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Hindi Essay-Paragraph on “Bharat mein Prajatantra Panali” “भारत में प्रजातंत्र प्रणाली” 600 words Complete Essay for Students of Class 10-12 and Subjective Examination.

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भारत में प्रजातंत्र प्रणाली Bharat mein Prajatantra Panali प्रजातंत्र का मतलब है प्रजा का शासन अर्थात् जहां किसी एक व्यक्ति के हाथ में राज्य सत्ता न रहकर प्रजा के बहुमत पर ही निर्भर करती है। प्रजातंत्र को लोकतंत्र भी कहते हैं। प्रजातंत्र की परिभाषा दी जाती है- “प्रजातंत्र जनता का, जनता के लिए, जनता द्वारा किया गया शासन है।” महात्मा गांधी ने कहा था, “प्रजातंत्र का अर्थ मैं यह समझता हूं...
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Hindi Essay-Paragraph on “Doordarshan ka Yug” “दूरदर्शन का युग” 500 words Complete Essay for Students of Class 10-12 and Subjective Examination.

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दूरदर्शन का युग  Doordarshan ka Yug इस युग में विज्ञान के नये-नये आविष्कार रोज-ब-रोज हो रहे हैं। चारों तरफ मानव को दिए गए विज्ञान के उपहार भरे पड़े हैं। आज मनुष्य विज्ञा की शक्ति से आकाश में उड़ रहा है। देश-विदेशों की खबरें कुछ ही समय में देख-सुन रहा है। विज्ञान के चमत्कारों से कभी हर्षित और कभी भयभीत भी होता है। ऐसी ही एक चमत्कार टेलीविजन है। ‘टेलीविजन’ अंग्रेजी शब्द...
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Hindi Essay-Paragraph on “Mehangai” “महंगाई” 500 words Complete Essay for Students of Class 10-12 and Subjective Examination.

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महंगाई Mehangai महंगाई की तासीर यह है कि पॉकेट में पैसों का बोझ बढ़ता जाता है और थैले में सामान घटता जाता है। महंगाई बढ़ते-बढ़ते एक ऐसी स्थिति आ जाती है कि थैलों में रुपया भरकर जाया जाता है और जब में सामान लाया जाता है। अर्थशास्त्र की भाषा में जब क्रेता की क्रय-शक्ति घट जाए, तो इसे ही महंगाई कहते हैं। महंगई में सामान तो बाजार में मिलते हैं, लेकिन...
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Hindi Essay-Paragraph on “Anishasan” “अनुशासन” 500 words Complete Essay for Students of Class 10-12 and Subjective Examination.

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अनुशासन Anishasan   शासन के आगे ‘अनु’ उपसर्ग लगने से अनुशासन शब्द बना है। अनु शब्द का अर्थ है-पीछे। इस प्रकार अनुशासन का शाब्दिक अर्थ हुआ शासन के पीछे-पीछे चलना। यहां शासन का मतलब शासकीय मान्यताओं का पालन ही अनुशासन है। परिवार में पुत्र-पिता के अनुशासन में न रहे। पुत्री माता के अनुशासन में न रहे, तो वह परिवार अव्यवस्थित हो जाए। उसी प्रकार सरकारी कार्यालयों में अगर कर्मचारी/ अधिकारी के...
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Hindi Essay-Paragraph on “International Year of the Child” “अंतर्राष्ट्रीय बाल-वर्ष” 500 words Complete Essay for Students of Class 10-12 and Subjective Examination.

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अंतर्राष्ट्रीय बाल-वर्ष International Year of the Child ‘अंतर्राष्ट्रीय बाल-वर्ष’ एक वैश्विक आयोजन निया को यह अनुभव हुआ कि बच्चे ही किसी देश के भविष्य हैं। बच्चे तरह-तरह की समस्याओं से जकड़ कर या तो असमय काल कवितत हो जाते हैं या विकलांग हो जाते हैं या कुपोषण के शिकार होने से स्वस्थ, सुंदर, सुजैल नागरिक नहीं हो पाते हैं। बच्चों की अधिकांश समस्याएं स्वास्थय से संबंधित है। शेष समस्याएं शिक्षा-दीक्षा से...
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Hindi Essay-Paragraph on “Vidyarthi Jeevan mein Khelo ka Mahatva” “विद्यार्थी जीवन में खेलों का महत्त्व” 500 words Complete Essay for Students.

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विद्यार्थी जीवन में खेलों का महत्त्व Vidyarthi Jeevan mein Khelo ka Mahatva धर्म की साधना करने का प्रमुख माध्यम स्वस्थ शरीर है। प्रकृति ने मानव शरीर के रूप में एक अमूल्य रचना हमारे हाथों में सौंपी है। विज्ञान अपनी असंख्य आश्चर्यजनक उपलब्धियों के बावजूद मानव शरीर रूपी यंत्र की रचना नहीं कर सकता है। इस मशीन को स्वस्थ बनाए रखना हमारा कर्तव्य है। समाज, देश और प्रकृति उस परमात्मा के प्रति...
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Hindi Essay-Paragraph on “Adarsh Nagrik ke Kartvya” “आदर्श नागरिक के कर्तव्य” 700 words Complete Essay for Students of Class 10-12 and Subjective Examination.

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आदर्श नागरिक के कर्तव्य Adarsh Nagrik ke Kartvya  निबंध नंबर :-01 राष्ट्र के प्रति नागरिकों के क्या कर्तव्य है तथा एक आदर्श नागरिक के क्या कर्तव्य है? नागरिक और नागरिकता को स्पष्ट रूप से समझने के लिए यह जानना आवश्यक है कि ‘नागरिकता’ नागरिक के संपूर्ण प्राकृतिक, सामाजिक कर्तव्यों एवं अधिकारों का वह पुण्य पुंज है, जिसका सौरभ व्यक्ति को समाज और राष्ट्र की भावी उन्नति में संलग्न रहने की प्रेरणा...
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Hindi Essay-Paragraph on “Dharam aur Rajniti” “धर्म और राजनीति” 900 words Complete Essay for Students of Class 10-12 and Subjective Examination.

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धर्म और राजनीति Dharam aur Rajniti   ‘धर्म और राजनीति’ का संबंध त्रेता और द्वापर युगों में भी एक-दूसरे के संबद्ध रहा है। त्रेता में रामावतार और द्वापर के कृष्णावतार दोनों ही धर्म की ध्वजा थामे हुए थे और राजनीति से अनभिज्ञ या अछूते भी नहीं थे। रावण पर राम की विजय में धर्म और राजनीति दोनों की बातें अपने मर्यादित स्वरूप दिखाती हैं। वैसे ही महाभारत के सूत्राधार श्रीकृष्ण का...
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