Hindi Essay on “Nari Aur Naukari” , ”नारी और नौकरी” Complete Hindi Essay for Class 10, Class 12 and Graduation and other classes.

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नारी और नौकरी Nari Aur Naukari जीवन का अर्धांग नारी आज पहले जैसी नहीं रह गई। आधुनिक भारत में ऐसा एक क्षेत्र नहीं रह गया है, जहां नारी का पदार्पण न हो चुका हो। आज नारी सामान्य से लेकर उच्चतम पदों पर सेवा-कार्य कर रही है। पुलिस और सेना में ाी नारी अपनी कार्य क्षमता और अदभुत योज्यता का परिचय दे रही है। आज कई नारियां एकदम स्वतंत्र रूप से उद्योग-धंधे,...
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Hindi Essay on “Jansankhya, Samasya aur Shiksha ” , ”जनसंख्या, समस्या और शिक्षा” Complete Hindi Essay for Class 10, Class 12 and Graduation and other classes.

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जनसंख्या, समस्या और शिक्षा Jansankhya, Samasya aur Shiksha  भारत एक विशाल देश है। आजादी के बाद से ही हमारा विकास प्रारंभ हुआ। विज्ञान और प्रोद्योगिकी कृषि और चिकित्सा  तकनीकी तथा संचार के क्षेत्र में भारत ने उल्लेखनीय प्रगति की है, किंतु यह सब प्रगति जनसंख्या वृद्धि की लगातार बढ़ती गति के सामने समन्वित विकास के रूप में नहीं दिखाई देती। 11 मई सन 2000 को जनसंख्या घड़ी के अनुसार हमारी जनसंख्या...
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Hindi Essay on “Fashion Shringar : Aavashyakta aur Upyog” , ”फैशन-श्रंगार : आवश्यकता और उपयोग” Complete Hindi Essay for Class 10, Class 12 and Graduation and other classes.

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फैशन-श्रंगार : आवश्यकता और उपयोग Fashion Shringar : Aavashyakta aur Upyog श्रंगार शब्द का सामान्य प्रचलित अर्थ है सजावट-अर्थात शरहर को सजा-संवारकर प्रस्तुत करना। यह सजावट विशेष प्रकार के पाउडर-क्रीम, कंघी-पट्टी, पकड़ों-परिधानों, गहनों आदि के द्वारा संभव हुआ करती है। एक शब्द है फैशन। इस शब्द का सामान्य प्रचलित अर्थ हुआ करता है-चलन या प्रचलित होना। इसइ प्रकार जब हम श्रंगार शब्द के साथ फैशन का मेल कर देते हैं, तब...
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Hindi Essay on “Shaharikaran ke Kuprabhav” , ”शहरीकरण के कुप्रभाव” Complete Hindi Essay for Class 10, Class 12 and Graduation and other classes.

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शहरीकरण के कुप्रभाव Shaharikaran ke Kuprabhav यह एक स्वाभाविक एंव प्राकृतिक नियम है कि क्रमश: गांव-कस्बों में और कस्बे ही विकास करके शहरों के रूप धारण कर लिया करते हैं। शहर या नगर विकास की प्रक्रिया में पडक़र महानगरों का रूप धारण कर लिया करते हैं। सृष्टि का अब तक का विकास-क्रम इसी नियम का साकार स्वरूप है। हम भारत की राजधानी दिल्ली का उदाहरण भी ले सकते हैं। सन 1947...
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Hindi Essay on “Badh ka ek Drishya ” , ”बाढ़ का एक दृश्य” Complete Hindi Essay for Class 10, Class 12 and Graduation and other classes.

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बाढ़ का एक दृश्य Badh ka ek Drishya  प्रकृति और मानव के बीच संघर्ष अंनतकाल से जारी है। मानव-जीवन के विरुद्ध प्रकृति के जो अनेक प्रकार के प्रकोप सामने आते रहते और माने जाते हैं, बाढ़ का प्रकोप उनमें से अत्यंत भयावह माना गया है। वह जल, जो जीवन का पर्यायवाचक माना जाता है, पानी जो व्यक्ति की अस्मिता और इज्जत का, मान-स मान का प्रतीक स्वीकारा गया है वही जल...
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Hindi Essay on “Yatayat ki Samasya ” , ”यातायात की समस्या” Complete Hindi Essay for Class 9, Class 10, Class 12 and Graduation and other classes.

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यातायात की समस्या Yatayat ki Samasya  बीसवीं शताब्दी के अंतिम चरणों में और इक्कीसवीं सदी के द्वार के समीप पहुंचते-पहुंचते जब कस्बे और सामान्य नगर बड़े-बड़े नगरों का दृश्य उपस्थित करने लगे हों, तब जिन्हें पहले ही महानगर कहा जाता है, उनकी दशा का अनुमान सहज और स्वत: ही होने लगता है। जहां जाइए, मनुष्यों की भीड़ का ठाठें मारता अथाह सागर, जिसका कोई ओर-छोर नहीं-कुछ ऐसी ही स्थिति हो गई...
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Hindi Essay on “Urja Ke Strot aur Samasya” , ”ऊर्जा के स्त्रोत और समस्या ” Complete Hindi Essay for Class 9, Class 10, Class 12 and Graduation and other classes.

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ऊर्जा के स्त्रोत और समस्या  Urja Ke Strot aur Samasya  ऊर्जा-एक प्रकार की ज्वलनशील शक्ति, जिसका संकट निकट भविष्य में आज का मानव स्पष्ट देख एंव अनुभव कर रहा है। ऊर्जा का वास्तविक अर्थ आग या ज्वलनशील पदार्थ तो है ही, वह संचालिका शक्ति भी है कि जिसके बल से आज हमारे कल-कारखाने चल रहे हैं, रेलें तथा अन्य वाहन दौड़ रहे हैं, वायुयान उड़ रहे हैं, घरों आदि में उजाला...
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Hindi Essay on “Bharatiya Samaj me Kuritiya ” , ”भारतीय समाज में  कुरीतिया” Complete Hindi Essay for Class 9, Class 10, Class 12 and Graduation and other classes.

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भारतीय समाज में  कुरीतिया Bharatiya Samaj me Kuritiya  कुरीतियां या कुप्रथांए किसी भी समाज और उसके देश को कभी आगे नहीं बढऩे दिया करती। धीरे-धीरे वे एक-दूसरे को देखकर जब जीवन-समाज का अपरिहार्य अंग बन जाया करती है, तब उस देश-समाज का मालिक भगवान ही हुआ करता है। रीति-रिवाज और परंपरांए ही समय के अनुसार पुरानी और अलाभकारी होकर कुरीतियां बन जाया करती हैं। उन्हें त्यागकर ही मानव-जीवन सहज ढंग से...
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