Mehangai “महँगाई” Hindi Essay, Paragraph, Speech for Class 10, 12 Examination.
महँगाई
Mehangai
भूमिका, महंगाई के कारण, दोषपूर्ण वितरण व्यवस्था, जमाखोरी, सिंचाई सुविधाओं में कमी, कौन ज़िम्मेदार, उपसंहार
आज विश्व के देशों के सामने दो समस्याएँ प्रमुख हैं- मुद्रा स्फीति तथा महँगाई। जनता अपनी सरकार से माँग करती है कि उसे कम दामों पर दैनिक उपभोग की वस्तुएँ उपलब्ध करवाई जाएं। विशेषकर विकासशील देश अपनी आर्थिक कठिनाइयों के कारण ऐसा करने में असफल हो रहे हैं। लोग आय में वृद्धि की माँग करते हैं। देश के पास धन नहीं। फलस्वरूप मुद्रा का फैलाव बढ़ता है, सिक्के की कीमत घटती है, महँगाई और बढ़ती है।
भारत की प्रत्येक सरकार ने आवश्यक वस्तुओं की कीमतें कम करने के आश्वासन दिए किंतु कीमतें बढ़ती ही चली गईं। इस कमर तोड़ महँगाई के अनेक कारण हैं। महँगाई का सबसे बड़ा कारण होता है, उपज में कमी। सूखा पड़ने, बाढ़ आने अथवा किसी कारण से उपज में कमी हो जाए तो वस्तुओं के दाम बढ़ना स्वाभाविक है।
उपज जब मंडियों में आती है, अमीर व्यापारी भारी मात्रा में अनाज एवं अन्य वस्तुएँ खरीदकर अपने गोदाम भर लेता है जिससे बाज़ार में वस्तुओं की कमी हो जाती है। व्यापारी अपने गोदामों की वस्तुएँ तभी निकालता है जब उसे कई गुना अधिक कीमत प्राप्त होती है।
अन्य सरकारों की भांति वर्तमान सरकार ने भी महँगाई कम करने का आश्वासन दिया है, किंतु प्रश्न यह है कि महंगाई कम कैसे हो ? उपज में बढ़ोत्तरी हो यह आवश्यक है, किंतु हम देख चुके हैं कि उपज बढ़ने का भी कोई बहुत अनुकूल प्रभाव कीमतों पर नहीं पड़ता। वस्तुतः हमारी वितरण-प्रणाली में ऐसा दोष है जो उपभोक्ताओं की कठिनाइयाँ बढ़ा देता है ।
आपात् स्थिति के प्रारंभिक दिनों में वस्तुओं के दाम नियत करने की परिपाटी चली थी, किंतु शीघ्र ही व्यापारियों पुनः मनमानी आरंभ कर दी । तेल-उत्पादक देशों द्वारा तेल की कीमत बढ़ा देने से भी महँगाई बढ़ी है। वस्तुतः अफसरशाही, लालफीताशाही तथा नेताओं की शुतुर्मुर्गीय नींद महँगाई के लिए पूरी तरह ज़िम्मेदार है।
देश का कितना दुर्भाग्य है कि स्वतंत्रता के इतने वर्ष पश्चात् भी किसानों को सिंचाई की पूर्ण सुविधाएँ उपलब्ध नहीं हैं। बड़े-बड़े नुमायशी भवन बनाने की अपेक्षा सिंचाई की छोटी योजनाएँ बनाना और क्रियान्वित करना बहुत ज़रूरी है। हमारे सामने ऐसे भी उदाहरण आ चुके हैं जब सरकारी कागज़ों में कुएँ खुदवाने के लिए धन-राशि का व्यय दिखाया गया, किंतु वे कुएँ कभी खोदे ही नहीं गए ।
बढ़ती महँगाई पर अंकुश रखने के लिए सक्रिय राष्ट्रीय नीति की आवश्यकता है। यदि निम्न और मध्यम वर्ग के लोगों को उचित दाम पर आवश्यक वस्तुएँ नहीं मिलेंगी तो असंतोष बढ़ेगा और हमारी स्वतंत्रता के लिए पुनः खतरा उत्पन्न हो जाएगा।






















