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Hindi Essay on “Football Match” , ” फुटबाल मैच ” Complete Hindi Essay for Class 10, Class 12 and Graduation and other classes.

फुटबाल मैच का आँखों देखा हाल

निबंध नंबर : 01

फुटबाल एक अन्तर्राष्टीय स्तर का खेल है जब विश्व के किसी भी कोने में इनका मैच चल रहा होता है तो साड़ी दुनिया के खेल – प्रेमियों के सिरों पर एक तरह का भुत या पागलपन – सा सवार हो जाया करता है | घर – बाहर , दफ्तर – दूकान , बस में हो या बाजार में , सिवाए इनकी चर्चा के और कही कुछ  भी सुनाई नही देता |

इसी प्रकार फुटबाल का एक मैच पिछले रविवार को हमारे विद्दालय तथा   डी.सी.एम. सीनियर सैकेण्डरी विद्दालय के बीच होना तय हुआ | हमारे प्रधानाचार्य  महोदय ने प्रत्येक विद्दार्थी को इसकी सुचना पहले दिन ही दे दी थी की रविवार को सभी ठीक तिन बजे क्रीडास्थल पर एकत्रित हो जाएँ | रविवार को ठीक 3.30 बजे दोनों टीमें खेल के मैदान में पहुँच गई |

दोनों विद्दालयो की टीमें अच्छी थी, इसलिए खेल में आनन्द आना स्वाभाविक ही था | देखते – ही देखते क्रीडा – स्थल दर्शको से खचाखच भर गया था | दोनों टीमो के कप्तान रेफरी महोदय की सिटी बजने पर उनके पास पहुँचे , टास किया जिसमे डी.सी.एम. स्कूल विजयी रहा | गणमान्य व्यकित वही कुर्सियों पर विराजमान थे | खेल ठीक चार बजे प्रारम्भ हो गया |

खेल को प्रारम्भ करने की सुचना देने हेतु निर्णायक ने सीटी बजाई | देखते ही देखते खेल पुरे जोरो पर खेला जाने लगा | खेल में युकित और शक्ति का शानदार प्रदर्शन चल रहा था | डी.सी.एम. विद्दालय की टीम ने हमारे विद्दालय की टीम का दबाना प्रराम्भ कर दिया | फुटबाल हमारे गोलरक्षक से बचकर गोल को पार कर गई | विपक्षियो के हर्ष का कोई ठिकाना नही था | हमारे विद्दालय की टीम वाले खिलाडी थोड़े उदास अवश्य हुए परन्तु हतोत्साहित नही हुए | वे अपनी हार का बदला लेने अर्थात गेल उतारने में जुट गए | तभी खेल का मध्यान्तर हो गया |

मध्यान्तर समाप्त होते ही ‘निर्णायक’ ने सीटी बजाई | खेल पुन : प्रारम्भ हो गया | दोनों टीमें पुरे जोश में थी | इसलिए थोड़ी देर तक तो फुटबाल इधर-उधर घुमती रही | अचानक ही हमारी टीम ने वह गोल उतार दिया | दर्शको की तालियों से मैदान गूंज उठा | हमारी भी ख़ुशी का ठिकाना नही रहा | ज्योही खेल समाप्त होने में पाँच मिनट शेष थे हमारी टीम ने विपक्ष पर एक गोल और कर दिया | इसके साथ ही हमारी टीम मैच जीत गई |

खेल समाप्त होते ही खिलाडियों को फल वितरित किए गए | जितने वाली टीम के खिलाडियों को पुरस्कार भी वितरित किए गए | फिर सभी अपने अपने घरो को चले गए |

निबंध नंबर : 02

फुटबॉल मैच

जिस प्रकार शिक्षा मानव के मस्तिष्क को स्वस्थ बनाने के लिए आवश्यक है, उसी प्रकार क्रीडा मानव-शरीर को स्वस्थ बनाने के लिए अत्यन्त आवश्यक है। मानव-जीवन में क्रीड़ा का महत्त्वपूर्ण स्थान है। विश्व में अनेक प्रकार के खेल खेले जाते है। उन्ही में से फुटबॉल का भी एक खेल है।

बालक खेल में ही बहुत कुछ सीख जाता है और उसका चहुंमुखी विकास होने लगता है। जिस प्रकार केसी वृक्ष को रोपते समय अच्छी खाद, जलवायु तथा सुन्दर भूमि की आवश्यकता पड़ती है। ठीक वैसे ही बालक के लघु शरीर के विकास में क्रीडाओं का अधिक योग होता है। विशेषकर उसकी छात्रावस्था में यह अवसर स्वर्णीय होता है जब छात्र अनुशासित ढंग से अपने अध्यापकों के निरीक्षण में खेलों को खेलता है और मातृत्व की भावना का संचार करता है।

भारत में तथा अन्य राष्ट्रों में फुटबॉल, वालीबॉल, टेनिस, हॉकी, क्रिकेट टेबिलटेनिस, कबड्डी और घुडसवारी आदि खेल हैं जो मस्तिष्क को प्रसन्नचित एवं ताजा रखते हैं। इसके साथ ही कुछ खेल मनोरंजन के साथ-साथ कुछ बुद्धि का विकास भी करते है, ऐसे खेलों में शतरंज, चौपड, ताश व कैरम की गणना होती है।

समस्त खेलों में पर्याप्त शारीरिक पुष्टि करने वाला फुटबॉल का खेल मुझे बड़ा प्रिय है। इस खेल को खेलने के लिए पर्याप्त क्षेत्र मिलता है। दौड़ का पूर्ण आहलाद इस खेल में प्राप्त होता है। इस खेल के लिए क्रीडा क्षेत्र की लम्बाई 100 मीटर से 130 मीटर तक और चौडाई 50 से 100 मीटर तक होती है। प्रायः अन्तर्राष्ट्रीय मैचों में मैदान की लम्बाई 120 मीटर और चौड़ाई 90 मीटर होती है। खेल के मैदान में कई प्रकार की लाइनें लगायी जाती हैं, जैसे गोल की परिधि तथा छूने की रेखा। फाउल पैनल्टी और कार्नर के क्षेत्र भी लाइनों द्वारा निर्दिष्ट किये जाते हैं। मैदान के दोनों ओर पोल लगाए जाते हैं जिनकी परस्पर दूरी आठ मीटर की होती है। इधर-उधर कुछ झण्डियाँ भी लगा दी जाती हैं जो खेल को नियमबद्ध चलाने में सहायता देती हैं। समस्त क्षेत्र एक रेखा के द्वारा बराबर-बराबर बँटा हुआ होता है, उसे ‘केन्द्र स्थल’ कहते हैं।

एक बार मुझे फुटबॉल मैच देखने का सुअवसर प्राप्त हुआ। खेल के मैदान के चारों ओर भिन्न-भिन्न आकृति के व्यक्ति खड़े थे। मध्य में मैदान के सम्मुख एक बड़े मंच पर नगर के कुछ गणमान्य व्यक्ति बैठे थे। उनके मध्य में शारीरिक शिक्षा अधिकारी और आज के मुख्य अतिथि महोदय विराजमान थे। 3 बजे रेफ्री (निरीक्षक) महोदय ने सीटी बजायी। महावीर जैन सीनियर सेकेण्ड्री स्कूल तथा रामजस सीनियर सेकेण्ड्री स्कूल की टीमें सुसज्जित पोशाक में मैदान में आ गईं। रेफ्री ने टॉस किया। मुख्य अतिथि को दोनों टीमों के 22 खिलाड़ियों का परिचय कराया गया। खिलाड़ियों को अपने-अपने स्थान पर नियुक्त किया गया और दूसरी सीटी पर खेल प्रारम्भ हो गया। दोनों दलों के खिलाड़ी बड़े उत्साह के साथ खेल रहे थे। इससे भी अधिक उत्साह दर्शकों में था। जब भी फुटबॉल किसी पाले की ओर जाती, दर्शक हर्ष ध्वनि करते और आपस में चर्चा करते कि दोनों टीमें बहुत अच्छा खेल रही हैं। दोनों टीमों के खिलाड़ी संगठित होकर खेल रहे थे; किन्तु किसी भी टीम को एक दूसरे पर गोल करने का अवसर नहीं मिल रहा। अचानक रेफ्री ने सीटी बजायी; क्योंकि गेंद मैदान से बाहर चली गई थी। गेंद मैदान में लाई गई और खेल पुनः प्रारम्भ हुआ। महावीर जैन सीनियर सेकेण्ड्री का गोलकीपर बहुत ही सावधानी से चौकन्ना होकर गोल की रक्षा कर रहा था। खेल अपने पूर्ण यौवन पर था। 30 मिनट व्यतीत हो चुके थे। किसी ओर से भी गोल नहीं लगा। अचानक रेफ्री ने लम्बी सीटी बजायी। दोनों टीमों ने मध्यावकाश के लिए खेल का मैदान छोड़ दिया। दोनों टीमों के कप्तान अपनी-अपनी टीमों के खिलाड़ियों को ड्रिंक्स और संतरा देने लगे।

रेफरी ने अवकाश के पश्चात् अपनी सीटी बजाया। दोनों टीमें पुन: मैदान में नया जोश लेकर आ गईं। दोनों के पाले बदल गये। दोनों दलों के खिलाड़ी अपना पूरा जोर थे। अचानक रामजस सीनियर सेकेण्ड्री स्कूल की टीम के खिलाडी ने ऐसी भी कि गेंद विपक्षियों के पाले के गोल के निकट पहुँच गयी। उसी दल के दूसरे साडी ने उचक कर अपने सिर द्वारा उसे गोल में पहुंचा दिया। बस गोल हो गया। दर्शकगणों ने तालियों की तुमुल ध्वनि की। अब विपक्षी बड़ा जोर लगा रहे थे, किन्तु अचानक सीटी बजी और खेल समाप्त हो गया।

तत्पश्चात् पुरस्कार वितरण का आयोजन हुआ। शारीरिक शिक्षा अधिकारी ने खेलों की उपयोगिता पर प्रकाश डाला, जीतने वालों को शाबाशी दी, हारने वालों को और अच्छा खेलने के लिए प्रोत्साहित कर दोनों टीमों को पुरस्कार दिये गए।

मैच आयोजन का उद्देश्य छात्रों को संगठित करना होता है। मैच खेलने से खिलाड़ी में धैर्य, सजगता और सहनशक्ति का संचार होता है। वे सहयोग से कार्य करना तथा क्रोध पर नियन्त्रण करना सीखते हैं। छात्र शारीरिक शक्ति के विकास के साथ ही विद्यालय का यश कमाते हैं। अच्छे खिलाड़ी स्वदेश का नाम विश्व में ऊँचा करते हैं।

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