Home » Posts tagged "Hindi essays" (Page 188)

Hindi Essay, Paragraph, Speech on “Garmi ki Ek Dopahar”, “गर्मी की एक दोपहर” Complete Hindi Essay for Class 10, Class 12 and Graduation Classes.

गर्मी की एक दोपहर Garmi ki Ek Dopahar                   जून का महीना था। गर्मी चरम सीमा पर थी। ऐसी ही गर्मी की एक झुलसा देने वाली दोपहर थी। सूरज बुरी तरह तमतमा रहा था। धरती तवे की तरह जल रही थी। लू चल रही थी। घर से बाहर निकलना कठिन प्रतीत होता था। गर्मी सभी को झुलसा रही थी। मनुष्यों के साथ-साथ पुशु-पक्षी तथा पेड़-पौंधें भी गर्मी की मार झेलने...
Continue reading »

Hindi Essay, Paragraph, Speech on “Badalte Samaj me Mahilaon ki Stithi”, “बदलते समाज में महिलाओं की स्थिति” Complete Hindi Essay for Class 10, Class 12 and Graduation Classes.

बदलते समाज में महिलाओं की स्थिति Badalte Samaj me Mahilaon ki Stithi भारतीय समाज में प्रारंभ से ही नारी का महत्त्वपूर्ण स्थान रहा है। यह देवी तथा पूज्या है। मनु के शब्दों में ‘‘य़त्र नार्यस्तु पूज्यन्ते रमन्ते तत्र देवता’’  अर्थात् जहाँ नारी का सम्मान होता है, वहाँ देवता निवास करते हैं। नारी तथा पुरूष एक-दूसरे के पूरक हैं। एक के अभाव में दूसरे का व्यक्तित्व अपूर्ण है। नारी राष्ट्र की निर्माता...
Continue reading »

Hindi Essay, Paragraph, Speech on “Ek Ghar Bane Nyara”, “एक घर बने न्यारा” Complete Hindi Essay for Class 10, Class 12 and Graduation Classes.

एक घर बने न्यारा Ek Ghar Bane Nyara                 आज के युग में प्रत्येक व्यक्ति अपना एक घर बनाने का इच्छुक रहता है। वह एक न्यारा घर बनाना चाहता है। रोटी, कपड़ा और मकान मनुष्य की मूलभूत आवश्यकताएँ हैं। गरीब से गरीब व्यक्ति भी अपना घर बनाने को उत्सुक रहता है। यह ठीक है कि प्रत्येक व्यक्ति की अपनी-अपनी आर्थिक सीमाएँ होती हैं। सभी अपनी सीमा को ध्यान में रखकर अपने...
Continue reading »

Hindi Essay, Paragraph, Speech on “Desh ka Nirman Aur Yuva Pidhi”, “देश का निर्माण और युवा पीढ़ी” Complete Hindi Essay for Class 10, Class 12 and Graduation Classes.

देश का निर्माण और युवा पीढ़ी Desh ka Nirman Aur Yuva Pidhi                 जब समाज निर्माण के संदर्भ में युवा-पीढ़ी की भूमिा की चर्चा की जाती है तो स्वभावतः अनेक प्रश्न उत्पन्न होने लगते हैं। इनमें महत्वपूर्ण प्रश्न यह है कि युवा पीढ़ी में किन व्यक्तियों को रखा जाए। आज सामान्य रूप  से युवा-पीढ़ी के अन्तर्गत विद्यालय, महाविद्यालय तथा विश्वविद्यालय में शिक्षा प्राप्त करने वाले युवक-युवतियों  को लिया जाता है, किन्तु...
Continue reading »

Hindi Essay, Paragraph, Speech on “Vevahik Jeevan me Bdhta Tanav”, “वैवाहिक जीवन में बढ़ता तनाव” Complete Hindi Essay for Class 10, Class 12 and Graduation Classes.

वैवाहिक जीवन में बढ़ता तनाव Vevahik Jeevan me Bdhta Tanav                 वर्तमान समय में वैवाहिक जीवन उतना सुखी नहीं रह गया है जितना पहले हुआ करता था। अब वैवाहिक जीवन में निरंतर तनाव बढ़ता जा रहा है। पति-पत्नी के संबंधों की मधुरता निरंतर घटती-मिटती जा रही है। यह तनाव क्यों बढ़ रहा है, इसके कारणों पर हमें विचार करना होगा।                 आज का जीवन उतना सरल नहीं रह गया है। हमारी...
Continue reading »

Hindi Essay, Paragraph, Speech on “Doordarhsan ke Karyakramo ka Prabhav”, “दूरदर्शन के कार्यकर्मों का प्रभाव” Complete Hindi Essay for Class 10, Class 12 and Graduation Classes.

दूरदर्शन के कार्यकर्मों का प्रभाव Doordarhsan ke Karyakramo ka Prabhav                 दूरदर्शन के कार्यक्रम का प्रसारण केबल के माध्यम से हो रहा है। केबल संस्कृति के प्रभाव के फलस्वरूप महानगरों में सुंदर दिखने की होड़ में युवा ही नहीं बल्कि अधेड़ स्त्रियाँ भी युवितियों के समान ‘प्रदर्शन की वस्तु’ बनने में विश्वास करने लगी हैं। महानगरांे के पंचतारा होटलों में आए दिन डांस पार्टियाँ आयोजित होती हैं जिनमें धनी तथा उच्च...
Continue reading »

Hindi Essay, Paragraph, Speech on “Dhan-Sangrah ke Labh”, “धन-संग्रह के लाभ” Complete Hindi Essay for Class 10, Class 12 and Graduation Classes.

धन-संग्रह के लाभ Dhan-Sangrah ke Labh                 मनुष्य एक सामाजिक प्राणी है। उसे अपने कार्यांे के लिए धन की आवश्यकता होती हे। कहने को तो सब कह देते हैं कि धन तुच्छ चीज़ है, धन का कोई सुख नहीं किंतु वास्तव में धन का सुख ही सच्चा सुख है। पैसे वाले का ही आदर होता है। निर्धन को कोई नहीं पूछता। धनहीन पूज्य व्यक्ति भी तुच्छ समझे जाते हैं। साधारण व्यक्ति...
Continue reading »

Hindi Essay, Paragraph, Speech on “Fashion”, “फैशन ” Complete Hindi Essay for Class 10, Class 12 and Graduation Classes.

फैशन  Fashion परिवर्तित समय के अनुरूप स्वयं को ढालना ही फैशन है। वैसे फैशन शब्द का प्रयोग वेशभूषा के रूप में लिया जाता है। वेशभूषा के नित नए रूप देखने को मिलते हैं। एक ही प्रकार के कपड़े ज्यादा देर तक प्रचलन में नहीं रहते। इससे हम ऊब जाते हैं। फैशन के कारण ही तरोताजा बने रहते हैं। फैशन को सदा गलत अर्थों मेें नहीं लिया जाना चाहिए। स्वयं को आधुनिक...
Continue reading »