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Hindi Essay on “Deshatan Ke Labh” , ”देशाटन के लाभ” Complete Hindi Essay for Class 10, Class 12 and Graduation and other classes.

देशाटन के लाभ

निबंध नंबर : 01

देशाटन से अभिप्राय है प्राकृतिक और भौगोलिक विभिन्नताओ-विविधताओं से सम्पन्न अपने देश के अलग – अलग भू-भागो , हिस्सों या प्रान्तों का भ्रमण करके वहाँ के रूप रंग, रहन- सहन , रीती –नीतियों आदि के दर्शन करना | देशाटन मनुष्य के लिए अत्यन्त आवश्यक है | यह मनुष्य को आनन्द प्रदान करने के साथ – साथ उसके अनुभव और ज्ञान में वृद्धि करता है | यह बालक , युवा व बूढ़े स्त्री-पुरुष सभी के लिए बहुत उपयोगी है |

देशाटन करने वाले व्यक्ति प्रकृति के विभिन्न और विविध स्वरूपों का सहज ही साक्षात्कार कर लेता है | वह देख पाता है कि प्रकृति ने कही तो हरी-भरी और बर्फानी पर्वतमालाओ में धरती को ढक रखा है और कही पर रुखी- सूखी गर्म और नंगी पर्वतमालाए  है जहाँ छितराए पेड़ – पौधे , वनस्पतियाँ आदि स्वय की छाया के लिए तरसा करती है | कही तो हमेशा बसन्त का गुलजार रहता है और कही सर्दी के प्रकोप से पल भर के लिए छुटकारा नही मिल पाता है | कही लगातार वर्षा होती रहती है तो कही सख्त गर्मी से व्याकुल मनुष्य उससे छुटकारा पाने को बेचैन रहता है | देशाटन करके ही इन विविधताओ को जाना और अनुभव किया जा सकता है |

विभिन्न स्थानों पर जाकर वहाँ की वेशभूषा , रीती-रिवाज , रहन – सहन , खान-पान, उत्सव- त्यौहार , भाषा – बोलियाँ , सभ्यता – संस्कृतियाँ को देख – समझ कर ज्ञान- वर्द्धन होता है तथा प्राचीन व एतिहासिक भवन , प्राकृतिक – सौन्दर्य, भित्ति – चित्र , मन्दिर-किले व प्राचीन महल आदि देखकर मन आनन्द से विभोर हो जाता है | एतिहासिक स्थलों को अपनी आखों से देखकर ही सच्ची जानकारी होती है | हम जब तक स्वय वहाँ जाकर अपनी आँखों से किसी स्थान को न देख ले, तक तक उनके वास्तविक सौन्दर्य का वर्णन नही कर सकते | पुस्तको द्वारा प्राप्त जानकारी बहुत समय तक याद नही रह सकती है , परन्तु देशाटन द्वारा स्वय आँखों से किया गया दर्शन सदैव के लिए स्मृति – पटल पर अंकित हो जाता है |

प्राचीन काल में देशाटन का कार्य बहुत कठिन था | मार्गो में अनेक बाधाएँ थी, यातायात के साधन सुगम नही थे परन्तु फिर भी लोग अन्य देशो को जाया करते थे | मैग्स्थनीज , ह्रेनसांग , फाह्मान, इब्नबतूता आदि इस प्रकार की कठिन यात्राएँ करके देश – विदेश घुमे | परन्तु आधुनिक वैज्ञानिक आविष्कारो ने आज देशाटन सरल बना दिया है | आज मोटर –कार, हवाई जहाज , समुद्री जहाज , रेल आदि यातायात के सुलभ साधन उपलब्ध है | विभिन्न व्यक्तियों, संस्थाओ व राष्ट्रों में परस्पर प्रेम , सहानुभूति और सहयोग को बढ़ाने में देशाटन प्रभावशाली भूमिका निभाता है | अंत : हमे चाहिए कि हम दृढ निश्चय करके प्रसन्न होकर ज्ञान और अनुभव प्राप्त करने के लिए घर से निकल पड़े |

निबंध नंबर : 02

देशाटन के लाभ

देश+अटन, इन दो शब्दों में सन्धि होने से बना है एक नया शब्द-देशाटन। ‘देश’ किसी ऐसे विशेष भू-भाग को कहा जाता है, जिसे प्रकृति ने अपने विभिन्न और विविध रूपों वाला, विभिन्न और विविध प्रकार की सम्पत्तियों से सम्पन्न बनाया होता है। उन्ही के कारण एक ही देश का एक भाग या प्रान्त दूसरे भाग या प्रान्त से अलग कहलाता है। इसे हम प्रकृति द्वारा सम्पादित देश का भौगोलिक विभाजन और वैविध भी कहते हैं. जो अपने आप में सम्पूर्ण एवं महत्त्वपूर्ण हुआ करता है।

‘देशाटन’ में दूसरा प्रभाव शब्द है-‘अटन’, जिस का सामान्य अर्थ हुआ करता है भ्रमण या भ्रमण करना, घूमना-फिरना और तरह-तरह के दृश्यों का अवलोकन करना। इस प्रकार ‘देश’ और ‘अटन’ से मिल कर बने इस शब्द ‘देशाटन’ का अपना व्यापक और विशेष अर्थ हो जायेगा प्राकृतिक और भौगोलिक विभिन्नताओं-विविधताओं से सम्पन्न अपने देश के अलग-अलग भू-भागों, हिस्सों या प्रान्तों का भ्रमण कर के वहाँ के रूप-रंग रहन-सहन, रीति-नीतियों, आदि के दर्शन करता। उन्हें निकट से देख-सुन कर वहाँ की विशेषताओं को जानना-या-चाहना। इसी दृष्टि से देशाटन करने को दूसरे शब्दों में ‘देश-दर्शन’ करना भी कहा जाता है। और अधिक व्यापक अर्थ ग्रहण करने पर देशाटन के अन्तर्गत विभिन्न, विविध एवं अनेक देशों का भ्रमण या दर्शन करना भी आ जाता है। जहाँ तक सीमित या व्यापक अर्थों में देशाटन के उद्देश्य, प्रयोजन या लाभ आदि का प्रश्न है, वह चाहे अपने देश के विभिन्न भागों या प्रान्तों का किया जाए, अथवा संसार के विभिन्न देशों, का, उनमें समानता ही रहती है। व्यक्ति दोनों दशाओं में समान रूप से लाभान्वित होता है। हाँ, लाभ की सीमा और संख्या कुछ घट-बड़ अवश्य हो जाया करती है। अपने देशाटन से एक ही विशिष्ट भूभाग की जानकारियाँ मिल पाती हैं, जबकि विदेशाटन से विभिन्न देशों की विशेषताएँ देखी और समझी-बुझी जा सकती हैं।

अटन या भ्रमण चाहे देश में किया जाए चाहे सारी धरती पर बसे देशों में, उसके अनेक लाभ निश्चित रूप से प्राप्त हुआ करते हैं। देशाटन से मनोरंजन का पहला, प्रमुख एवं स्वस्थ लाभ तो हुआ ही करता है, व्यक्ति के मन-मस्तिष्क में जो अनेक प्रकार की जिज्ञासान्यक वृत्तियाँ रहा करती हैं, उन का हल भी होता है। इसी प्रकार, जैसाकि कहावत बनी हुई है ‘ऊँट को अपनी ऊँचाई की वास्तविकता का अहसास तभी हो पाता है, जब वह पहाड़ के नीचे से गुजर रहा होता है’ के अनुसार अपने आप को बड़ा विद्वान, ज्ञानवान और जानकार मानने वाला व्यक्ति देश-विदेश में अटन कर के जान पाता है कि वास्तव में वह कितना अल्पज्ञ है। इस प्रकार देशाटन व्यक्ति के अपने सम्बन्ध में पास रखे गए भ्रम-निवारण का भी एक कारण बन कर उसे जीवन के वास्तविक समतल पर ले जाने का सुखद, शान्तिप्रद कारण बन जाया करता है।

देशाटन करने वाला व्यक्ति प्रकृति के विभिन्न और विविध स्वरूपों के साथ साक्षात्कार कर पाने का सौभाग्य भी सहज ही प्राप्त कर लेता है। वह देख पाता है कि प्रकृति ने कहीं तो हरी-भरी और बर्फानी पर्वतमालाओं में धरती को ढक रखा है, वहाँ की पर्वतमालाओं की बर्फ-ढकी चोटियाँ इतनी ऊँची हैं कि उन्हें पार कर पाना यदि असम्भव नहीं तो कठिनतम कार्य अवश्य है। इसी प्रकार कहीं रूखी-सूखी गर्म और नंगी पर्वतमालाएँ हैं, जहाँ छितराए पेड़-पौधे, वनस्पतियाँ आदि स्वयं भी छाया के लिए तरसा करती हैं। इसी प्रकार कहीं दूर-दूर तक फैले हरे-भरे, फसलों की विविधता से लदे मैदान देखने को मिलते हैं, तो कहीं लम्बे-चौड़े, धूल-माटी आँखों-सिर में झोंकने को आतुर, रेतीले टीलों वाले रेगिस्तान दिखाई देकर प्रकृति की बनावट पर आश्चर्य करने को बाध्य कर दिया करते हैं। कहीं और-पार, दृष्टि-सीमा के भी उस पार तक फैले सागर-जल का विस्तार अपनी तरंगों से मन को मोह लिया करता है।

इसी प्रकार कहीं तो हमेशा वसन्त का गुलजार रहता है और कहीं सर्दी के प्रकोप से पल भर के लिए छुटकारा नहीं मिल पाता। कहीं वर्षा रानी की रिमझिम पायल बहरा न कर देने की सीमा तक बजती रहती है। देशाटन कर के ही इन विविधाओं को जाना और अनुभव किया जा सकता है. देशाटन करते समय विभिन्न रंग-रूप और बनावट लोग तो देखने-सुनने को मिलते ही हैं, उनके रंग-बिरंगे वेश-भूषा, रहन-सहन, ति-रिवाज, उत्सव–त्योहार, भाषा-बोलियाँ, सभ्यता-संस्कृतियों के रूप भी उजागर होकर मन को मुग्ध कर लिया करते हैं। इस सब से अटन करने वाला व्यक्ति विभिन्न जानकारियों का चलता-फिरता कोश बन जाया करता है। वह सुख-दुःख की हर स्थिति का सामना कर पाने में समर्थ, उदार-हृदय, सब की सहायता करने को हमेशा तत्पर रहना भी सीख लेता है। इसलिए अवसर और सुविधा जुटा कर देश-विदेश का अटन अवश्य करना चाहिए। मानवीयता को विस्तार देना अटन का सर्वाधिक श्रेष्ठ लाभ कहा-माना जा सकता है।

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commentscomments

  1. Kavya says:

    Very much helpfull😊😊😊😊

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