Home » Posts tagged "Hindi essays" (Page 216)

Hindi Essay on “Shaharikaran ke Kuprabhav” , ”शहरीकरण के कुप्रभाव” Complete Hindi Essay for Class 10, Class 12 and Graduation and other classes.

Hindi Essays
शहरीकरण के कुप्रभाव Shaharikaran ke Kuprabhav यह एक स्वाभाविक एंव प्राकृतिक नियम है कि क्रमश: गांव-कस्बों में और कस्बे ही विकास करके शहरों के रूप धारण कर लिया करते हैं। शहर या नगर विकास की प्रक्रिया में पडक़र महानगरों का रूप धारण कर लिया करते हैं। सृष्टि का अब तक का विकास-क्रम इसी नियम का साकार स्वरूप है। हम भारत की राजधानी दिल्ली का उदाहरण भी ले सकते हैं। सन 1947...
Continue reading »

Hindi Essay on “Badh ka ek Drishya ” , ”बाढ़ का एक दृश्य” Complete Hindi Essay for Class 10, Class 12 and Graduation and other classes.

Hindi Essays
बाढ़ का एक दृश्य Badh ka ek Drishya  प्रकृति और मानव के बीच संघर्ष अंनतकाल से जारी है। मानव-जीवन के विरुद्ध प्रकृति के जो अनेक प्रकार के प्रकोप सामने आते रहते और माने जाते हैं, बाढ़ का प्रकोप उनमें से अत्यंत भयावह माना गया है। वह जल, जो जीवन का पर्यायवाचक माना जाता है, पानी जो व्यक्ति की अस्मिता और इज्जत का, मान-स मान का प्रतीक स्वीकारा गया है वही जल...
Continue reading »

Hindi Essay on “Yatayat ki Samasya ” , ”यातायात की समस्या” Complete Hindi Essay for Class 9, Class 10, Class 12 and Graduation and other classes.

Hindi Essays
यातायात की समस्या Yatayat ki Samasya  बीसवीं शताब्दी के अंतिम चरणों में और इक्कीसवीं सदी के द्वार के समीप पहुंचते-पहुंचते जब कस्बे और सामान्य नगर बड़े-बड़े नगरों का दृश्य उपस्थित करने लगे हों, तब जिन्हें पहले ही महानगर कहा जाता है, उनकी दशा का अनुमान सहज और स्वत: ही होने लगता है। जहां जाइए, मनुष्यों की भीड़ का ठाठें मारता अथाह सागर, जिसका कोई ओर-छोर नहीं-कुछ ऐसी ही स्थिति हो गई...
Continue reading »

Hindi Essay on “Urja Ke Strot aur Samasya” , ”ऊर्जा के स्त्रोत और समस्या ” Complete Hindi Essay for Class 9, Class 10, Class 12 and Graduation and other classes.

Hindi Essays
ऊर्जा के स्त्रोत और समस्या  Urja Ke Strot aur Samasya  ऊर्जा-एक प्रकार की ज्वलनशील शक्ति, जिसका संकट निकट भविष्य में आज का मानव स्पष्ट देख एंव अनुभव कर रहा है। ऊर्जा का वास्तविक अर्थ आग या ज्वलनशील पदार्थ तो है ही, वह संचालिका शक्ति भी है कि जिसके बल से आज हमारे कल-कारखाने चल रहे हैं, रेलें तथा अन्य वाहन दौड़ रहे हैं, वायुयान उड़ रहे हैं, घरों आदि में उजाला...
Continue reading »

Hindi Essay on “Bharatiya Samaj me Kuritiya ” , ”भारतीय समाज में  कुरीतिया” Complete Hindi Essay for Class 9, Class 10, Class 12 and Graduation and other classes.

Hindi Essays
भारतीय समाज में  कुरीतिया Bharatiya Samaj me Kuritiya  कुरीतियां या कुप्रथांए किसी भी समाज और उसके देश को कभी आगे नहीं बढऩे दिया करती। धीरे-धीरे वे एक-दूसरे को देखकर जब जीवन-समाज का अपरिहार्य अंग बन जाया करती है, तब उस देश-समाज का मालिक भगवान ही हुआ करता है। रीति-रिवाज और परंपरांए ही समय के अनुसार पुरानी और अलाभकारी होकर कुरीतियां बन जाया करती हैं। उन्हें त्यागकर ही मानव-जीवन सहज ढंग से...
Continue reading »

Hindi Essay on “Bal Majdoor ki Samasya” , ”बाल मजदूरी की समस्या” Complete Hindi Essay for Class 9, Class 10, Class 12 and Graduation and other classes.

Hindi Essays
बाल मजदूरी की समस्या  Bal Majdoor ki Samasya    बच्चा उस पनीरी या नन्हीं पौध के समान हुआ करता है, जिसको भविय के खेतों में बोकर पूर्ण पकी फसल, या फल-फूलों-पत्तों से लदे विशाल वृक्ष बनना होता है। इसी कारण आज के बच्चे को भविष्य का नागरिक और माता-पिता कहा जाता है। यह फसल, ये वृक्ष, भविष्य के ये माता-पिता, नागरिक और हमारी जातीय, देशीय, राष्ट्रीय वंश-बेला समुचित परिचालन, पोषण एंव...
Continue reading »

Hindi Essay on “Rashtriya Nirman aur Nari” , ”राष्ट्र-निर्माण और नारी” Complete Hindi Essay for Class 9, Class 10, Class 12 and Graduation and other classes.

Hindi Essays
राष्ट्र-निर्माण और नारी Rashtriya Nirman aur Nari  नारी हो या पुरुष, राष्ट्र और उससे संबंद्ध प्रत्येक जन का आपस में गहरा संबंध होता है। राष्ट्र एक व्यापक भावनात्मक सत्ता का नाम है। वह मानव-प्राणियों के अस्तित्व के कारण ही अपना सूक्ष्म या अमूर्त स्वरूपाकार ग्रहण किया करता है। राष्ट्र-जन भी उसी के कारण सुरक्षित रहा करते हैं। अत: जब हम मानव-प्राणियों की बात कहते हैं, तो पुरुष के साथ नारी का...
Continue reading »

Hindi Essay on “Bandhua Majdoor” , ”बंधुआ मजदूर ” Complete Hindi Essay for Class 9, Class 10, Class 12 and Graduation and other classes.

Hindi Essays
बंधुआ मजदूर  Bandhua Majdoor जी हां, जनाब! मजदूर और मजदूरी भी बंधुआ हुआ करते या हो सकते हैं। जमीन, जायदाद, घर, मकान और सोने-चांदी के आभूषण। यहां तक कि रसोई के बर्तन-भांडे और घरेलु सामान के बंधुआ हो जाने अथवा बंधक रख देने की बात तो हम शुरू से ही सुनते आ रहे हैं। कई बार यह सुनने-पढऩे को भी मिलता रहता है किकिसी जुआरी महोदय ने जूए में पराजित होकर...
Continue reading »