष्य रख देती है दूसरी टीम को अपने निर्धारित 50 ओवरों में उस लक्ष्य को पाना होता है। ऐसे मैचों में जीत या हार ही विकल्प होता है।

आधुनिक युग में यह खेल अत्यधिक प्रसिद्धि एवं लोकप्रियता प्राप्त कर चुका है। भारतीय इस खेल में विशेष निपुण होते जा रहे हैं। इसीलिए उनकी कीर्ति देश-देशान्तरों में फैलती जा रही है। खेलों से उदार मानवीय भावनाओं की उत्पत्ति होती है। वह संघर्षों से लडता हुआ सफलता की ओर अग्रसर होकर जीवन लक्ष्य को प्राप्त करता है। खेल हमें जीवन रूपी खेल में विजयी होना सिखलाते हैं।

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commentscomments

  1. virat says:

    detail too big to write

  2. Circlet is a bast game

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