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Posts tagged "Hindi essays" (Page 83)
बिना विचारे जो करे, सो पाछे पछताए Bina Vichare jo Kare, So Pache Pachtaye मनुष्य संसार का सर्वश्रेष्ठ प्राणी माना जाता है। इसका कारण यही है कि वह मननशील है। वह अपने विचार के बल पर संसार के बड़े काम करने में सफल हो सकता है। उसका मन जिस किसी कार्य में लीन हो जाता है वह उस कार्य में अदभुत सफलता प्राप्त कर लेता है। मनुष्य के पास शारीरिक शक्ति...
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February 19, 2021 evirtualguru_ajaygourHindi (Sr. Secondary), LanguagesNo Comment
भारतीय समाज में नारी का स्थान Bharatiya Samaj mein Nari ka Sthan जिस प्रकार तार के बिना वीणा और धुरी के बिना रथ का पहिया बेकार है उसी तरह नारी के बिना मनुष्य का सामाजिक जीवन अधूरा है। भारतीय नारी सृष्टि के आरम्भ से ही गुणों का भण्डार रही है। पृथ्वी जैसी सहनशीलता, सूर्य जैसा तेज़, समुद्र सी गम्भीरता, चन्द्रमा जैसी शीतलता, पर्वतों जैसी मानसिक उच्चता एक साथ नारी के...
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February 19, 2021 evirtualguru_ajaygourHindi (Sr. Secondary), LanguagesNo Comment
हमारी परीक्षा प्रणाली में नकल की समस्या Hamari Pariksha Pranali me Nakal ki Samasya प्रत्येक व्यक्ति परीक्षा देना और सफल होने की इच्छा रखता है। नकल करने की प्रवृत्ति भी मानव-स्वभाव का अंग है। एक बच्चा भी बातें और सामान्य व्यवहार प्रायः अपने बड़ों या प्रकृति की नकल करके ही सीखता है। लेकिन एक विद्यार्थी का नकल करना उचित एवं हितकर नहीं कहा जा सकता। आज हमारी शिक्षा परीक्षा-प्रणाली के फलस्वरूप नकल...
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February 19, 2021 evirtualguru_ajaygourHindi (Sr. Secondary), Languages3 Comments
भारतीय संस्कृति: हमारी धरोहर Bharatiya Sanskriti – Hamari Dharohar भूमिका– किसी देश का आचार-विचार ही उस देश की संस्कृति कहलाती है। कछ लोग सभ्यता और संस्कृति को एक-दूसरे का पर्याय मानने लगे हैं जिससे कई प्रकार की भ्रान्तियाँ उत्पन्न हो गई हैं। वास्तव में सभ्यता और संस्कृति दोनों ही अलग-अलग होती हैं। सभ्यता का सम्बन्ध हमारे बाहरी जीवन के ढंग से है यथा खान-पान, रहन-सहन, बोलचाल जबकि संस्कृति का सम्बन्ध...
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February 19, 2021 evirtualguru_ajaygourHindi (Sr. Secondary), Languages1 Comment
भारतीय समाज में व्याप्त कुरीतियाँ Bharatiya Samaj me Vyapt Kuritiya समाज ही किसी राष्ट्र का आधार स्तम्भ होता है। यदि हम अपने इतिहास पर एक नज़र डालें तो हमें पता चलता है कि हमारा एक प्राचीन तथा अमर समाज है जिसने जीवन के सभी क्षेत्रों में महानतम व्यक्तियों को जन्म दिया है तथा सर्वोत्कृष्ट दर्शन एवं पवित्रतम सामाजिक मापदण्डों को विकसित किया है। यह हमारे समाज का एक सुनहरा युग...
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February 19, 2021 evirtualguru_ajaygourHindi (Sr. Secondary), LanguagesNo Comment
साम्प्रदायिकता – लोकतन्त्र के लिए खतरा Sampradayikta Loktantra ke liye Khatra भूमिका– साम्प्रदायिकता एक संकीर्ण विचारधारा है जिसके चलते एक धार्मिक सम्प्रदाय के लोग दसरे सम्प्रदाय के लोगों को अनदेखा कर देते हैं और राजनीतिक, आर्थिक एवं सामाजिक स्वार्थों की पूर्ति के लिए अपने देश के हित की भी परवाह नहीं करते। साम्प्रदायिकता का अर्थ अपने धर्म के प्रति वफादारी निभाते हुए उसके हित के लिए हर संम्भव प्रयत्न करना...
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February 19, 2021 evirtualguru_ajaygourHindi (Sr. Secondary), LanguagesNo Comment
नशा नाश करता है Nasha Nash Karta Hai मानव परमात्मा की सर्वोत्तम रचना है। 84 लाख योनियों में से अनेक जन्मों पश्चात् दुर्लभ मनुष्य जीवन प्राप्त होता है। यहां जीवन परमार्थ, धर्मार्थ एवं पुण्य कर्म करने का आधार है परन्तु फिर भी कुछ नादान लोग इस बहुमूल्य मनुष्य जीवन को अनेक प्रकार के नशों द्वारा नष्ट कर डालते हैं तथा नशे मानव जीवन के लिए अभिशाप हैं। ये मनुष्य को...
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February 19, 2021 evirtualguru_ajaygourHindi (Sr. Secondary), LanguagesNo Comment
मानवाधिकार Manav Adhikar निबंध संख्या :- 01 10 दिसंबर, 1946 को संयुक्त राष्ट्र की साधारण सभा में मानवाधिकारों की विश्व घोषणा की। इसके पक्ष में 45 मत पड़े, विरोध में कोई नहीं था। निम्न आठ राष्ट्रों ने मतदान में भाग नहीं लिया। बायलेस्पियन, सोवियत, समाजवादी गणतंत्र, चेकोस्लोवाकिया, पौलेंड, सऊदी अरब, उक्रेनियन, सोवियत समाजवादी गणतंत्र, संयुक्त सोवियत समाजवादी गणतंत्र, दक्षिण अफ्रीकी संघ और यूगोस्लाविया। देखा जाए तो यह घोषणा कोई कानून नहीं...
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February 18, 2021 evirtualguru_ajaygourHindi (Sr. Secondary), LanguagesNo Comment
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