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Posts tagged "Hindi essays" (Page 192)
थोथा चना बाजे घना Thotha Chana Baje Ghana ’थोथा चना बाजे घना’ का आशय यह है कि जब चने में सार तत्व समाप्त हो जाता है तब बहुत बजने लगता है। यही स्थिति मनुष्य की है। जिस व्यक्ति में ज्ञान की जितनी कमी होती है , वह उतना ही अधिक दिखावा करता है। वह ज्यादा दिखावा करके अपनी कमी को छिपाने का प्रयास करता है। जिस प्रकार कोई व्यक्ति थोड़ी...
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May 31, 2018 evirtualguru_ajaygourHindi (Sr. Secondary), Languages2 Comments
सुनो सबकी करो मन की Suno Sabki Karo Man Ki यह संसार का बड़ा विचित्र है। इस संसार के लोग दूसरों को हर बात में सलाह देने में सदा आगे रहते हैं, मानो इन्हें सभी क्षेत्रों में दक्षता प्राप्त हो। कई बार तो सलाह देने वालों की इतनी भीड़ एकत्रित हो जाती है कि कुछ भी निर्णय कर पाना कठिन हो जाता है। इस प्रकार की स्थिति में सभी की...
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May 31, 2018 evirtualguru_ajaygourEnglish (Sr. Secondary), LanguagesNo Comment
समय किसी की प्रतीक्षा नहीं करता Samay Kisi ki Pratiksha Nahi Karta समय का पहिया सदा घुमता रहता है। उसकी गति को कोई नहीं रोक सकता। समय किसी की प्रतीक्षा नहीं करता। मनुष्य का जीवन क्षणभंगुर है। अतः जीवन क्षण को मूल्यावन समझ कर कार्य में जुटे रहना चाहिए। मानवजीवन की सफलता का रहस्य समय रूपी रत्न के योग में ही छिपा है। जो व्यक्ति अपने अमूल्य समय का लाभ...
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May 31, 2018 evirtualguru_ajaygourHindi (Sr. Secondary), Languages1 Comment
विपति कसौटी जे कसे सोई साँचे मीत Vipati Kasoti je kase soi sanche meet मित्रता एक पवित्र वस्तु है। संसार में सब कुछ मिल सकता है, परंतु सच्चा और स्वार्थहीन मित्र मिलना अत्यंत दुर्लभ है। जिस व्यक्ति को संसार मेें मित्र-रत्न मिल गया, समझो उसने अपने जीवन में एक बहुत ही बड़ी निधि पा ली। मनुष्य जब संसा में जीवन-च्रक प्रारभ करता है तो उसे सबसे अधिक कठिनाई मित्र खोजने...
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May 31, 2018 evirtualguru_ajaygourHindi (Sr. Secondary), LanguagesNo Comment
अपने लिए जिए तो क्या जिए Apne liye jiye to kya jiye निःस्वार्थ सेवा का अर्थ है- बिना किसी स्वार्थ के दूसरों की सेवा करना, इसी को परोपकार कहा जाता है। ’परोपकार’ शब्द की रचना ’पर’ ़ ’उपकार’ से हुई है। ’पर’ का अर्थ है दूसरे तथा ’उपकार’ का अर्थ है भलाई। अतः ’परोपकार’ का अर्थ है – दूसरों की भलाई। परोपकार में स्वार्थ भावना नहीं होती है। दूसरों...
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May 31, 2018 evirtualguru_ajaygourHindi (Sr. Secondary), Languages2 Comments
सर्वशिक्षा अभियान Sarv Shiksha Abhiyan शिक्षा के बिना कोई भी बनता नहीं सत्पात्र है। इसे पाने के लिए कुछ भी प्रयास करना मात्र है।। सबसे पहला कर्तव्य है, शिक्षा बढ़ाना देश में। शिक्षा के बिना ही हैं हम सभी क्लेश मंे। मनुष्य सुख-शांति के लिए जन्म से ही प्रयास करता रहता है। शिक्षा के द्वारा उसे मानसिक शक्ति प्राप्त होती रही है। समाज का शिष्ट...
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May 31, 2018 evirtualguru_ajaygourHindi (Sr. Secondary), Languages2 Comments
भ्रष्टाचार का दानव Bhrashtachar ka Danav ’भ्रष्टाचार’ शब्द भ्रष्ट आचार शब्दों के योग से बना है। ’भ्रष्ट’ का अर्थ-निकृष्ट श्रेणी की विचारधारा और ’आचार’ का अर्थ आचरण के लिए उपयेग किया गया है। इसके वशीभूत होकर मानव राष्ट्र के प्रति कर्तव्य भूलकर अनुचित रूप से अपनी जेबें गरम करता है। भ्रष्टाचार रूपी वृक्ष का रूप ही अनोखा है। इसकी जडे़ ऊपर की ओर तथा शाखाएँ नीचे की ओर बढती हैं।...
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May 21, 2018 evirtualguru_ajaygourHindi (Sr. Secondary), LanguagesNo Comment
मीडिया का सामाजिक दायित्व Media Ka Samajik Kayitva मीडिया के दो रूप हैं -प्रिंट मीडिया और इलेक्ट्रॅनिक मीडिया। प्रिंट यानी मुद्रित माध्यम आधुनिक जनसंख्या के माध्यमों में सबसे पुराना माध्यम है। भारत में पहला छापाखाना 1556 ई. में गोवा में खुला। मुद्रित माध्यमों के अंतर्गत अखबार, पत्रिकाएँ तथा पुस्तकें आती हैं। इस माध्यम की सबसे बडी़ विशेषता यह है कि इसमें स्थायित्व होता है। इसे आप कभी...
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May 21, 2018 evirtualguru_ajaygourHindi (Sr. Secondary), LanguagesNo Comment