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Hindi Essay, Paragraph, Speech on “Vigyan ke Chamatkar”, ”विज्ञान के चमत्कार” Complete Hindi Anuched for Class 8, 9, 10, Class 12 and Graduation Classes

विज्ञान के चमत्कार

Vigyan ke Chamatkar 

निबंध नंबर :-01

विज्ञान की उन्नति हमें नित्य नए उपकरण देकर हमारे जीवन में सुविधाएँ जुटाने में सतत संलग्न हैं। आज से पचास-साठ वर्ष पूर्व जो हमारा कष्टसाध्य जीवन था, विज्ञान ने इन वर्षों में हमें उससे मुक्ति दिलायी है।

विद्युत के आविष्कार ने विश्व का मानचित्र ही बदल डाला। अंधेरे जगत में उजाला छा गया। रात भी दिन में परिवर्तित हो गई। आज हमें जो विद्युत प्राप्त है उससे जब चाहें बटन दबाते ही प्रकाश प्राप्त कर सकते हैं। विद्युत का हम अनेकों प्रकार से उपयोग कर रहे है। प्रकाश के अतिरिक्त विद्युत शक्ति का भी काम देती हैं। अनेकों कल-कारखाने विद्यत की शक्ति से चालित होकर हमारे सुख सुविधा की वस्तुओं का ढेर लगा दे रहे हैं। आज कोई भी क्षेत्र ऐसा नहीं है जहां विद्युत से काम न लिया जा रहा हो।

विज्ञान की उन्नति ने हमें एक से एक वेग से चलने वाली सवारियां दे दी हैं। रेल मोटर वायुयान विज्ञान ने ही प्रदान किए हैं। आज हम जो फासला महीनों में तय कर सकते थे उसे कुछ घण्टों में कर ले रहे हैं। हैलीकोप्टर की सहायता से हम दुर्गम स्थानों में भी पहुँच सक रहे है। प्राकृतिक प्रकोप- जैसे बाढ या भूकम्प-आने पर जनता के यातायात के साधन छिन्न भिन्न हो जाते है। प्रभावित लोगों तक आहार आदि पहुँचाना सम्भव नहीं होता। ऐसी दशा में बाढ में फसे लोगों को भोजन पानी हैलीकोप्टरों द्वारा पहुँचाया जा सकता है। अति संकट में घिरे हुओं को रस्सी द्वारा उस स्थान से हैलीकेप्टर के अन्दर खींच लिया जाता हैं।

घरेलू काम काज में हमारा हाथ बटाने के नए नए यंत्र विज्ञान ने हमें दिए है। बिना धुएं के गैस से जलने वाले चूल्हों के प्रयोग ने आंखें फोड़ने वाले धुएं से बचा लिया है। बरतन काले होने से बच जाते हैं। कपड़ा धोने के लिए मशीन के आजाने से रगड़ने का श्रम बच गया है। मिक्सी के आजाने से कूटना पीसना सहज हो गया है। मानव के श्रम में न जाने कितनी बचत हो गई है।

मनोरंजन का क्षेत्र भी विज्ञान का बहुत ऋणी है। रेडियो, टेलीविजन से जब हम चाहें तब अपना मनोरंजन कर सकते है। विश्व के किसी भी कोने में हुई घटना का विवरण उस दृश्य को देखते हुए उसी समय प्राप्त कर सकते हैं। घर में बैठ कर रेडियों पर क्रिकेट की कामेन्ट्री सुन सकते है, तो दूरदर्शन पर उसे प्रत्यक्ष देखते हुए भी उसका आनंद ले सकते हैं। जिस सिनेमा के लिए टिकटों की खरीद कष्ट साध्य होती थी उनको देखने के लिए अब सिनेमा घरों को जाने की आवश्यकता नहीं। घर बैठे टेलीविजनों पर चित्र दिखलाए जाने लगे हैं।

टेलीफोन ने तो विश्व को एक परिवार ही बना दिया है। अपने पा में ही बैठ कर हम भारत वर्ष के किसी भी नगर या गांव में रहनेवालों से बातचीत इस प्रकार कर सकते है जैसे वह सामने ही बैठा हो।

चिकित्सा के क्षेत्र में भी विज्ञान ने बहुत कुछ दे दिया हैं। एक्सरे दाग हम शरीर के अन्दर के विकारों को प्रत्यक्ष देख सकते हैं। अनेक नवीन यन्त्रो की सहायता से उपचार करना आसान हो गया है। विज्ञान की उन्नति ने ही हमें असाध्य आपरेशन करने की क्षमता प्रदान की है।

विज्ञान तो हमें शक्ति प्रदान करता है। अब यह हमारे हाथ में है कि उसका उपयोग हम मानवता की भलाई के लिए करें या उसके विनाश के लिए। विज्ञान ने हमे युद्ध में प्रयोग होनेवाले घातक अस्त्र शस्त्र प्रदान किए हैं। उन शस्त्रों को एक स्थान से दूसरे स्थान पर सुरक्षित प्रहार करने के लिये मानव रहित यान भी प्रदान किए हैं। अमेरिका ने जापान के विरुद्ध अणु बाम्ब का प्रयोग कर अपार धन-जन की हानि पहुँचाई। भारत भी अणु शक्ति का उपयोग कर रहा है। आणविक शक्ति के उपयोग से भारत में विद्युत उत्पादन हो रहा है। यहाँ इस शक्ति का उपयोग मानवता के कल्याण के लिए किया जा रहा है।

वास्तव में विज्ञान के चमत्कार अदभुत है। आज का युग वैज्ञानिक युग है। विज्ञान मानव के लिए वरदान सिद्ध हुआ है। यह मानव पर निर्भर है कि उसका उपयोग विश्व के विकास के लिए करे या उसके विनाश के लिए।

निबंध नंबर :-02

विज्ञान के चमत्कार

Vigyan ke Chamatkar

 

आवश्यकता आविष्कार की जननी है। जैसे-जैसे मानव सभ्यता का विकास होता गया, वैसे-वैसे मनुष्य की आवश्यकताएं बढ़ती गईं। वह अपनी वर्तमान परिस्थिति से असन्तुष्ट था। अत: नए सुख के लिए वह निरन्तर प्रयत्न करता रहा। अपनी अतप्त कामनाओं की पूर्ति के लिए कौतहल और जिज्ञासा की आदत ने उसे नए-नए आविष्कारों की ओर प्रेरित किया। एक युग वह था जब मानव प्रकृति से डर कर उसकी पूजा, अर्चना किया करता था। आज विज्ञान का युग है, विज्ञान के नए-नए आविष्कारों के कारण आज प्रकृति मानव की क्रीत दासी बनी हुई है। एक ओर तो विज्ञान के नए-नए चमत्कारों से विश्व समाप्त होने के कगार पर खड़ा है। जबकि दूसरी ओर विज्ञान एक वरदान सिद्ध हो रहा है जिसके कारण वह संसार को सुखी बनाने में निरन्तर प्रयत्नशील है।

विज्ञान ने मानव जीवन में क्रांतिकारी परिवर्तन किए हैं। भाप, बिजली, अणुशक्ति को वश में करके मनुष्य ने मानव समाज को वैभव की चरम सीमा तक पहुंचा दिया है। तीव्रगामी वाहन, समुद्र के वक्ष स्थल को रौंदने वाले जहाज़, असीम आकाश में वाय वेग से उड़ने वाले विमान, नक्षत्र लोक तक पहुंचने वाले रॉकेट प्रकृति पर मानव की विजय के उज्ज्वल उदाहरण हैं। तार, टेलीफोन, मोबाईल फोन, पेजर, रेडियो, टेलीविजन, सिनेमा, इन्टरनेट आदि ने हमारे जीवन में ऐसी सुविधाएँ प्रदान कर दी हैं जिनकी कल्पना भी पुराने लोगों द्वारा नहीं की जा सकती थी।

प्राचीन समय में मनुष्य को एक से दूसरे स्थान पर जाने में अनेक प्रकार की कठिनाईयों का सामना करना पड़ता था। उसे अपनी यात्रा पूरा करने में महीनों लग जाते थे। वह पैदल, घोड़ा-गाड़ी, बैल-गाड़ी आदि द्वारा अपने अपने लक्ष्य पर पहुंचने की कोशिश करते थे। परन्तु आज वह साइकल, स्कूटर, रेलगाड़ी, मोटरगाड़ी और हवाई जहाज़ द्वारा महीनों की यात्रा एक ही दिन में और घंटों की यात्रा कुछ ही मिन्टों में तय करके अपने गन्तव्य पर पहुंच जाता है। तेज़ चलने वाले वाहन अकाल, बाढ़ आदि दैवी आपदाओं, तथा व्यापार और व्यवसाय में भी सहायक सिद्ध होते हैं।

पहले जो सन्देश मित्रों या सगे-सम्बन्धियों को भेजे जाते थे उनके उत्तर के लिए हमें महीनों इंतजार करना पड़ता था। लेकिन आज वही सन्देश हम एस.एम.एस द्वारा भेज सकते हैं और उसका जवाब भी कुछ ही क्षणों में प्राप्त कर सकते हैं। इसी प्रकार टेलीफोन द्वारा भी निकट या विदेश में बैठे मित्र या सगे-सम्बन्धियों से बात कर सकते हैं। मनोविनोद और मनोरंजन के साधनों को भी विज्ञान ने बहुत ही उन्नत बना दिया है। चलचित्र, रेडियो, टेलीविज़न, वीडियो इंटरनेट आदि इसके प्रत्यक्ष उदाहरण हैं।

शिक्षा के क्षेत्र में भी विज्ञान ने अभूतपूर्व एवं प्रशंसनीय कार्य किया है। अमेरिका एवं दूसरे विकसित देशों में तो शिक्षा भी टेलीविज़न अथवा इंटरनेट से कम्प्यूटर द्वारा दी जाने लगी है। शिक्षा के क्षेत्र में कम्प्यूटर प्रणाली का प्रयोग भी दिन प्रतिदिन बढ़ता ही जा रहा है। अब तो भारत में भी रेडियो स्टेशनों तथा दूरदर्शन केंद्रों द्वारा शिक्षा सम्बन्धी कार्यक्रम प्रसारित किए जा रहे हैं।

हमारे दैनिक व्यवहार में विज्ञान विशेष रूप से सहायता करता हैं। घड़ियां हमारे दैनिक व्यवहार में विज्ञान विशेष रूप से सहायता करता हैं। घडिया विज्ञान की ही देन है। कलम की जगह पैन का आविष्कार हुआ, जो अपने आप में एक महत्वपूर्ण आविष्कार है। आँखों के चश्में कितने लाभकारी हैं यह तो वह व्यक्ति ही बता सकता है जिसकी आँखों की ज्योति कमज़ोर हो चुकी हो। इसी प्रकार स्त्रियों के अनेक प्रकार के सौंदर्य प्रसाधन, सजावट के अनेकों उपकरण, बिजली का प्रकाश, बिजली के पंखे तथा कलर, एयर कंडीश्नर, शीतकाल में बर्फ के समान ठंडे कमरे को भी गर्म कर देने वाले हीटर, गैस के चूल्हे, कुछ ही मिन्टों में दाल-सब्जी बना देने वाले प्रेशर कुकर, यह सब मानव के लिए अमूल्य भेटें हैं जिससे उसका जीवन अधिक सुखमय हो गया है।

रोगों के इलाज हेतु भी विज्ञान ने अनेक चमत्कार किए हैं तथा अनुसंधान जारी है। विज्ञान ने ऐसे उपकरणों का आविष्कार किया हैं जिन्हें देखकर मनुष्य दांतों तले उंगली दबा लेता है ; जैसे एक्स-रे, स्कैन इत्यादि। आज डाक्टरों के पास ऐसे टीके हैं जिन से मनुष्य का रोग कुछ ही मिनटों में ठीक हो जाता है। इसी प्रकार अब अनेक रोगों का इलाज वैज्ञानिकों के पास है जैसे-दमा, चर्मरोग, अस्थि रोग, टी.बी., हृदय रोग आदि। इसी प्रकार प्लेग, हैज़ा, चेचक आदि के रोगियों को इन्जैक्शन लगाकर करोड़ों व्यक्तियों की अकाल मृत्यु से रक्षा सम्भव हो सकी है। जिनके दांत उखड़ चुके हैं, वे भी दुबारा दांत लगवा कर चने तक चबा सकते हैं। जिनकी टांगे नहीं हैं वे भी नई कृत्रिम टांगे लगवा कर पार्क में घूम कर सैर का आनन्द ले सकते हैं। विज्ञान ने ‘परखनली-शिशु’ के रूप में अद्वितीय सफलता प्राप्त की है। 25 जुलाई 1979 को इंग्लैंड के वैज्ञानिकों ने जैसे ही यह चमत्कार कर दिखाया वैसे ही 3 अक्तूबर 1979 को भारतीय वैज्ञानिकों ने भी कोलकाता में ‘परखनली-शिशु’ को जन्म प्रदान किया।

यद्ध-क्षेत्र में विज्ञान ने क्या किया, यह बात किसी से छिपी नहीं है। धनुष, बाणों एवं तलवारों की बात तो बहुत पुरानी हो चुकी है। अब तो बन्दूक, मशीनगन, स्टेनगन, तथा टैंकों की धड़-धड़ करती हुई भयानक आवाज़ हृदय को हिला देती है और मानव जीवन की लीला कुछ ही मिन्टों में समाप्त करने में पर्याप्त चमत्कार दिखा चुकी है।

कृषि के क्षेत्र में भी विज्ञान ने अमूल्य सेवायें मनुष्य को प्रदान की है। जो किसान पहले हल चलाता था, अब ट्रैक्टर से खेती करता है। अनाज के अधिक सदन के क्षेत्र में भी अनेक प्रकार की खादें विज्ञान की ही देन है। अनाज के नएनए यंत्रों ने तो मानो कृषि के क्षेत्र में अभूतपूर्व हरित क्रांति ही ला दी है।

अन्तरिक्ष के क्षेत्र में भी विज्ञान ने महत्वपूर्ण जानकारियां मनुष्य को दी हैं। विज्ञान के बल पर ही आज मनुष्य चन्द्रमा की धरती को छू सकता है तथा मंगल, शनि आदि गहों के बारे में पर्याप्त जानकारी प्राप्त कर चका है। विज्ञान द्वारा ही उपग्रहों का निर्माण किया गया जिससे उपसंचार की प्रणाली द्वारा सारे संसार को हैरानी में डाल दिया है। भारत ने भी आर्यभट्ट, रोहिनी, भास्कर प्रथम व द्वितीय, इन्सैट आदि उपग्रह छोड़ कर देश को वैज्ञानिक प्रगति की चरम सीमा पर पहुंचा दिया है।

विज्ञान आज अनेक प्रकार से समाज-कल्याण के कार्य कर रहा है। परन्तु कुछ लोग कहते हैं कि विज्ञान के नए-नए आविष्कारों के कारण आज सारे विश्व में त्राहि-त्राहि मची हुई है। मैं समझता हुई इसमें दोष विज्ञान का नहीं विज्ञान को प्रयोग करने वालों का है। जैसे चाकू से फल-सब्जी आदि भी काट सकते हैं और उसी से किसी का कान या नाक भी। अंग्रेज़ी में कहावत है-Nothing is good or bad but thinking makes it so. अर्थात् कोई भी चीज़ अच्छी या बुरी नहीं है परन्तु वह हमें वैसी ही लगती है जैसा कि हम उसके बारे में सोचते हैं। अतः हमें अपने स्वार्थपूर्ण एवं निराश की ओर ले जाने वाली प्रवृत्तियों का त्याग करके विज्ञान के चमत्कारों का सही अर्थों में स्वागत करना चाहिए जिससे हमारा देश निरन्तर उन्नति करता हुआ, अन्य उन्नत राष्ट्रों की भांति गौरव से अपना मस्तक ऊंचा करके अपने आप को गौरवान्वित महसूस कर सकें।

 

निबंध नंबर :-03

विज्ञान के चमत्कार

Vigyaan Ke Chamatkar

वैज्ञानिक अविष्कारों के कारण आज का युग विज्ञान का युग माना जाता है। विज्ञान एक ऐसी शक्ति है जिसने प्रतिदिन नए आविष्कार करके मानव जीवन को सरल और आरामदायक बनाने के लिए उपकरण प्रदान किए हैं। बटन दबाते ही विभिन्न वैज्ञानिक उपकरण आज्ञाकारी सेवक की भाँति हमारी सेवा में तत्पर रहते हैं। जिनके कारण मानव जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में अद्भुत क्रांति आ गई है। इसलिए आज के युग को चमत्कारों का युग कहा जाता है।

विद्युत के अविष्कार ने तो मानव को अनेक सखों से भर दिया है। सबह उठने से लेकर रात सोने तक मानव जिस प्रकार के उपकरणों-साधनों का उपयोग करता है वे सभी आधुनिक विज्ञान की ही देन है आज मानव को गर्मी से बचने के लिए पंखे, एयर कंडीशनर, रेडियों, चलचित्र टेलिविजन, बल्ब, रसोई के उपकरण आदि विज्ञान की देन है विज्ञान के चमत्कारों ने आज हमारी आस्थाओं और विश्वासोतक को बदलकर रख दिया।

आज मानव पृथ्वी के एक छोर से दूसरे छोर तक सरलता से पहुँच सकता है। एक स्थान से दूसरे स्थान की दूरी कुछ घण्टों की रह गई है। जैसे हवाई जहाज, बस, आदि आज विज्ञान ने आकाश, पाताल, पृथ्वी, अंतरिक्ष आदि के अनेक गूढ़ रहस्यों को सुलझा दिया है।

कभी जिन रोगों के इलाज की कल्पना तक कर पाना संभव नहीं था और जिन्हें मौत का सीधा परवाना माना जाता था आज के विज्ञान ने उनका नाम तक मिटा दिया है। वैज्ञानिक उपकरणों की सहायता से मानव हिमालय के उच्च शिखर पर विजय-ध्वज फहरा आया है। और चन्द्रलोक तक की भूमि पर चरण सिंह अंकित कर आया। अन्य ग्रहों पर भी जाने की तैयारी कर रहा है। विज्ञान की सहायता से आज मानव सागर का अंतराल चीरकर उसके अंतरतल की खोज करने लगा है। विज्ञान की सहायता से ही आज का उन्नत तकनीकी मानव रेगिस्तानों में फूल तो खिलाने ही लगा है. वहाँ की रेत को निचोड़कर उससे तेल भी निकालने लगा है। सागर से तेल प्राप्त करना भी आधुनिक विज्ञान का ही चमत्कार है।

आधुनिक विज्ञान ने युद्ध तकनीक में भी विशेष चमत्कार कर दिखाया है। परमाणु बम की कहानी उस समय पुरानी लगने लगती है कि जब हाइड्रोजन बम, कोबाल्ट बम, जैविक या रासायनिक बमों एवं शस्त्रास्त्रों के निर्माण की लोभहर्षक चर्चा सुन पडती है। ऐसी गैसों की चर्चा कि हवा से मिल जाने पर, उस हवा का नन्हा-सा झोंका जहाँ कहीं भी पहुंचेगा, वही मृत्यु का तांडव होने लगेगा। फिर भविष्य में यदि युद्ध होंगे तो उनका संचालन कोई भूमिगत और चमत्कृत कर देने वाला वैज्ञानिक यंत्र कर रहा होगा। इस प्रकार आज विज्ञान ने युद्धकला को विनाश और सर्वनाश की कला बना दिया है। मानव उसके सामने मात्र एक मिट्टी का लौंदा बनकर रह गया है। नागासाकी और हिरोशिमा की विनाशलीला के घातक दुष्परिणाम अभी तक देखे जा सकते हैं।

ध्वनि, जल, वायु प्रदूषण का जन्मदाता भी वर्तमान विज्ञान को ही माना जाता है। विज्ञान ने मानव को धर्म-विमुख तथा अनीश्वरवादी भी बना दिया है। उसकी कोमल भावनाएँ लुप्त हो गई हैं तथा वह बुद्धिवादी, भौतिकवादी तथा जडवत यंत्रवत बना दिया है। इसलिए रामधारी सिंह दिनकर ने कहा था-

“विज्ञान यान पर चढ़ी आज सभ्यता डूबने जाती है।”

इस सारे वर्णन से सामान्य तथा आधुनिक विज्ञान और तकनीक की प्रगति और विकास, उसमें अद्भुत-अविश्वसनीय से लगने वाली चमत्कारों का चित्र तो उभरकर सामने आ ही जाता है। मानवता पर विश्वास रखने वाले व्यक्ति के मस्तक पर चिंता की रेखाएँ भी उभर आती हैं। वास्तव में विज्ञान अपने में निर्माण तथा सृजन के साथ विनाश एवं विक्रम की शक्तियाँ समेटे हुए हैं। अब यह उसके प्रयोगकर्ता पर निर्भर है कि वह उसकी शक्तियों का प्रयोग निर्माण के लिए करता है अथवा विनाश के लिए? विज्ञान तो विष्ण की भाँति सबका पालन है, पर इसका दुरूपयोग करने पर शिव के समान संहारक बन सकता है अत: इसकी शक्तियों का प्रयोग सोच समझकर करना होगा क्योंकि अंकुश के अभाव में यह विनाशकारी बन जाता है। कहा भी है-

“भलाबुरा न कोई रूप से कहाता है,

दृष्टि-भेद स्वयं दोष-गण दिखलाता है।

कोई कमल की कली देखता है, कीचड में,

किसी को चांद में भी दाग नजर आता है।

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