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Hindi Essay on “Bharatiya Kisan” , ”भारतीय किसान” Complete Hindi Essay for Class 10, Class 12 and Graduation and other classes.

भारतीय किसान

Bharatiya Kisan

Best 5 Essays on ” Bharatiya Kisan” in Hindi

Essay No. 1

भारतवर्ष एक कृषि प्रधान देश है | इस देश की 70% जनसंख्या गाँवों में रहती है तथा वह खेती करती है | ये लोग कृषक कहलाते है | यद्दपि ये कृषक भारतवर्ष की रीढ़ की हड्डी है तथापि वे निर्धन है | भारत के कृषक की दशा बहुत दयनीय है | वे कठिन परिश्रम करते है परन्तु फिर भी उन्हें कम तथा घटिया खाने को मिलता है | वे कम कपड़े पहनकर, कम व घटिया खाना खाकर तथा कच्चे घरो में रहकर जीवन-यापन करते है |

भारतीय कृषक प्रात : काल से लेकर देर सत तक कडकती धुप में बड़े परिश्रम से खेती करते है | वे अपने काम के प्रति बहुत ईमानदार है | इस पर भी वे बहुत साधारण जीवन व्यतीत करते है | वे अशिक्षित तथा अज्ञानी है तभी वे आधुनिक वैज्ञानिक औजारों व नवीनतम तकनीकी का प्रयोग करना नही जानते | अत : उनके उत्पादन में आवश्यकतानुसार वृद्धि नही हो पाती | इन्हें अपनी खेतो की सिचाई के लिए मानसून पर निर्भर रहना पड़ता है | मानसून के निशिचत न होने के कारण कई बार तो इनकी फसल बिल्कुल नष्ट हो जाती है | कितनी ही बार बाढ़ का तो कितनी ही बार इन्हें सूखे का सामना करना पड़ता है , जिसका परिणाम यह होता है कि कठिन परिश्रम करने पर भी इन्हें निर्धनता तथा भुखमरी तक का भी सामना करना पड़ता है |

भारतीय किसान के लिए निर्धनता तथा अज्ञानता दोनों ही बड़े अभिशाप है, जिनके कारण वह अपने आपको कोसता रहता है | यदि हम किसानो को इस गर्त से उबारना चाहते है तो हमे इनके लिए कुछ करना होगा | सर्वप्रथम तो इन्हें शिक्षित करना होगा | तथा इनके लिए अन्य अनेक सुविधाएँ प्रदान करानी होगी | जैसे ग्रामो में पुस्तकालय , वाचनालय व टेलीविजन आदि की सुविधाए उपलब्ध करानी होगी | इनसे एक तो इनकी जानकारी बढ़ेगी दूसरा इनका मनोरंजन होगा | इनके अतिरिक्त सरकार को इनके लिए सस्ते ऋण , अच्छे बीज, औजार, खाद व सिंचाई की व्यवस्था करनी होगी |

स्वतंत्रता से पूर्व अंग्रेजी राज्य में किसान देशी साहूकारों व महाजनों के चंगुल में फँसा हुआ था | परन्तु आजकल सरकार , सहकारी समितियाँ तथा बैक हमारे किसानो की बहुत सहायता कर रहे है | इनके द्वारा किसानो की ऋण सम्बन्धी आवश्यकताओ की पूर्ति होने से कृषि में क्रान्ति आ गई है | सरकार ने किसानो के लिए अनेक प्रकार के सुधर कार्यक्रम चलाए है जैसे सामूहिक खेती, चकबन्दी , विद्दुतीकरण , पानी की पूर्ति , विद्दालय व अस्पताल आदि | इनके द्वारा किसानो का जीवन –स्तर ऊचा उठा है और अब किसान खुशहाल रहने लगा है |

 

 

भारतीय कृषक
Bhartiya Krishak

जब तुम, मुझे पैरों से रौंदते हो
तथा हल के फाल से विदीर्ण करते हो
धन-धान्य बनकर मातृ-रूपा हो जाती हूँ।

Essay No. 2

भारत एक कृषि प्रधान देश है। यहां के अधिकांश लोक आज भी अपनी जीविका के लिए कृषि पर निर्भर है। दूसरे शब्दों में, हमारी अर्थव्यवस्था का प्रमुख आधार कृषि है। इन परिस्थितियों में कृषक की भूमिका अत्यधिक महत्वपूर्ण हो जाती है। परंतु देश के लिए यह अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है कि स्वतंत्रता प्राप्ति के पाँच दशकों के बाद भी भारतीय कृषकों की दशा में बहुत अधिक परिवर्तन देखने को नहीं मिला है।

स्वतंत्रता से पूर्व भारतीय कृषक की स्थिति अत्यंत दयनीय थी। तब देश अंग्रेजों के आधिपत्य में था कि जिनका मूल उद्देश्य व्यापारिक था। उन्होनंे कृषकों की दशा में सुधार हेतू प्रयास नहीं किए। कृषकों की दशा में सुधार हेतु कई बार कानून पारित किए गए। परंतु वास्तविक रूप में उनका कभी भी पूर्णयता पालन नहीं किया गया। किसानों को अपने उत्पाद का एक बड़ा भाग कर के रूप में सरकार को देना पड़ता था। सूखा तथा अन्य प्राकृतिक आपदाओं के समय उनकी स्थिति अत्यंत दयनीय हो जाती थी। कर अदा करने के लिए वे सेठ-साहूकारों से कर्ज लेते थे परंतु उसे वापस न करने की स्थिति में जीवन पर्यत उसका बोझ ढोते रहते थे। अनेकों कृषकों को अत्यंत कम वेतन पर मजदूरी के लिए विवश होना पड़ता था।

स्वतंत्रता के पश्चात् कृषकों की दशा में सुधार के लिए अनेक योजनाएँ कार्यान्वित की गई। समय-समय पर विभिन्न सरकारों द्वारा कृषकों को अनेक सुविधाएँ प्रदान की गईं परंतु अनेक कारणों से इन सुविधाओं का लाभ पूर्ण रूप से उन तक नहीं मिल पाया। देश के विभिन्न क्षेत्रों के किसानों मे भारी असंतोष है क्योकि उन्हे सिंचाई के लिए पर्याप्त मात्रा में न तो बिजली मिल पाती है और न ही उन्नत किस्म के बीज आदि भी समय पर उपलब्ध होते हैं।

भारतीय कृषक की सामान्य दशा का यदि अवलोकन करें तो हम पाते है कि हमारे अधिकांश कृषक निरक्षर हैं। यह कृषकों के पिछड़ेपन का एक प्रमुख कारण है। निर्धनता एंव अशिक्षा के कारण वे सरकार की कृषि संबंधी विभिन्न योजनाओं का लाभ नहीं उठा पाते हैं। शिक्षा के अभाव में वे उन्नत बीज, कृषि के आधुनिक उपकरणों तथा उच्च वैज्ञानिक तरीकों से वंचित रह जाते हैं। भारतीय पारंपरिक रीति-रिवाज एंव बाह्य आडंबर आदि भी उसकी प्रगति के मार्ग की रूकावट बनते हैं।

विगत कुछ वर्षों में विज्ञान एंव तकनीक के क्षेत्र में भारत ने विशेष प्रगति की है। संचार माध्यमों के विशेष प्रचार एंव प्रसार का सकारात्मक प्रभाग हमारी कृषि पर भी पड़ा है। दूरदर्शन तथा रेडियों आदि के माध्यम से हमारी सरकार एंव अन्य संस्थाएँ कृषकों को कृषि संबंधी जानकारी दे रही हैं तथा उन्हें उन्नत बीजों व विभिन्न वैज्ञानिकों तरीकों से अवगत करा रही हैं। इसके अतिरिक्त बैंकों आदि के माध्यम से किसानों को कम ब्याज दर पर कर्ज उपलब्ध कराया जा रहा है जिससे वे आधुनिक उपकरण तथा सिंचाई आदि का प्रबंध कर सकें।

सरकार के इन अथक प्रयासों के सकारात्मक परिणाम आने प्रारंभ हो गए हैं। कुछ राज्यों जैसे पंजाब, हरियाणा आदि ने विशेष प्रगति की है। देश के अन्य राज्यों में भी सुधार दिखाई देने लगा है। निस्संदेह हम उज्जवल भविष्य की ओर अग्रसर हो रहे हैं। हमारे कृषकों की दशा में निरंतर सुधार से देश की अर्थव्यवस्था पर विशेष प्रभाव पड़ेगा। तब अवश्य ही एक स्वावलंबी, आत्मनिर्भर एंव अग्रणी भारत की हमारी परिकल्पना साकार हो सकेगी।

 

भारतीय किसान

Bhartiya Kisan

Essay No. 3

प्रस्तावना-भारतीय किसान का जीवन बहुत कठोर होता है। वह बहुत परिश्रमी होता है। प्रातःकाल में सूर्योदय होते ही वह अपने हल लेकर खेतों पर चला जाता है तथा दिन भर कड़ी धूप में वहीं पर काम करता रहता है। गर्मी, सर्दी, बरसात सभी ऋतुओं में वह कठिन परिश्रम करके अपने परिवार देश के अन्य लोगों के लिए अन्न उगाती है।

किसान का जीवन- भारतीय किसान का जीवन अत्यन्त सादा होता है। वह स्वयं रूखा-सूखा होता है, परन्तु देश भर के प्राणियों को अन्न की कमी नहीं होने देता। भारतीय किसान कठोर श्रम के कारण ही आज सभी के लिए आदर्श माना जाता है।

भारतीय किसान बहुत सादा जीवन व्यतीत करते हैं। शहरी व्यक्तियों की तरह चमक-दमक वाले जीवन से वह दूर रहता है। उसकी पोशाक बहुत सादी होती है। अधिकाशं किसान लम्बा कुर्ता और छोटी धोती पहनते हैं। अत्यधिक ठंड में वे कुछ ऊनी कपड़े के रूप में एक गर्म चादर का इस्तेमाल करते हैं।

देश के लिए उपयोगी- भारतीय किसान कभी भी अपने सुखों की परवाह नहीं करता। उसके जीवन पर एक मात्र लक्ष्य नहीं होता है कि देश के सभी प्राणियों को अन्न मिलता रहे। पर कभी-कभी यह देखकर अफसोस होता है कि इतना परिश्रम करने पर भी कुछ किसान निर्धन रहते हैं।

उपसंहार- जिस तरह किसान संसार के सभी प्राणियों के बारे में सोचकर अपने सुखों को त्याग देता है, उसी प्रकार हमें भी देश के लिए सादा जीवन उच्च आदर्श, कठिन श्रम और देशहित की नीतियों को अपनाकर चलना चाहिये। किसान और देश की सीमा पर तैनात सैनिकों की देशसेवा के सामने रखते हुए हमारे देश के द्वितीय प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री ने नारा दिया था- ‘जय जवान, जय किसान।‘

 

भारतीय किसान

Bharatiya Kisan

Essay No. 4

भारत एक कृषि प्रधान देश है। भारत की 75% जनता गांवों में रहती है। अत: कृषि उनका मुख्य व्यवसाय है। गांवों के लोगों का जीवन कृषि पर निर्भर करता है। भारतीय किसान देश और समाज का एक उपयोगी सदस्य है। धरती उसकी मां है जिसमें बीज डालकर वह अन्न उत्पन्न करता है। अन्न उगाने के लिए उसे हल चलाना पड़ता है। हल चलाने वाले किसान अपने शरीर की आहुति दिया करते हैं। खेत उनकी हवनशाला है। ध्यान से देखा जाए तो किसान अन्न-अन्न में, फूल-फूल में न्यौछावर सा हुआ दिखाई देता है। खेती किसान के ईश्वरीय प्रेम का केंद्र है। उसका सारा जीवन पत्ते-पत्ते में, फूल-फूल में, फल-फल में बिखर रहा है। उसका जीवन एक मौन जीवन है।

भारतीय किसान अधिक पढ़ा लिखा नहीं है। मिट्टी, पानी, बीज, हल, खाद, उसकी पुस्तकें कही जा सकती हैं, फिर भी वह मानसिक रूप से पूर्णतः जागरूक है और वह जानता है कि खेत में कैसे काम किया जाए जिससे अधिक से अधिक फसल प्राप्त की जाए। भारतीय किसान का सबसे बड़ा दुर्भाग्य यह है कि वह कठिन परिश्रम करता है फिर भी गरीब ही रहता है। उसे पैसे पैसे के लिए कर्ज लेना पड़ता है। यह ऋण वह गाँव के साहूकारों से लेता है। जब उसकी फसल तैयार होती है तो यह जिमींदार, साहूकार उसकी फसल समेट कर ले जाते हैं। इस तरह वह जीवन भर कर्ज के बोझ तले दबा रह जाता है और उस पर ब्याज भी बढता। जाता है। पूंजीपति वर्ग उसका खूब शोषण करते हैं।

भारतीय किसान का जीवन अभावों से भरा है। वह खले आकाश के नीचे एक छोटी सी कटिया बन कर रहता है। उसका हृदय भी आकाश की तरह विशाल है। उसे पशुओं से प्रेम है, इसलिए हर किसान के द्वार पर गाय उसके घर में दूध की पवित्र धारा बहती है। वह चमक दमक से कोसों दूर है। उसका जीवन सादा तथा विचार उच्च होते हैं। उसका जीवन अत्यन है। वह सुबह जल्दी उठकर खेतों को चला जाता है । वह मिट्टी को फसल तैयार करने के लिए उस पर हल चलाता है। इस काम में उसके बच्चे भी उसका साथ देते हैं। इसके पश्चात् वह धरती में बीज डालता है। उसे पानी देता है।

अब उसकी आँखें बीज अंकुरित होने की प्रतीक्षा करती हैं। ज्यों-ज्यों कोपलें पटती हैं उसका मन-मयूर नाच उठता है। उसके घर में खुशी की लहर दौड़ जाती है। इस समय वह फसल की रक्षा के लिए जी जान से जुट जाता है। उसकी फसल कई तरह के खतरे हैं जैसे जंगली जानवरों से हमला कई प्रकार कीटे मसल को खा जाते हैं। सर्दी, गर्मी, कोहरा भी फसल को नष्ट कर देते हैं। अपनी खेती के बचाव के लिए वह विभिन्न उपाय करता है।

भारत सरकार ने कृषि को मुख्य व्यवसाय के रूप में स्वीकार किया है। अतः वह किसानों की भलाई के लिए समय-समय पर कदम उठाती रहती है। अब किसानों को साहूकारों, जिमींदारों से ऋण नहीं लेना पड़ता। सरकार ने किसानों को बैंकों से ऋण की व्यवस्था कर दी है। यह ऋण बहुत कम ब्याज की दरों पर दिया जाता है। जिसे वह निश्चित समय की सीमा के अन्दर सुविधाजनक किश्तों में उतार सकते हैं। सरकार के इस कदम से किसानों ने सुख की सांस ली है।

आज का किसान वैज्ञानिक प्रगति से परिचित है। विज्ञान ने कृषि के नए-नए औज़ार. मशीनें आदि खोजी हैं। अब वह सारा काम इन मशीनों द्वारा करता है। हल चलाने से लेकर पानी का छिड़काव, कीटनाशक,

दवाईयों का छिड़काव, फसल काटना, छांटना सब कुछ मशीनों द्वारा किया जाता है। आज का किसान 19वीं, 20वीं सदी के किसान की अपेक्षा अधिक सभ्य हो चुका है। उसी के परिश्रम के कारण भारत कृषि के क्षेत्र में विश्व में आगे बढ़ रहा है। किसान की मेहनत ने भारत को खुशहाल बना दिया है। अतः सच है किसान धरती का भगवान है।

 

भारतीय किसान

Bharatiya Kisan

Essay No. 5

भारत एक कृषि प्रधान देश है। इसलिए इसे किसानों का देश भी कहा जाता है। भारत एक उपजाऊ तथा संपन्न देश है। यहाँ साल भर विभिन्न प्रदेशों में तरह-तरह की फसलें उगाई जाती हैं। खेती-बाड़ी भारतीय लोगों का मुख्य पेशा है। भारत की पूरी अर्थव्यवस्था कृषि पर आधारित है। इसलिए देश की प्रगति में किसानों की भूमि का बहुत महत्त्वपूर्ण है। किसान हमारे लिए फल, तरकारी, चावल, गेहूँ तथा अन्य अनाज उगाते हैं तथा इनके बिना हम जीवित नहीं रह सकते। हमारे देश के किसान अत्यंत परिश्रमी हैं। वे दिन-रात मेहनत करके अपने खेतों में फसल उगाते हैं तथा हमारे जीवन का आधार तैयार करते हैं। वे अपने खेतों को जोतते हैं, उनमें अनाज बोते हैं। समय-समय पर अपने खेतों की सिंचाई, निराई, गुड़ाई करते हैं। किसान सुबह ही अपने खेतों में चले जाते हैं और शाम तक खेतों पर काम करते हैं। शाम के समय ही वे अपने घर वापस आते हैं।

बैल, गाय, भैंस, बकरी किसानों के मुख्य पालतू पशु हैं। वे इनसे दूध, खाद आदि प्राप्त करते हैं। बैलों से हल चलवाते हैं। ये पशु उनका सबसे बड़ा धन होते हैं।

भारतीय किसान का जीवन का अत्यंत सादा है। वे सदा साधारण वस्त्र पहनते हैं। धोती, कुर्ता, पाजामा तथा सिर पर पगड़ी उनकी मुख्य पोशाक है।

किंतु भारतीय किसानों की दशा अत्यंत दयनीय है। उनका पूरा जीवन गरीबी में गुजर जाता है। उनके साथ अनेक समस्याएँ होती हैं। वे निरक्षर होते हैं। गाँवों में उन्हें शिक्षा तथा चिकित्सा की पूर्ण सुविधाएँ भी नहीं मिल पातीं। उनके लिए सिंचाई व्यवस्था उतनी उत्तम नहीं है। वास्तव में उनका जीवन गरीबी तथा कष्टों से भरा हुआ है।

किसान पूरे देश के लिए भोजन की व्यवस्था करते हैं। वे समाज का एक महत्त्वपूर्ण हिस्सा हैं। अतः हमें उनकी दशा सुधारने के लिए प्रयास करना चाहिए।

 

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commentscomments

  1. Sarbjyot kour says:

    Thanks a lot
    For this easy essay

  2. Thank you for your help .

  3. Thank u so so much to post these beautiful essay it helped me so so so much in my works😇 thanks a lot ☺️

  4. Thanks a lot 👍👍👍

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