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Archive by category "Languages" (Page 161)
मन चंगा, तो कठौती में गंगा Man changa, to kathoti me Ganga रैदास जूते गांठकर अपनी जीविका कमाते थे। सड़क पर जगह बना ली थी, जहां पर बैठकर रोजाना जूते गांठा करते थे। काशी जाने वाले लोग इसी सड़क से होकर जाया करते थे। साधु, संत आदि जो भी लोग गंगास्नान के लिए जाते थे, इधर से होकर ही निकलते थे। रैदास को उनका दर्शन लाभ होता था और उनके जूते...
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July 5, 2022 evirtualguru_ajaygourHindi (Sr. Secondary), LanguagesNo Comment
बीरबल की खिचड़ी Birbal ki Khichdi पौष के महीने में शाम के समय कड़ाके की सर्दी पड़ रही थी। पक्षियों के झुंड-के-झुंड अपने-अपने बसेरों की ओर उड़ते जा रहे थे। अकबर बादशाह छत पर खड़े-खड़े यह सब देख रहे थे। आज उनके साथ बीरबल भी मौजूद थे। यमुना की लहरों को छूते हुए हवाओं के ठंडे झोंके आते और दोनों को ठंडा करते हुए निकल जाते। दोनों ही नगर की जनता...
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July 5, 2022 evirtualguru_ajaygourHindi (Sr. Secondary), LanguagesNo Comment
जो हल जोते खेती वाकी, और नहीं तो जाकी ताकी Jo hal jote kheti vaki, aur nahi to jaki taki तालाब के किनारे एक मंदिर था। एक जमींदार मंदिर के चबूतरे पर बैठा-बैठा कुछ सोच रहा था। आमदनी ‘घटती जा रही थी। सभी खेत आध-बटाई पर दे रखे थे। बिना हाथ-पैर चलाए लगभग आधी फसल का अनाज मिल जाता था। उसने खुद तो कभी हल की मूंठ तक नहीं पकड़ी थी।...
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July 5, 2022 evirtualguru_ajaygourHindi (Sr. Secondary), LanguagesNo Comment
घर का आया नाग न पूजे, बांबी पूजन जाएं Ghar ka aaya naag na puje, Bambi pujan jaye बिना बताए जब कोई मेहमान आता था, तो बड़ी खुशी होती थी। आए हुए मेहमान का आदर-सत्कार करते थे। जब यह पता रहता था कि अमुक मेहमान अमुक तिथि को आ रहा है, तो प्रसन्नता तो होती थी, लेकिन इतनी नहीं होती थी, जितनी बिना बताए आने वाले मेहमान के आने पर...
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July 5, 2022 evirtualguru_ajaygourHindi (Sr. Secondary), LanguagesNo Comment
छाती का जामुन, मेरे मुंह में डाल दो Chati ka Jamun, mere muh me daal do सड़क के किनारे एक बाग था। उस बाग में दो-तीन जामुन के पेड़ थे। जामुन के पेड़ के नीचे दो आदमी सो रहे थे। इधर-उधर तमाम जामुनें टपकी पड़ी थीं। एक जामुन एक आलसी के सीने पर पड़ी हुई थी। आंख खुलते ही उस आलसी को लगा कि छाती पर कुछ पड़ा है। उसने थोड़ा...
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July 5, 2022 evirtualguru_ajaygourHindi (Sr. Secondary), LanguagesNo Comment
अजगर करे न चाकरी, पंछी करे न काम Ajgar kare na Chakri, Panchi kare na Kaam एक दिन मलूकदास को न जाने क्या सूझा कि हठ कर बैठे कि ईश्वर सबको खिलाता है। मैं देखता हूं ईश्वर मुझे कैसे खिलाता है? ऐसा सोचकर वे एक जंगल में चले गए। जंगल में उन्हें एक छायादार वृक्ष मिला। मलूकदास उसी वृक्ष के नीचे लेटकर सुस्ताने लगे। थोड़ी देर बाद वे उसी पेड़ पर...
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July 5, 2022 evirtualguru_ajaygourHindi (Sr. Secondary), LanguagesNo Comment
गरीब की जोरू, सबकी भाभी Garib ki Joru, Sabki Bhabhi एक मोहल्ले में एक गरीब परिवार था। उस मोहल्ले में कुछ अमीर थे और ऐसे परिवार अधिक थे जो न अमीर थे और न गरीब थे। गरीब परिवार का दीनू सबको राम-राम करता था। वह सब लोगों के काम भी आता रहता था। उस मोहल्ले में विभिन्न समाज और बिरादरी के लोग थे। दीनू के पड़ोस में एक परिवार ठाकुर का...
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July 5, 2022 evirtualguru_ajaygourHindi (Sr. Secondary), LanguagesNo Comment
एक तो करेला, दूसरा नीम चढ़ा Ek to Karela, Dusra Neem Chadha एक व्यक्ति को मधुमेह की बीमारी थी। वैद्य का कहना था कि करेले की सब्जी और करेले का रस मधुमेह के रोगी के लिए बहुत लाभदायक होता है। वैद्य ने उससे करेला खाने के लिए कहा तो बिदक गया। करेले से ही नहीं बल्कि हर कड़वी चीज से उसे एक तरह से नफरत थी। यहां तक कि यदि...
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July 5, 2022 evirtualguru_ajaygourHindi (Sr. Secondary), LanguagesNo Comment