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Posts tagged "Hindi essays" (Page 228)
साहित्यकार का दायित्व Sahityakar ka Dayitav निबंध नंबर :- 01 साहित्य का सर्जक साहित्यकार भी सबसे पहले एक मनुष्य अर्थात सामाजिक प्राणी ही हुआ करता है। उस समाज का प्राणी, कि जिसका सहित्य के साथ अन्योन्याश्रिता का संबंध माना गया है। दोनों एक-दूसरे से भाव-विचार-सामग्री और प्रेरणा प्राप्त करके अपने प्रत्यक्ष स्वरूप का निर्माण तो किया करते ही हैं, अपने-आपको सजाया-संवारा भी करते हैं। निर्माण, सृजन और सजाने-संवारने की इस सारी...
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June 24, 2017 evirtualguru_ajaygourHindi (Sr. Secondary), Languages1 Comment
साहित्य और समाज निबंध नंबर :- 01 मानव-जीवन और उसके द्वारा गठित समाज संसार में सर्वाोच्च है। इसी कारण सहित्य, कला, ज्ञान-विज्ञान, दर्शन, धर्म आदि स्थूल या सूक्ष्म संसार में जो कुछ भी है, वह सब जीवन और मानव-समाज के लिए ही है, यह एक निर्विवाद मान्यता है। उससे पर या बाहर कुछ भी नहीं। मानव एक सामाहिक प्राणी है। वह व्यक्ति या समूह के स्तर जो कुछ भी सोचता, विचारता...
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June 24, 2017 evirtualguru_ajaygourHindi (Sr. Secondary), Languages1 Comment
साहित्य का उद्देश्य Sahitya ka Udeshya निबंध नंबर :- 01 ‘साहित्य’ शब्द में मानव हित साधन का भाव स्वत: ही अन्तर्हित रहा करता है और यह सोद्दश्य होता है। सृष्टि में कोई भी प्राणी, पर्दााि या अन्य कुछ निरुद्देश्य नहीं है। मानव इस सृष्टि का सर्वोत्कृष्ट प्राणी है। इस मानव ने अपने सतत प्रयत्न और साधना से आज तक जो कुछ भी प्राप्त किया है, उस सबमें कला और सहित्य और...
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June 24, 2017 evirtualguru_ajaygourHindi (Sr. Secondary), LanguagesNo Comment
विज्ञान और मानव-कल्याण या विज्ञान एक वरदान निबंध नंबर :- 01 शास्त्र, साहित्य, कला, सभी प्रकार के ज्ञान-विज्ञान तथा अन्य जो कुछ भी इस विश्व में अपने सूक्ष्म या स्थूल स्वरूप में विद्यमान है, उन सबका एकमात्र एंव अंतिम लक्ष्य मानव-कल्याण या हित-साधन ही है। इससे बाहर या इधर-उधर अन्य कुछ भी नहीं। इससे भटकने वाले, इधर-उधर होने वालीं प्रत्येक उपलब्धि, योजना और प्रक्रिया अपने आपमें निरर्थक और इसलिए त्याज्य है।...
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June 22, 2017 evirtualguru_ajaygoureVirtualGuru, Hindi (Sr. Secondary), Languages2 Comments
अच्छा स्वास्थ्य महावरदान या अच्छे स्वास्थ्य के लाभ अंग्रेजी में एक कहावत है स्वास्थ्य ही सच्चा धन है। ध्यान से, व्यवहार की दृष्टि से वचिार करने में स्पष्ट हो जाता है कि कहावत में कही गई बात एकदम सत्य है। अच्छे स्वास्थ्य को सच्चा धन या महावरदान मानने में कुछ भी झूठ या अतिशियोक्ति नहीं है। वह इसलिए कि स्वस्थ व्यक्ति ही इस संसार और जीवन में इच्छित कार्य पूरे कर...
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June 22, 2017 evirtualguru_ajaygourHindi (Sr. Secondary), Languages1 Comment
मजहब नहीं सिखाता आपास में बैर रखना सभी धर्म या मजहब महान मानवीय मूल्यों को महत्व देते हैं। किसी भी मजहब या धर्म का संबंध व्यक्ति के मस्तिष्क या तर्क-शक्ति के साथ नहीं, बल्कि हदय और भावना के साथ स्वीकार किया जाता है। इसी कारण भावना प्रवण व्यक्ति किसी तर्क-वितर्क पर ध्यान न दे प्राय: भावनाओं में ही बहता जाता है। भावनाओं में बहाव व्यक्ति के सतर पर तो बुरा नहीं,...
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June 22, 2017 evirtualguru_ajaygourLanguages, NCERTNo Comment
मन के हारे हार है Man ke Hare Haar Hai Best 4 Hindi Essay on ” Man Ke Hare Haar Hai” निबंध नंबर : 01 मन क्योंकि सभी इच्छाओं का केंद्र है, सभी दृश्य-अदृश्य इंद्रियों का नियामक और स्वामी है। अत: व्यवहार के स्तर पर उसकी हार के वास्तविक हार और जीत को सच्ची जीत माना जाता है। इसलिए मन पर नियंत्रण और मन की दृढ़ता की बात भी बार-बार कही...
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June 22, 2017 evirtualguru_ajaygourHindi (Sr. Secondary), LanguagesNo Comment
यदि मैं शिक्षक होता Yadi mein Shikshak Hota निबंध नंबर : 01 हर युग में शिक्षा का महत्व रहा है। जब तक धरती पर मनुष्य का जीवन रहेगा, तब तक शिक्षा का महत्व भी बना रहेगा। इसमें तनिक सा भी संदेह नहीं। शिक्षा को प्रकाश तो कहा ही जाता है, मनुष्य की आंख भी माना जाता है। शिक्षा देने वाले व्यक्ति को शिक्षक कहा जाता है। प्रकाश और आंख होने के...
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June 22, 2017 evirtualguru_ajaygourHindi (Sr. Secondary), Languages8 Comments