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Archive by category "Languages" (Page 430)
ध्वनि-प्रदूषण Dhwani Pradushan मनुष्य को प्रकृति का वह वरदान प्राप्त है कि वह बोल सकता है। उसके पास एक उन्नत भाषा है। उस भाषा में वह बातचीत कर सकता है। विचारों को समझ-समझा या उनका आदान-प्रदान कर सकता है। प्रकृति को वरदान और भाषा अर्जित बल पर मनुष्य गनगना सकता है। स्वर-लय में गा सकता है। चाहने और पड़न पर रो भी सकता है, चिल्ला भी सकता है। इस प्रकार...
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November 26, 2019 evirtualguru_ajaygourHindi (Sr. Secondary), Languages1 Comment
महानगरीय परिवहन-व्यवस्था Mahanagariya Parivahan Vyavastha दिल्ली हो या कलकत्ता, बम्बई हो या मद्रास-इस प्रकार के सभी महानगरों में जन-संचरण के लिए रक्तवाहनियों के समान उचित परिवहन-व्यवस्था का रहना बहुत आवश्यक माना गया है। इसके अभाव में यहाँ का जीवन कहा जा सकता है कि एक कदम ना नहीं चल सकता। एक दिन परिवहन व्यवस्था किसी कारण से न मिल पाने पर लगता जस सारा नगर, सारा वातावरण और वहाँ का सारा...
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November 26, 2019 evirtualguru_ajaygourHindi (Sr. Secondary), LanguagesNo Comment
भारत और इस्राइल सम्बन्ध Bharat aur Israel Sambandh शीत युद्ध की समाप्ति के उपरान्त हमारे देश की राष्ट्रीय रूप से स्वीकृत विदेश नीति में भी परिवर्तन आया। भारत-इस्राइल राजनयिक सम्बन्धों की स्थापना को इनमें सस महत्त्वपूर्ण परिवर्तन माना जाता है। इन सम्बन्धों की पृष्ठभूमि 1991 में उस समय जब सयुक्त राष्ट्र संघ में अमेरिका की पहल पर इस्राइल के सम्बन्ध में लाए गए प्रस्ताव पर भारत ने अपना समर्थन दिया। यह...
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November 26, 2019 evirtualguru_ajaygourHindi (Sr. Secondary), LanguagesNo Comment
भारत और चीन सम्बन्ध Bharat aur China Sambandh एशिया के दो महान् देश हैं भारत और चीन जिन्होंने मौजूदा राजनीतिक समीकरण की आवश्यकता को भलीभाँति समझ लिया है। ऐसा लगता है कि अब ये दोनों सकारात्मक दायित्व निभाने, एक ध्रुवीय शक्ति से संत्रस्त मानवता और राष्ट्रों को बचाने, एक नया राजनीतिक समीकरण तथा संतुलन बनाने की दिशा में अग्रसर भी हो उठे हैं। भारत और चीन दोनों ही पराधीनता और...
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November 26, 2019 evirtualguru_ajaygourHindi (Sr. Secondary), LanguagesNo Comment
भारत की तटस्थ नीति Bharat ki Tatastha Niti विश्व शान्ति के संदेशवाहक भारत ने अहिंसा के अमोघ अस्त्र के द्वारा मातृभूमि को विदेशियों के चंगुल से मुक्त कराया था। उसकी प्रबल इच्छा है कि विश्व के सभी बार की तरह मिल जुल कर रहें। उनमें पारस्परिक सहयोग, सद्भावना और संवेदना हो। एक राष्ट्र दूसरे राष्ट्र के कल्याण के लिए सदैव तत्पर रहे और हर एक क्षत्र में प्रगति करने का अवसर...
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November 26, 2019 evirtualguru_ajaygourHindi (Sr. Secondary), LanguagesNo Comment
नारी और राजनीति Nari aur Rajniti राजनीति को शायद किसी भी युग में कोई अच्छी बात नहीं माना गया। फिर भी सृष्टि विकास के आरम्भ से ही मनुष्य राजनीति करने, राजनीतिक कार्यों में भाग लेने को विवश कर रहा है। सृष्टि की आरम्भिक अवस्था में जब पेडों से नीचे उतर गुफाओं से बाहर निकल, छोटी-छोटी झोपड़पट्टियां बनाकर मनुष्य जाति ने रहना आरम्भ किया था, तभी से उसके जीवन में राजनीति का...
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November 26, 2019 evirtualguru_ajaygourHindi (Sr. Secondary), LanguagesNo Comment
नारी और फैशन Nari aur Fashion नारी जीवन और समाज का परम विशिष्ट आधा अंग है। सच तो यह है कि नारा-विहीन जीवन और समाज की कतई कल्पना ही नहीं की जा सकती। वह जननी है, माँ है, सभी पुरुष, घर परिवार और संसार के अस्तित्व का कारण है। संसार में जो ना हुआ या हो रहा है. उस की पष्ठभमि में प्रेरणा के रूप में नारी जीवन विद्यमान है। प्रत्येक...
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November 26, 2019 evirtualguru_ajaygourHindi (Sr. Secondary), LanguagesNo Comment
कामकाजी महिलाओं की समस्याएँ Kamkaji Mahilao ki Samasyaye सामान्यतया-विशेषकर भारत में महिलाओं का स्थान कुछ वर्षों पहले तक घर-परिवार की सीमाओं तक ही सीमित समझा जाता रहा है। प्राचीन भारत में नारी के पूर्ण स्वतंत्र, सभी प्रकार के दबाओं से पूर्ण मुक्त रहने के विवरण अवश्य मिलते हैं। यह विवरण भी मिलता है कि जब वे अपनी पारिवारिक स्थिति के अनुसार हर प्रकार की शिक्षा भी क्योंकि तब शिक्षा प्रणाली आश्रम...
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November 26, 2019 evirtualguru_ajaygourHindi (Sr. Secondary), LanguagesNo Comment