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Hindi Essay, Paragraph, Speech on “Badh aur uske Prabhav”, “बाढ़ और उसके प्रभाव” Complete Hindi Essay for Class 10, Class 12 and Graduation Classes.

बाढ़ और उसके प्रभाव Badh aur uske Prabhav                 अगस्त का महीना था। आकाश में बादल छाए हुए थे। राजधानी में तेज वर्षा और कई दिनों की झड़ी के कारण सड़कें पानी में डूब गई थीं और यातायात ठप्प हो गया था। दिल्ली के गाँवों में इससे भी भंयकर वर्षा हुई जिसके कारण नजफगढ़ जाना चढ़ आया और निकटवर्ती गाँवों में पानी का खतरा बढ़ गया। कुछ अदूरदर्शी किसानों ने जब...
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Hindi Essay, Paragraph, Speech on “मजहब नहीं सिखाता आपस में बैर रखना” Complete Hindi Essay for Class 10, Class 12 and Graduation Classes.

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मजहब नहीं सिखाता आपस में बैर रखना Majhab nahi Sikhata aapas me ber Rakhna निबंध नंबर:- 01                  उपर्युक्त सूक्ति प्रसिद्ध शायर इकबाल की है। उन्होंने उपनी एक देश प्रेम की कविता में लिखा है- ‘‘मजहब नहीं सिखाता आपस में बैर रखना, हिंदी हैं हम , वतन है हिन्दोस्तां हमारा।’’ इन शब्दों में ऐसा जादू था कि प्रत्येक मजहब के लोग स्वयं को भातरीय मानते हुए भारत को स्वतंत्र कराने के...
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Hindi Essay, Paragraph, Speech on “Desh Bhakti”, “देश-भक्ति ” Complete Hindi Essay for Class 10, Class 12 and Graduation Classes.

देश-भक्ति  Desh Bhakti अथवा स्वदेश प्रेम Swadesh Prem   ‘‘वह हृदय नहीं है पत्थर है, जिसमें स्वदेश का प्यार नहीं’’ ‘‘देशप्रेम वह पुण्य क्षेत्र है, अमल असीम त्याग से विलसित। जिसकी दिव्य रश्मियाँ पाकर, मनुष्यता होती हैं विकसित।।’’                 देश-भक्ति पवित्रसलिला भागीरथी के समान है जिसमें स्नान करने से शरीर ही नहीं अपतिु मनुष्य का मन और अन्तरात्मा भी पवित्र हो जाती हैं स्वदेश की रक्षा और उसकी उन्नति के लिये...
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Hindi Essay, Paragraph, Speech on “Berojgari ki Samasya”, “बेरोजगारी की समस्या” Complete Hindi Essay for Class 10, Class 12 and Graduation Classes.

बेरोजगारी की समस्या Berojgari ki Samasya                 आधुनिक युग में विज्ञान की प्रगति ने मानव-जीवन को प्रत्येक क्षेत्र में सुखद, समृद्ध तथा समुन्नत बनाया है। नित नयी वैज्ञानिक खोजों तथा आविष्कारों ने महान उपलब्धियाँ अर्जित की हैं। परन्तु उस विज्ञान ने कुछ ऐसी समस्याएँ भी उत्पन्न कर दी हैं जो समस्त विश्व के सामने सुरसा के मुँह की भाँति बढ़ती जा रही है। इन समस्याओं में प्रमुख हैं- महँगाई, बढ़ती जनसंख्या...
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Hindi Essay, Paragraph, Speech on “Chatra Asantosh-Karan aur Samadhan”, “छात्र असंतोष- कारण और समाधान” Complete Hindi Essay for Class 10, Class 12 and Graduation Classes.

छात्र असंतोष- कारण और समाधान Chatra Asantosh-Karan aur Samadhan                 शिक्षा प्राप्ति के उद्देयस से विद्यालय, महाविद्यालय और विश्वविद्यालय में प्रवेश लेने वालों को छात्र या छात्रा की संज्ञा दी जाती है। ये शिक्षालयों में विद्यार्जन के साथ-साथ जीविकोपार्जन में सहायक ज्ञान भी प्राप्त करना चाहते हैं। विद्या और जीविका को पाने के उद्देश्य से उत्साहपूर्वक आने वाले इन छात्रों को गम्भीर होकर पढ़ाई-लिखाई में लग जाना चाहिए किंतु बहुत बार...
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Hindi Essay, Paragraph, Speech on “Aadarsh Vidyarthi”, “आदर्श विद्यार्थी” Complete Hindi Essay for Class 10, Class 12 and Graduation Classes.

आदर्श विद्यार्थी Aadarsh Vidyarthi                 विद्या प्राप्त करने वाला विद्यार्थी कहलाता है। आदर्श विद्यार्थी वह है जो स्वभाव से ही विद्यानुरागी और विद्या व्यसनी हो। पढ़ना उसका शौक हो और ज्ञानार्जन उसका लक्ष्य।                 इस शब्द से मन की आँखों के सामने एक ऐसे व्यक्ति का चित्र उभरता है जो विनम्र, सुशील, परिश्रमी, सत्यवादी और आज्ञाकारी हो। जो समय पर विद्यालय जाता हो, वहाँ मन लगाकर पढ़ता हो, पाठशाला से घर...
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Hindi Essay, Paragraph, Speech on “Aaj ke Vidyarthi ke Samne Chunotiyan”, “आज के विद्यार्थी के सामने चुनौतियाँ” Complete Hindi Essay for Class 10, Class 12 and Graduation Classes.

आज के विद्यार्थी के सामने चुनौतियाँ Aaj ke Vidyarthi ke Samne Chunotiyan                 आज का विद्यार्थी कल का नेता है। वहीं राष्ट्र का निर्माता है। वह देश की आशा का केन्द्र है। विद्यार्थी जीवन में वह जो सीखता है, वही बातें उसके भावी जीवन को नियंत्रण करती है। इस दृष्टि से उसे विद्यार्थी जीवन में अनुशासन का पालन करना अनिवार्य हो जाता है।                 ‘विद्यार्थी’ शब्द विद्या $ अर्थी के योग...
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Hindi Essay, Paragraph, Speech on “Bhagya Aur Purusharth”, “भाग्य और पुरूषार्थ” Complete Hindi Essay for Class 10, Class 12 and Graduation Classes.

भाग्य और पुरूषार्थ Bhagya Aur Purusharth                   इस संसार में कुछ व्यक्ति भाग्यवादी होते हैं और कुछ केवल अपने पुरूषार्थ पर भरोसा रखते हैं। प्रायः ऐसा देखा जाता है कि भाग्यवादी व्यक्ति ईश्वरीय इच्छा को सर्वोपरि मानते हैं और अपने प्रयत्नों को क्षीण मान बैठते हैं। ये विधाता का ही दूसरा नाम भाग्य को मान लेते हैं। भाग्यवादी कभी-कभी अकर्मण्यता की स्थिति में भी आ जाते हैं। उनका कथन होता...
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