Sadachar “सदाचार” Hindi Essay, Paragraph, Speech for Class 10, 12 Examination.
सदाचार
Sadachar
भूमिका, उत्तम मित्र, गुण महत्त्व, उपसंहार
मानव जीवन का सर्वोत्तम गुण सदाचार ही है। यह सभी धर्मों का सार है । यह मनुष्य को उच्च एवं वंदनीय बनाता है। इसके अभाव में मनुष्य समाज में सम्मान नहीं प्राप्त कर सकता। किसी विद्वान् का कथन है- ” धन नष्ट हो गया तो कुछ नष्ट नहीं हुआ, स्वास्थ्य नष्ट हो गया तो कुछ नष्ट हुआ, लेकिन चरित्र नष्ट हो गया तो सब कुछ नष्ट हो गया।” सदाचार के समक्ष धन और स्वास्थ्य तुच्छ हैं। यह एक दैवी शक्ति है । वास्तव में सदाचार ही सर्वश्रेष्ठ मानव-धर्म है।
सदाचार मनुष्य का सबसे अच्छा मित्र है। सदाचारी में आत्म-विश्वास होता है । वह निर्भीक होता है । वह असफल होने पर भी साहस नहीं छोड़ता है। सदाचारी असत्य तथा बेईमानी से दूर रहता है । भावनाओं से पवित्र होता है। वह जानता है कि दूसरों को पीड़ा पहुंचाना सदाचार की राह से भटकना है। सभी दार्शनिक तथा धर्म गुरुओं ने सदाचार की महिमा का प्रतिपादन किया है।
सदाचारी में अनेक गुण विद्यमान होते हैं । वह सत्य का अनुगामी होता है । वह काम, क्रोध, लोभ तथा मोह के माया जाल में नहीं फंस सकता। सदाचारी त्यागी और संवेदनशील होता है । वह अभिमान से कोसों दूर रहता है। स्पष्टवादी होने पर भी दूसरों की भावनाओं को ठेस नहीं पहुँचाता। वह दूसरों के कष्टों का निवारण करने के लिए सदैव उद्यत रहता है।
सदाचार के अभाव में मानव तथा शत्रु में भेद स्थापित करना कठिन है। सदाचार के बल पर ही मानव सर्वोच्च प्राणी माना गया है। हमारे ऋषियों को सदाचारी होने के कारण ही इतना मान तथा सम्मान मिला है। इसी गुण के कारण वे मार्ग दर्शक बन सके। गोखले, तिलक, गाँधी आदि नेता सदाचारी होने के कारण जनता के कंठाहार बन सके। संसार सदाचारी का सम्मान करता है। लोगों के हृदय में उसके प्रति श्रद्धा होती है । उसका जीवन सुखी और शांतिमय होता है। सदाचारी व्यक्ति के सत्संग में सद्गुणों का विकास होता है। मार्ग से भटका हुआ व्यक्ति भी संमार्ग पर चलने लगता है ।
सफल एवं सार्थक जीवन के लिए सदाचारी होना आवश्यक है। उत्तम चरित्र का प्रभाव व्यापक एवं अचूक होता है । चरित्र का ह्रास होने से मानव को अनेक दुःखों और कष्टों का सामना करना पड़ता है। समाज के लोग उसे हेय दृष्टि से देखते हैं। सदाचारी का तो केवल भौतिक शरीर ही नष्ट होता है। उसकी यश ज्योति संसार में बिखरी रहती है। सदाचार व्यक्तिगत, राष्ट्रीय तथा सामाजिक उन्नति का स्रोत है । सदाचारी व्यक्तियों के चरण चिह्नों पर युग चलता है।






















