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Hindi Essay, Moral Story “Jo hal jote kheti vaki, aur nahi to jaki taki” “जो हल जोते खेती वाकी, और नहीं तो जाकी ताकी” Story on Hindi Kahavat.

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जो हल जोते खेती वाकी, और नहीं तो जाकी ताकी Jo hal jote kheti vaki, aur nahi to jaki taki तालाब के किनारे एक मंदिर था। एक जमींदार मंदिर के चबूतरे पर बैठा-बैठा कुछ सोच रहा था। आमदनी ‘घटती जा रही थी। सभी खेत आध-बटाई पर दे रखे थे। बिना हाथ-पैर चलाए लगभग आधी फसल का अनाज मिल जाता था। उसने खुद तो कभी हल की मूंठ तक नहीं पकड़ी थी।...
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Hindi Essay, Moral Story “Ghar ka aaya naag na puje, Bambi pujan jaye” “घर का आया नाग न पूजे, बांबी पूजन जाएं” Story on Hindi Kahavat.

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घर का आया नाग न पूजे, बांबी पूजन जाएं Ghar ka aaya naag na puje, Bambi pujan jaye   बिना बताए जब कोई मेहमान आता था, तो बड़ी खुशी होती थी। आए हुए मेहमान का आदर-सत्कार करते थे। जब यह पता रहता था कि अमुक मेहमान अमुक तिथि को आ रहा है, तो प्रसन्नता तो होती थी, लेकिन इतनी नहीं होती थी, जितनी बिना बताए आने वाले मेहमान के आने पर...
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Hindi Essay, Moral Story “Chati ka Jamun, mere muh me daal do” “छाती का जामुन, मेरे मुंह में डाल दो” Story on Hindi Kahavat for Students

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छाती का जामुन, मेरे मुंह में डाल दो Chati ka Jamun, mere muh me daal do सड़क के किनारे एक बाग था। उस बाग में दो-तीन जामुन के पेड़ थे। जामुन के पेड़ के नीचे दो आदमी सो रहे थे। इधर-उधर तमाम जामुनें टपकी पड़ी थीं। एक जामुन एक आलसी के सीने पर पड़ी हुई थी। आंख खुलते ही उस आलसी को लगा कि छाती पर कुछ पड़ा है। उसने थोड़ा...
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Hindi Essay, Moral Story “Ajgar kare na Chakri, Panchi kare na Kaam” “अजगर करे न चाकरी, पंछी करे न काम” Story on Hindi Kahavat for Students

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अजगर करे न चाकरी, पंछी करे न काम Ajgar kare na Chakri, Panchi kare na Kaam एक दिन मलूकदास को न जाने क्या सूझा कि हठ कर बैठे कि ईश्वर सबको खिलाता है। मैं देखता हूं ईश्वर मुझे कैसे खिलाता है? ऐसा सोचकर वे एक जंगल में चले गए। जंगल में उन्हें एक छायादार वृक्ष मिला। मलूकदास उसी वृक्ष के नीचे लेटकर सुस्ताने लगे। थोड़ी देर बाद वे उसी पेड़ पर...
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Hindi Essay, Moral Story “Garib ki Joru, Sabki Bhabhi” “गरीब की जोरू, सबकी भाभी” Story on Hindi Kahavat for Students of Class 9, 10 and 12.

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गरीब की जोरू, सबकी भाभी Garib ki Joru, Sabki Bhabhi एक मोहल्ले में एक गरीब परिवार था। उस मोहल्ले में कुछ अमीर थे और ऐसे परिवार अधिक थे जो न अमीर थे और न गरीब थे। गरीब परिवार का दीनू सबको राम-राम करता था। वह सब लोगों के काम भी आता रहता था। उस मोहल्ले में विभिन्न समाज और बिरादरी के लोग थे। दीनू के पड़ोस में एक परिवार ठाकुर का...
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Hindi Essay, Moral Story “Ek to Karela, Dusra Neem Chadha” “एक तो करेला, दूसरा नीम चढ़ा” Story on Hindi Kahavat for Students of Class 9, 10 and 12.

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एक तो करेला, दूसरा नीम चढ़ा Ek to Karela, Dusra Neem Chadha   एक व्यक्ति को मधुमेह की बीमारी थी। वैद्य का कहना था कि करेले की सब्जी और करेले का रस मधुमेह के रोगी के लिए बहुत लाभदायक होता है। वैद्य ने उससे करेला खाने के लिए कहा तो बिदक गया। करेले से ही नहीं बल्कि हर कड़वी चीज से उसे एक तरह से नफरत थी। यहां तक कि यदि...
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Hindi Essay, Moral Story “Naach Na Jane, Aangan Tedha” “नाच न जाने, आँगन टेढ़ा” Story on Hindi Kahavat for Students of Class 9, 10 and 12.

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नाच न जाने, आँगन टेढ़ा Naach Na Jane, Aangan Tedha लड़के की शादी थी। दो दिन बाद बरात जानी थी। दो दिन से शाम को गीत और नाच नियमित हो रहे थे। आज तीसरा दिन था। रिश्तेदार, घर-कुनबा और आस-पड़ोस की महिलाएं गीत में शामिल थीं। कुनबे की एक बुआ थी। सुंदर भी थी और कपड़े भी अच्छे पहने थी। जब कोई नाचता था तो वह कुछ-न-कुछ बोल देती थी। कभी...
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Hindi Essay, Moral Story “Laalach Buri Bala Hai” “लालच बुरी बला है” Story on Hindi Kahavat for Students of Class 9, 10 and 12.

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लालच बुरी बला है Laalach Buri Bala Hai   एक शहर में एक सुनार था। उसकी दुकान बहुत प्रसिद्ध थी। वह अपनी दुकान पर नए-नए डिजाइनों में सोने-चांदी के गहने बनाता था और बेचता था। कुछ लोग अपने पुराने गहने लाते थे और कुछ पैसे देकर नए गहने बनवा ले जाते थे। उसकी नाप-तौल बिल्कुल ठीक होती थी। ईमानदारी में उसका नाम था। अपनी मेहनत की मजदूरी ठीक-ठीक लेता था। सोने...
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