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Archive by category "Hindi (Sr. Secondary)" (Page 222)
राष्ट्रपिता महात्मा गांधी Rashtrapita Mahatma Gandhi निबंध नंबर : 01 महात्मा गांधी के नेतृत्व वाला समय गांधी युग कहलाता है। गांधी भारतवासियों को कितने प्रिय लगते थे, इसके लिए प्रमाण की नही, इन पंक्तियों के मर्म को समझने की आवश्यकता है- चल पड़े जिधर दो पग मग में, चल पडे़ कोटि पग उसी ओर, पड़ गयी जिधर भी एक दृष्टि, पड़ गये कोटि दृग उसी ओर। (दिनकर) दूसरी बात यह...
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September 24, 2018 evirtualguru_ajaygourHindi (Sr. Secondary), LanguagesNo Comment
स्वतंत्रता के बाद क्या खोया-क्या पाया Swatantrata ke baad kya khoya kya paya 15 अगस्त 1947 को हमार देष भारत स्वतंत्र हुआ। इसने दासता के बंधन को छिन्न-भिन्न कर फेक दिया। ब्रिटिष साम्राज्य की सत्ता को हमने पैरों से कुचल दिया। अपने शहीदों, बलिदानियों, राष्ट्रभक्त नेताओं और महापुरूषों पर हमें गर्व है जिसके कारण हमें आजादी मिली। 1947 से आज तक इस महायात्रा के बीच हमें क्या मिला और हमने...
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September 19, 2018 evirtualguru_ajaygourHindi (Sr. Secondary), Languages1 Comment
सूचना का अधिकार विधेयक Suchna ka Adhikar Vidheyak देष के प्रशासन में पारदर्शिता लाने के लिए न्यूनतम साझा कार्यक्रम में किए गए वायदे को पूरा करने की दिशा में एक महत्त्वपूर्ण कदम उठाते हुए यूपीए सरकार ने सूचना अधिकार विधेयक-2005 को संसद के दोनों सदनों से पास करा लिया। लोकसभा ने 11 मई को और राज्य सभा ने 12 मई 2005 को इस...
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September 19, 2018 evirtualguru_ajaygourHindi (Sr. Secondary), LanguagesNo Comment
सुरक्षा परिषद में भारत की दावेदारी Suraksha Parishad me Bharat ki Davedari संयुक्त राष्ट्र संघ की सुरक्षा परिषद विश्व शांति एवं सुरक्षा से संबंधित संयुक्त राष्ट्र के दायित्वों को पूरा करने वाली संस्था है। इस संस्था को संयुक्त राष्ट्र की कार्यकारिणी या संयुक्त राष्ट्र संघ की कुंजी भी कहा जा सकता है। इसके (सं.रा.संघ) चार्टर की मूल व्यवस्था में 5 स्थायी तथा 10 अस्थायी सदस्य थे लेकिन 17 दिसम्बर 1965...
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September 19, 2018 evirtualguru_ajaygourHindi (Sr. Secondary), LanguagesNo Comment
देश-भक्ति Desh Bhakti ‘जननी जन्मभूमिश्च स्वर्गादपि गरीयसी‘ अर्थात माता और मातृभूमि हमारे लिए स्वर्ग से भी बढ़कर है। जन्मभूमि के लिए मनुष्य के ह्नदय में इतना अधिक मोह होता है कि वह उसके हितार्थ सहज भाव से सप्तकोटि स्वर्गों का प्रलोभन त्याग देता है। जिस देश में हम जन्म लेते हैं, जिसकी गोद में हमारा पालन-पोषण होता है, जिसके अन्न-जल-वायु आदि से हमारे शरीर का संवर्धन-संरक्षण होता है तथा मरणोपरांत हम...
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September 19, 2018 evirtualguru_ajaygourHindi (Sr. Secondary), LanguagesNo Comment
राष्ट्रीयकरण Rashtriyakaran काल की परिस्थितियों के साथ मानवीय विचारों में भी परिवर्तन होता रहता है। एक युग था जब देश की शक्ति छोटे-छोटे राज्यों में विभक्त थी और जो स्वयं अपने आपके पूरक थे उनकी अपनी-अपनी पृथक शासन व्यवस्था थी। लेकिन आज हम स्वतंत्र हैं। भारत पुनः एक अटूट सूत्र में जुट चुका है, उसकी शक्ति अखण्ड है। अतः वैयक्तिक शासन या अधिकार की बात करना उसकी अखण्डता को तोड़ना...
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September 19, 2018 evirtualguru_ajaygourHindi (Sr. Secondary), LanguagesNo Comment
युवा पीढ़ी में अंसतोष के कारण और निवारण Yuva Pidhi me Asantosh ke Karan aur Nivaran युवा-शक्ति ही राष्ट्र-शक्ति है। जिस देश में यह शक्ति रचनात्मक कार्यों में लग जाए, उस देश का कायाकल्प होना तय है। लेकिन जिस देश में यह शक्ति विध्वंसकारी गतिविधियों में लग जाए, उस राष्ट्र का पतन भी निश्चित है। इसलिए हस राष्ट्र को सचेष्ट रहना चाहिए कि उसकी युवा-शक्ति विध्वंसकारी गतिविधियों में न लगकर...
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September 19, 2018 evirtualguru_ajaygourHindi (Sr. Secondary), LanguagesNo Comment
भ्रष्टाचार के कारण एवं निवारण Bhrashtachar ke Karan evm Nivaran भ्रष्टाचार केवल भारत में ही नहीं बल्कि सम्पूर्ण संसार में विद्यमान है। यह दीगर बात है कि कहीं इसका प्रसार सीमित है तो कहीं असीमित। भ्रष्टाचार का अर्थ है नीति के स्थापित प्रतिमानों से विलग होना। किन्तु एक समाजशास्त्रीय अध्ययन से उत्पन्न अवधारणा के रूप में भ्रष्टाचार का तात्पर्य व्यक्ति द्वारा किए जाने वाले किसी भी ऐसे अनुचित कार्य से है जिसे...
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September 19, 2018 evirtualguru_ajaygourHindi (Sr. Secondary), LanguagesNo Comment