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Hindi Essay on “Eid ” , ” ईद” Complete Hindi Essay for Class 10, Class 12 and Graduation and other classes.

ईद

Eid

 

निबंध नंबर – 01 

ईद का चाँद जैसे मुहावरे का सम्बन्ध ईद के त्यौहार से ही है | क्योकि ईद की गणना और आगमन चन्द्रमा के उदय होने पर ही निर्भर होता है | यह त्यौहार मुस्लिम भाइयो का एकमात्र ऐसा त्यौहार है जिस दिन वे सबसे अधिक प्रसन्न रहते है | इसीलिए ‘ईद’ शब्द प्रसन्नता का घोतक है | यह प्रसन्नता , सुन्दरता तथा पारस्परिक मधुर- मिलन के भाव को प्रकट करने वाला त्यौहार है |

ईद का त्यौहार प्रतिवर्ष एक बार नही , बल्कि दो बार आता है पहले यह फाल्गुन (फरवरी –मार्च ) महीने में आता है, तब इसे ‘ईद –उल –फितर’ नाम से पुकारते है | दूसरी बार यह त्यौहार ज्येष्ठ (मई) मास में आता है , तब इसे ‘ईद –उल-जुहा’ नाम दिया जाता है | परन्तु यह सर्वथा निशिचत नही है की यह त्यौहार प्रतिवर्ष इन्ही महीनों में आए क्योकि इसमें तिथि की गणना हिन्दी महीने के हिसाब तथा चाँद के उदय होने के साथ होती है | कई बार तो यह त्यौहार अलग- अलग स्थान पर अलग-अलग दिनों में मनाया जा है | इन दो ईदों में से एक ‘शाकाहारी’ ढ़ग से मनाई जाती है तो दूसरी ‘मासाहारी’ ढंग से | शाकाहारी ईद को ईद या मीठी ईद (ईद-उल-फितर) नाम दिया जाता है | इस दिन सिवाइयाँ व मिठाइयाँ आदि खाने –खिलाने की परम्परा है | मासाहारी ईद को ‘बकरीद’ नाम दिया जाता है | इस दिन बकरे हलाल कर उनका माँस एक तरह से शिनरी या प्रसाद के रूप में बाँट कर खाने – खिलाने की परम्परा है |

ईद से पहले रमजान का पवित्र महीना हुआ करता है | रमजान के महीने में धार्मिक प्रवृति वाले मुसलमान लोग सूर्योदय से पूर्व कुछ खा-पीकर दिनभर रोजा (व्रत) रखा करते है | पूर्णतया साफ-पाक रह कर दिन में पाँच बार नमाज अता करते है तथा सायंकाल में  सूर्यास्त के बाद दान – पुण्य करके तथा निर्धनों आदि को भोजन खिलाकर तथा बाद में स्वयं खाकर रोजे (व्रत) को समाप्त करते है |

ईद के दिन बच्चे , बूढ़े , स्त्री-पुरुष सभी प्रसन्नचित दिखाई पड़ते है | ये सभी मेलो में जाकर अपनी आवश्कतानुसार खरीददारी करते है | सभी जन आपस में एक दुसरे से प्रेमपूर्वक मिलते है तथा एक दुसरे को बधाइयाँ देते है | इस प्रकार यह त्यौहार आकर प्रसन्नता, समानता, भाई –चारे व् नि:स्वार्थ मेल – मिलाप को सन्देश दे जाया करता है | इससे इस्लामिक जीवन – पद्धति एव सस्कृति की एक स्पष्ट झलक मिल जाती है |

 

निबंध नंबर – 02 

 

ईद

Eid

प्रस्तावना ईद का त्यौहार मुसलमानों का सबसे पवित्र एवं बड़ा त्यौहार होता है। यह रमजान का महीना पूरा हो जाने के बाद मनाया जाता है। मुस्लिम लोग एक महीने तक रोजा रखते हैं। रोजे के दिनों में मुस्लिम धर्मानुयायी पूरे नियमों से खुदा की इबादत करते हैं तथा पांचों वक्त की नमाज अदा करते हैं। रमजान के दिनों में बहुत सुबह अजान से पहले वे खा-पी लेते हैं जिसे सहरी कहते हैं, फिर अजान के बाद नमाज पढ़ते हैं, इस बीच वे पूरे दिन कुछ नहीं खाते पीते हैं तथा अधिकांश समय खुदा की इबादत में गुजरते है |

संध्या ढलने और अजान के बाद वे रोजा खोलते हैं जिसे ‘रोजा इफ्तार’ करना कहते हैं। वे इस समय जो भी खाने-पीने की चीज बनाते हैं उसे पड़ोसी, रिश्तेदारों तथा ऐसे घरों में पहुंचाते हैं जो बहुत गरीब होते हैं।

रमजान का पवित्र माह रमजान का महीना बहुत पवित्र माना जाता है। इन दिनों मुसलमान भाई बुराई से बचने की पूरी कोशिश करते हैं। तीस रोजों के बाद ईद आती है | ईद के दिन सुबह से ही बच्चे, बूढ़े , जवान सभी ईदगाह जाने की तैयारी में लग जाते है |

ईद की तैयारी – नहा-धोकर नये-नये कपड़े पहनकर टोलियां-की-टोलियां ईदगाह की ओर रवाना होती हैं। ईदगाह में नमाज पढ़ना बहुत महत्वपूर्ण इबादत मानी जाती है। ईद की नमाज पढ़कर मुसलमान खुदा को शुक्र भेजते हैं कि उनके तीस रोजे बिना किसी परेशानी के पूरे हुए और वे रमजान के दिनों में बुराई से बचते रहे। ।

आपसी भाईचारे का प्रतीक – नमाज पढ़ने के बाद सभी मुस्लिम भाई एक-दूसरे से गले मिलते हैं और ईद मुबारक कहते हैं। वे प्रसन्नता के साथ अपने-अपने घरों को वाना होते हैं। इस दिन सभी घरों में सिवईयां बनती हैं। वे आपस में मेल-मिलाप बढ़ाने के लिए एक-दूसरे के घर सिवईयां खाने जाते हैं।

ख़ुशी का त्योहार – ईद के दिन बस्तियों में छोटे-छोटे मेलों की शक्ल में अनेक प्रकार की दुकानें लगती हैं | जिनमें गुब्बारे, बच्चों के खिलोने तथा कई तरह के खेलों की चीजें मिलती हैं | बड़े लोग बच्चों के इदी देते हैं | इदी के पैसे पाकर बच्चे खुश होते हैं और मनमर्जी की चीजें खरीदते हैं |

ईद के दिन मुसलमान भाइयों के अलावा अन्य धर्मों के लोग भी मुस्लिम भाइयों को ईद की मुबारकबाद देते है |

उपसंहार –इस तरह हम कह सकते हैं कि ईद का त्यौहार आपसी सदभाव  और भाईचारे का त्यौहार है।

 

निबंध नंबर : 03

 

ईद

Eid

                ईद-उल-फितर अथवा ईद का त्योहार मुस्लिम समुदाय का मुख्य त्योहार है। विश्व के सभी कोनों मंे फैले मुस्लिम लोग इसे बड़ी ही श्रद्धा एंव उल्लासपूर्वक मनाते हैं। वास्तव में ईद का त्योहार समाज में खुशियाँ फैलाने, पड़ोसियांे के सुख-दुःख में भागीदार बनने तथा जन-मन के बीच सौहार्द फैलाने में महत्वपूर्ण भूमिका अदा करता है। हमारे देश में जब ईद का त्योहार आता है, मुसलमानों के अतिरिक्त अन्य सभी समुदायों के व्यक्ति खुशी से झूम उठते हैं।

                मुस्लिमों के लिए रमजान का महीना विशेष धार्मिक महत्व रखता है। यह उनके दृष्टिकोण में उनके लिए आत्मशुद्धि का महीना होता है। सभी मुस्लिम जन इस महीने में पूरे दिन का उपवास रखते हैं। इसका वे इतनी कठोरता से पालन करते हैं कि वे दिन भर जल की एक बंूद भी ग्रहण नहीं करते हैं। सभी लोग दिन के पाँच बजे निश्चित समय पर खुदा को नमाज अदा करते हैं तथा अपने व सभी परिजनों की आत्मशुद्धि के लिए दुआ करते हैं। रमजान के पूरे महीने सभी मुस्लिम सूर्यास्त के पश्चात् ही भोजन व जल ग्रहण करते हैं। पंरतु इस्लाम में कुछ असहाय, बीमार तथा लाचार व्यक्तियों को व्रत से छूट दी गई है लेकिन सभी सक्षम व्यक्तियों के लिए रमजान के महीने मे व्रत रखना अनिवार्य है। रमजान महीने के अंतिम दिन सभी मुस्लिम चाँद को देखने की उत्सुकता रखते हैं क्योंकि चाँद के दिखाई देने के पश्चात् ही दूसरे दिन ईद मनाई जाती हैं।

                                सभी मुसलमान इस त्योहार को बड़ी धूम-धाम से विशेष तैयारी के साथ मनाते हैं। ईद के त्योहार में संपूर्ण वातावरण एकरस हो जाता है। अमीर-गरीब, जवान या बूढ़ा सभी जनोें में बराबर उत्साह देखा जा सकता है। सभी अपनी शक्ति व सामथ्र्य एंव रूचि के अनुसार नए वस्त्र, नए आभूषण, जूते, चप्पल व अन्य भौतिक सुख की सामग्री की खरीद करते हैं। चारों ओर फलों व मिठाईयों की दुकानों मे लंबी भीड़ देखी जा सकती है। वातावरण मे एक नई रौनक आ जाती है। ईद के दृश्य का सजीव चित्रण महान् उपन्यासकार मुंशी प्रेमचन्द ने अपनी प्रसिद्ध कहानी ईदगाह में किया है।

                                ईद के दिन प्रातःकाल बच्चे, युवक, बुढ़े सभी स्वच्छ कपड़ों में एक निश्चित समय पर ईदगाह में एकत्रित होते हैं। सभी लोग वहाँ पंक्तिबद्ध होकर नमाज अदा करते हैं। हजारों की संख्या में एकत्रित हुए लोगों के हाथ जब दुआ के लिए उठते हैं तो संपूर्ण दृश्य देखकर मन आंदोलित हो उठता है। तब ऐसा प्रतीत होता है जैसे सभी आपस में भाई-भाई हैं जिनमें परस्पर द्वेष व वैमनस्य का कोई स्थान नहीं है। नमाज अदा करने के उपरांत सभी लोग एक-दूसरे को गले लगाते हैं तथा ईद की मुबारकबाद देते हैं। इसके साथ ही दावतों का सिलसिला शुरू हो जाता हैं लोग नाना प्रकार के स्वादिष्ट व्यंजनों का आनंद उठाते हैं तथा अपने निकट संबंधियों में इसका आदान-प्रदान भी करते हैं।

                                रमजान का महीना और उसके पश्चात् ईद का पावन पर्व सभी के लिए विशेष धार्मिक महत्व रखता है। यह मन की पवित्रता एंव उसकी शुद्धता हेतु मनुष्य को प्रेरित करता है। निस्संदेह यदि हम इस पावन पर्व के मूल आदेर्शों का पालन करें तो लोगों के मध्य वैर-भाव, शत्रुता अर्थात् मनुष्य का मनुष्य के प्रति भेद-भाव को बहुत हद तक कम किया जा सकता है। यह त्योहार हमें भाईचारे तथा एक-दूसरे से प्रेम करने की सीख देता है।

                                                ईद हो या दीवाली,

                                                चहुँ ओर एक रौनक सी आई।

                                                देखो धरती पर फिर से,

                                                स्वर्ग की घटा घिर आई।

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