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Archive by category "Languages" (Page 6)
दूरदर्शन की उपयोगिता Doordarshan Ki Upyogita भूमिका, सिद्धांत, प्रचलन, उपयोग, हानियां, उपसंहार दूरदर्शन आज का महत्त्वपूर्ण आविष्कार है । यह मनोरंजन का साधन है। इससे शिक्षा भी प्राप्त होती है । मनुष्य के मन में दूर की चीज़ों को देखने की बहुत प्रबल इच्छा रहती है। चित्रकला, फोटोग्राफी और छपाई के विकास से दूर की वस्तुओं, स्थानों और व्यक्तियों के चित्र सुलभ होने लगे हैं। दूरदर्शन (टेलीविज़न) दूर की घटनाओं को...
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August 12, 2026 evirtualguru_ajaygourHindi (Sr. Secondary), LanguagesNo Comment
विज्ञान वरदान या अभिशाप – विज्ञान के चमत्कार Vigyan Vardan Ya Abhishap – Vigyan ke Chamatkar भूमिका, आविष्कार, वरदान, अभिशाप, दो पक्ष, उपसंहार गत दो सौ वर्षों में विज्ञान लगातार उन्नति ही करता गया है। यद्यपि इससे बहुत समय पूर्व रामायण और महाभारत काल में भी अनेक वैज्ञानिक आविष्कारों का उल्लेख मिलता है, परंतु उनका कोई चिह्न आज उपलब्ध नहीं हो रहा। इसलिए 19वीं और बीसवीं शताब्दी से विज्ञान का...
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August 12, 2026 evirtualguru_ajaygourHindi (Sr. Secondary), LanguagesNo Comment
सदाचार Sadachar भूमिका, उत्तम मित्र, गुण महत्त्व, उपसंहार मानव जीवन का सर्वोत्तम गुण सदाचार ही है। यह सभी धर्मों का सार है । यह मनुष्य को उच्च एवं वंदनीय बनाता है। इसके अभाव में मनुष्य समाज में सम्मान नहीं प्राप्त कर सकता। किसी विद्वान् का कथन है- ” धन नष्ट हो गया तो कुछ नष्ट नहीं हुआ, स्वास्थ्य नष्ट हो गया तो कुछ नष्ट हुआ, लेकिन चरित्र नष्ट हो गया तो...
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August 12, 2026 evirtualguru_ajaygourHindi (Sr. Secondary), LanguagesNo Comment
विद्यार्थी जीवन – आदर्श विद्यार्थी Vidyarthi Jeevan – Aadarsh Vidyarthi भूमिका, महत्त्वपूर्ण अवस्था, तपस्या का जीवन, ब्रह्मचर्य, उच्च आदर्श, उपसंहार महात्मा गाँधी कहा करते थे, “शिक्षा ही जीवन है।” इसके समक्ष सभी धन फीके हैं। विद्या के बिना मनुष्य कंगाल बन जाता है, क्योंकि विद्या का ही प्रकाश जीवन को आलोकित करता है । विद्याध्ययन का समय बाल्यकाल से आरंभ होकर युवावस्था तक रहता है। यों तो मनुष्य जीवन भर कुछ-न-कुछ...
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August 12, 2026 evirtualguru_ajaygourHindi (Sr. Secondary), LanguagesNo Comment
स्वदेश प्रेम Swadesh Prem भूमिका, स्वेदश प्रेम, स्वदेश का आकर्षण, स्वदेश की उन्नति, देश भक्त, राष्ट्रीयता, उपसंहार भूमिका-स्वदेश प्रेम कितना अनुपम है ! किसी कवि ने उचित ही कहा है- “जो भरा नहीं है भावों से, बहती जिसमें रस-धार नहीं । वह हृदय नहीं है, पत्थर है, जिसमें स्वदेश का प्यार नहीं ।। जिस व्यक्ति का हृदय स्वदेश-प्रेम के भावों से लबालब भरा हुआ नहीं है तथा जिसके हृदय में स्वदेश-प्रेम...
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August 12, 2026 evirtualguru_ajaygourHindi (Sr. Secondary), LanguagesNo Comment
हमारा प्यारा भारत – मेरे सपनों का भारत Hamara Pyara Bharat – Mere Sapno Ka Bharat भूमिका, भौगोलिक स्थिति, औद्योगिक विकास, विभिन्न परियोजनाएं, दर्शनीय स्थल, महापुरुषों की धरती, उपसंहार हमारे देश का नाम भारत है। दुष्यंत और शकुंतला के पुत्र भरत के नाम पर इसका यह नाम पड़ा। इसका प्राचीन नाम आर्यावर्त भी है। मुस्लिम शासकों ने इसे हिंद, हिंदुस्तान या हिंदोस्तान का नाम दिया। अंग्रेज़ों ने इसे ‘इंडिया’ के नाम...
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August 12, 2026 evirtualguru_ajaygourHindi (Sr. Secondary), LanguagesNo Comment
घर में शौचालय (Ghar me Shauchalay) घर में शौचालय होना बहुत आवश्यक है। घर में शौचालय होने से माँ-बहनों को खुले में शौच नहीं जाना पड़ता। अगर खुले में शौच जाएँगे तो इससे अनेक तरह की संक्रामक बीमारियाँ होने की आशंका हो सकती है। घर में शौचालय से परिवार न केवल सम्मानजनक जीवन व्यतीत करेगा बल्कि स्वस्थ्य भी रहेगा। भारत सरकार पूरे देश में हर घर में शौचालय का निर्माण करा...
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October 25, 2024 evirtualguru_ajaygourHindi (Sr. Secondary), LanguagesNo Comment
मन के हारे हार हैं मन के जीते जीत (Man Ke Hare Haar Hai Man ke Jite Jeet) जीवन की विषम परिस्थितियाँ कभी-कभी हम पर इतनी हावी हो जाती है कि हम मन ही मन घुटने लगते हैं। नतीजतन हम अपनी क्षमता को खो बैठते हैं और हमारी नैसर्गिक प्रतिभा भी हमसे रूठ जाती है। अवसाद ग्रस्त होकर खुद ही हीनता से जकड़ जाते हैं। असफलता और निराशा मनुष्य को लक्ष्य...
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October 25, 2024 evirtualguru_ajaygourHindi (Sr. Secondary), LanguagesNo Comment
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