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Posts tagged "Hindi essays" (Page 29)
एक बस चालक की आत्मकथा हम सब बस चालक को जानते हैं, जो हमारे लिए बस चलाता है। वह आमतौर पर चुस्त और जागरुक होता है। उसकी आँखें तीक्ष्ण होती हैं। वह ध्यान से चलाता है ताकि दुर्घटना नहीं हो। वह लोगों को उनके कर्मस्थल या नियत स्थान पर पहुँचने में मदद करता है। वह बहुत ही उपयोगी जन सेवा करता है। उसे बस समय पर चलानी होती है। लोग ट्रेन...
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April 17, 2023 evirtualguru_ajaygourHindi (Sr. Secondary), LanguagesNo Comment
एक फेरी वाले की आत्मकथा फेरी वाला एक परिचित व्यक्ति है। वह चलती फिरती दुकान है। वह प्रतिदिन में इस्तेमाल होने वाली चीज़ें घूम कर बेचता है। वह उन्हें टोकरी में डाल कर अपने सिर पर रखकर या एक रेड़ी में रख कर हाथों से खींचता है। वह एक स्थान से दूसरे स्थान पर जाते हुए आवाज़े लगाता है। फेरी वाले अलग-अलग तरह के होते हैं। कुछ ऐसे हैं जो कस्बे-से-कस्बे...
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April 17, 2023 evirtualguru_ajaygourHindi (Sr. Secondary), LanguagesNo Comment
एक कुली की आत्मकथा रेलवे स्टेशन पर हमें कुली या बोझा ढोने वाले लाल कमीज़ और सफेद पैन्ट या धोती में मिलते हैं। कुली को हम सब अच्छी तरह पहचानते हैं। वह हमारा सामान उस गाड़ी में पहुँचाता है जिस में हमने चढ़ना होता है। वह इस काम के पैसे पाता है। उसका मेहताना निश्चित होता है। कई कुली यात्रियों का सामान स्टेशन से बाहर लेकर जाते हैं। वह बहुत ही...
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April 17, 2023 evirtualguru_ajaygourHindi (Sr. Secondary), LanguagesNo Comment
मेरे स्कूल का चपरासी या स्कूल का चपरासी हमारे स्कूल में केवल एक ही चपरासी है। उसका नाम प्रेम कुमार है। वह पैन्तीस साल का जवान आदमी है। वह लम्बा और बलवान है। वह जागरुक है। वह हमेशा मुस्कराता रहता है। वह साफ वस्त्र पहनता है। विद्यालय में सब उसे जानते हैं। वह कर्त्तव्य परायण है। वह मुख्याध्यापक के कक्ष के बाहर स्टूल पर बैठता है। वह हर कार्य जो उसे...
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April 17, 2023 evirtualguru_ajaygourHindi (Sr. Secondary), LanguagesNo Comment
अन्तर्जातीय विवाह Antarjatiya Vivah अन्तर्जातीय विवाह को किसी न किसी रूप में प्राचीन काल से ही देखा जा सकता है। गन्धर्व विवाह तथा मुगलों के समय में हिन्दू-मुस्लिम विवाह, राजपूत राजाओं तथा मुस्लिम राजाओं के घरानों में एक प्रथा के रूप में था। वह तो मानता ही पड़ेगा कि विवाह अपने आप में एक सामाजिक संसी है। जनजाति से लेकर आधुनिक समाज के बीच समाज की संस्था तथा स्वरूप भिन्न रहे...
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March 3, 2023 evirtualguru_ajaygourHindi (Sr. Secondary), LanguagesNo Comment
भारतीय संस्कृति : अनेकता में एकता Bharatiya Sanskriti-Anekta mein Ekta संस्कृति का अभिप्राय आमतौर पर खान-पान, पहनावा, बोलचाल आदि समझा जाता है। जब किसी त्योहार, मेला या शादी ब्याह में लगे देशी वेशभूषा धारण करते हैं तो उसे संस्कृति का प्रतीक माना जाता है। संस्कृति वह चीज है जो संस्कार करती है। इसकी व्याख्या से स्पष्ट होता है कि मनुष्य को पशु की श्रेणी से ऊपर उठाना ही संस्कार करना है।...
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March 3, 2023 evirtualguru_ajaygourHindi (Sr. Secondary), Languages1 Comment
भारत में समान सिविल संहिता Bharat mein Saman Civil Sanhita संविधान के अनुच्छेद 14 से 18 तक में समानता के मूल अधिकार के लिए प्रावधान किया गया है। इस अनुच्छेदों में यह भावना निहित है कि राज्य किसी शक्ति के साथ धर्म, भूलवंश लिंग, जाति तथा निवास स्थान के आधार पर भेद नहीं करेगा। भारत में निवास करने वाले धार्मिक तथा भाषायी अल्पसंख्यकों को भी अपने धर्म तथा भाषा एवं लिपि...
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March 3, 2023 evirtualguru_ajaygourHindi (Sr. Secondary), LanguagesNo Comment
धर्म निरपेक्षता और भारत Dhrmnirpekshta aur Bharat धर्म और धर्म-निरपेक्षता का सामान्य अर्थ- ‘धारमति इतिध्सः धर्मः’ कहकर धर्म के स्वरूप की व्याख्या की गई है। तात्पर्य यह है कि धारण करने की शक्ति धर्म की मुख्य विशेषता है। धारण की शक्ति का तात्पर्य है, रक्षा अथवा कर्तव्य पालन। इस प्रकार धर्म कर्तव्य पालन अथवा रक्षा का पर्यायवाची कहना है। धर्म हमकों एक सूत्र में बाँधता है। वह धर्म निश्चय ही अवरोधों...
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March 3, 2023 evirtualguru_ajaygourHindi (Sr. Secondary), LanguagesNo Comment
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