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Hindi Essay, Moral Story “Char lath ke Chaudhary, Panch lath ke Panch” “चार लट्ठ के चौधरी, पांच लट्ठ के पंच” Story on Hindi Kahavat for Students of Class 9, 10 and 12.

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चार लट्ठ के चौधरी, पांच लट्ठ के पंच Char lath ke Chaudhar, Panch lath ke Panch एक दिन गांव में फौजदारी हो गई। जो कमजोर थे, वे बेचारे पिटे और गालियां खाईं। मामला गांव के मुखिया के पास गया, तो उन्होंने एक दिन पंचायत बुलाई और उसमें दोनों तरफ के लोगों को बुलाया। पंचायत में गांव के लगभग सभी लोग मौजूद थे। जब एक-एक करके दोनों ओर की बातों को सुना...
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Hindi Essay, Moral Story “Jaise ko Taisa” “जैसे को तैसा” Story on Hindi Kahavat for Students of Class 9, 10 and 12.

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जैसे को तैसा Jaise ko Taisa  पहले विवाह के संबंधों में लड़के-लड़कियों की पूरी छानबीन पंडितों और नाइयों पर छोड़ दी जाती थी। ‘लड़के को पक्का करने के लिए पीली चिट्ठी’ और ‘लगन’ ले जाने का काम नाई ही करता था। एक व्यक्ति की लड़की तुतलाती थी। उसने अपनी लड़की के रिश्ते के लिए एक नाई से कह रखा था। उसी नाई के प्रयास से रिश्ते के लिए बात चली। पहले...
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Hindi Essay, Moral Story “Chor ki dadhi me Tinka” “चोर की दाढ़ी में तिनका” Story on Hindi Kahavat for Students of Class 9, 10 and 12.

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चोर की दाढ़ी में तिनका Chor ki dadhi me Tinka   एक काजी का फैसला सुनाने के मामले में दूर-दूर तक नाम था। वह कोशिश यही करता था कि किसी बेगुनाह को सजा न हो। कोई-कोई मुकदमा ऐसा आता था, जिसमें वह अपनी बुद्धि का बहुत अच्छा परिचय देता था। इसी प्रकार का एक मुकदमा उसके यहां आया। चोरी के शक में चार आदमियों को इजलास में हाजिर किया गया था।...
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Hindi Essay, Moral Story “Bole so kundi khole” “बोले सो कुंडी खोले” Story on Hindi Kahavat for Students of Class 9, 10 and 12.

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बोले सो कुंडी खोले Bole so kundi khole   एक बार दो मंजिले मकान में कई किराएदार थे। मुख्य दरवाजा रात के लगभग ग्यारह बजे तक खुला रहता था। इस समय तक कुछ लोग जागते रहते और कुछ लोग सो जाते थे। सर्दियों का समय था। जोर की सर्दी पड़ रही थी। रात के करीब डेढ़ बजे थे। हरभजन दरवाजे पर आवाज लगाने लगा। कुछ देर बाद जब दरवाजा नहीं खुला,...
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Hindi Essay, Moral Story “Aap hare, Bahu ko mare” “आप हारे, बहू को मारे” Story on Hindi Kahavat for Students of Class 9, 10 and 12.

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आप हारे, बहू को मारे Aap hare, Bahu ko mare   एक दर्जी था। उसका काम खूब चलता था। घर में सभी आनंदपूर्वक रहते थे। उसकी मां थी, पत्नी थी और दो बच्चे थे। वह सीधा-सादा व्यक्ति था। सुबह उठना और नहा-धोकर दुकान पर जाना। शाम को दुकान बंद करके आना। भोजन करना और सो जाना। छुट्टी के दिन घर पर रहना या बाहर कहीं जाना होता तो जाता। एक बार...
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Hindi Essay, Moral Story “Dekhna hai, Unth kis karvat baithta hai?” “देखना है, ऊंट किस करवट बैठता है?” Story on Hindi Kahavat for Students of Class 9, 10 and 12.

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देखना है, ऊंट किस करवट बैठता है? Dekhna hai, Unth kis karvat baithta hai? एक गांव में सात दिन बाद हाट लगती थी। सब्जी, दाल, अनाज, कपड़े आदि घर-गृहस्थी का सभी सामान बिकने आता था। आस-पास के गांवों के लोग भी सामान लेने आते थे। हाट में दुकानदार अपना सामान बैलगाड़ियों, खच्चरों, ऊंटों आदि से लाते थे। आस-पास के दुकानदार छोटा-मोटा सामान अपने सिर पर ही रखकर लाते थे। एक ही...
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Hindi Essay, Moral Story “Bhagte Chor ki Langoti hi Sahi” “भागते चोर की लंगोटी ही सही” Story on Hindi Kahavat for Students of Class 9, 10 and 12.

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भागते चोर की लंगोटी ही सही Bhagte Chor ki Langoti hi Sahi   एक चोर चोरी करने निकला। रात अंधेरी थी। उसने एक बनिये के घर में पिछवाड़े से सेंध लगा दी। घर में घुसकर सामान टटोलने लगा। जैसे ही वह सामान लेकर चला कि कोई हलकी-सी चीज गिरी। उसकी आवाज से बनिया जाग गया और अंदर कमरे की ओर दौड़ा। चोर सामान लेकर सेंध से निकल ही रहा था कि...
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Hindi Essay, Moral Story “Maya Tere Teen Naam- Parsa, Parsu, Parsuram” “माया तेरे तीन नाम: परसा, परसू, परसुराम” Story on Hindi Kahavat for Students of Class 9, 10 and 12.

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माया तेरे तीन नाम: परसा, परसू, परसुराम Maya Tere Teen Naam- Parsa, Parsu, Parsuram   एक बनिया था। जब उसका लड़का मोहल्ले के लड़कों की शोहबत में पड़ा, तो उसे चिंता होने लगी। लड़के की पढ़ाई तो पांचवीं कक्षा में बंद हो गई थी। लड़का गलत आदतें न पाल ले, इसलिए बनिये ने उसे धंधे में लगाने की सोची। बनिया चाहता था कि उसका लड़का धंधे को अपनी मेहनत से बढ़ाए।...
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