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Archive by category "Languages" (Page 270)
पुस्तकालय Library पुस्तकालय ज्ञान का भंडार है। सभ्यता का इससे ही शृंगार है। निर्धनों का धन, धनवान का मित्र है। साहित्य रक्षक प्यार का आधार है। पुस्तकालय का अर्थ है –पुस्तकों का घर, मन्दिर अथवा भंडार । जहाँ पुस्तकों का संग्रह होता है, उसे पुस्तकालय कहा जाता है। पुस्तकालय में केवल पुस्तकें ही नहीं रखी जाती बल्कि वहाँ पत्र-पत्रिकताएँ भी पढ़ने को मिलती हैं। जिस प्रकार शरीर को स्वस्थ रखने...
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January 13, 2021 evirtualguru_ajaygourHindi (Sr. Secondary), LanguagesNo Comment
भारतीय नारी Bhartiya Nari सृष्टि की पूर्णता पुरुष और नारी से है। भारतीय साहित्य और संस्कृति में पुरुष और प्रकृति को संसार का संचालन माना गया है। नारी ईश्वर की शक्ति है। नारी और नर के योग से सृष्टि परिपूर्ण होती है। नारी बहु–गुण सम्पन्न है इसलिए महान्, विचारक, कवि उसके सामने नत–मस्तक हए हैं। नारी में दया, माया, , त्याग भरा पड़ा है। उसके हृदय की गहराई और मन...
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January 13, 2021 evirtualguru_ajaygourHindi (Sr. Secondary), LanguagesNo Comment
भारतीय सैनिक Bhartiya Sainik किसी भी मज़बूत देश की नींव उसकी शक्ति में होती है। किसी देश की सेना का मनोबल जितना दृढ़ होगा उतना ही वह राष्ट्र मज़बूत होगा। सेना का निर्माण सैनिकों से होता है। एक महान देश है। यह शान्ति में विश्वास रखता है। परन्तु कहा जाता हैं। आप शान्ति चाहते हैं तो युद्ध के लिए सदा तैयार रहें । युद्ध के लिए सेना की आवश्यकता होती...
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January 13, 2021 evirtualguru_ajaygourHindi (Sr. Secondary), LanguagesNo Comment
युवा वर्ग का राष्ट्र के उत्थान में योगदान Yuva varg ka Rashtriya Utthan me Yogdan युवाशक्ति ही किसी नव स्वतन्त्रता प्राप्त एवं राष्ट्र का निर्माण करने के लिए उसकी रीढ़ की हड्डी है। युवा शक्ति के अन्दर असीम शक्ति का भण्डार होता है। युवा वर्ग एक कच्ची मिट्टी के बर्तन जैसा होता है, उसको आप चाहे जिस आकार में ढालना चाहें ढाल सकते हैं। इसलिए यह आवश्यक है कि युवा...
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January 9, 2021 evirtualguru_ajaygourHindi (Sr. Secondary), LanguagesNo Comment
राष्ट्र निर्माण में विद्यार्थीयों का योगदान Rashtra Nirman me Vidhyarthiyo ka Yogdan निबंध संख्या :- 01 किसी भी राष्ट्र की उन्नति का आधार और प्रतिष्ठा उसकी भावी पीढ़ी पर होता है । जो बासी हो गया, जीर्ण हो गया, समयातीत हो गया, उस फूल को डाल से चिपके रहने का कोई अधिकार नहीं है। यही सोचकर शायद कविवर जयशंकर प्रसाद जी ने ठीक ही कहा है- प्रकृति के यौवन का श्रृंगार...
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January 9, 2021 evirtualguru_ajaygourHindi (Sr. Secondary), LanguagesNo Comment
एक आदर्श विद्यार्थी के गुण Ek Aadarsh Vidyarthi ke Gun निबंध नंबर :- 01 विद्यार्थी जीवन मानव जीवन का सबसे सुनहरी काल है। एक विद्यार्थी सब प्रकार की शक्तियों को विकसित करने के सक्षम होता है। इसलिए विद्वानों ने मी जीवन को जीवन का आधार माना है। यदि नींव मज़बत होगी तो उस पर भावी जीवन का महल भी सुदृढ़ एवं मजबूत बन सकेगा, नहीं तो आन्धियां और तफान किसी भी...
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January 9, 2021 evirtualguru_ajaygourHindi (Sr. Secondary), LanguagesNo Comment
परहित सरिस धर्म नहिं भाई Parhit Saris Dharm Nahi Bhai निबंध संख्या:- 01 महाकवि तुलसीदास ने कहा है ‘परहित सरिस धर्म नहिं भाई. पर पीडा सम नहीं अधमाई’; अर्थात् परापकार का कोई दूसरा ‘धर्म’ नहीं है और दूसरों को पीड़ देने से बढ़कर कोई ‘पाप’ नहीं है। परोपकार या परहित दो-दो शब्दा सबन हैं—पर + उपकार, पर + हित । इनका अर्थ है दूसरों का उपकार या हित करना । जब...
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December 11, 2020 evirtualguru_ajaygourHindi (Sr. Secondary), LanguagesNo Comment
आरक्षण की समस्या Aarakshan ki Samasya ‘आरक्षण’ शब्द का सामान्य अर्थ है किसी स्थान, वस्तु आदि को अपने या किसी अन्य के लिए सुरक्षित कराना, पर यहाँ आरक्षण से अभिप्राय है नौकरियों या उच्च शिक्षा में निम्न जातियों, वर्गों, जनजातियों के लिए कुछ स्थान सुरक्षित रखकर उन्हें अन्य जातियों की तरह प्रगति या विकास कर सकने के अवसर या सुविधा उपलब्ध कराना। आरक्षण के पक्ष में तर्क है। दूरदर्शन आज सबसे...
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December 11, 2020 evirtualguru_ajaygourHindi (Sr. Secondary), LanguagesNo Comment