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Hindi Letter “Mitra ko Shok ke prati samvedna patra”,”मित्र को शोक-संतप्तं के प्रति संवेदना पत्र” Hindi Letter for Class 10, 12 and Graduation Classes.

मित्र को शोक-संतप्तं के प्रति संवेदना पत्र

Mitra ko Shok ke prati samvedna patra 

हौज खास,

नई दिल्ली।

22 अप्रैल, 2012

 

विषय : शोक-संतप्तं के प्रति संवेदना

प्रिय सुशील,

मधुर स्नेह।

यह दुखद समाचार कैसा हृदयविदारक है, इसका वर्णन शब्दों में नहीं किया जा सकता। 18 अप्रैल इतना भयंकर रूप धारण कर आएगा, यह कोई सोच भी नहीं सकता था। तुम्हारे पूज्य पिताजी का आकस्मिक निधन मानो वज्राघात था। यह सूचना पाते ही घर के सभी सदस्य अत्यंत दुखी हो गए। मेरी दशा देखकर तो मेरे अन्य मित्रगण भी बहुत आहत हुए।

मैं स्वयं इतना साहस नहीं जुटा पा रहा था कि तुम्हें संवेदना के कुछ शब्द लिख पाऊँ क्योंकि मैं भली-भाँति अनुभव कर सकता हूँ–यह अपूर्णीय क्षति। अचानक हुआ यह आघात किस प्रकार पूरे परिवार को क्षत-विक्षत कर गया होगा, मैं यह पूर्णरूपेण समझ सकता हूँ। एक पल के लिए भी तुम्हारे पिताजी का सरल चेहरा नेत्रों के आगे से नहीं हटता। वे कितने विनम्र, सहृदयी और मितभाषी थे। अपने प्रति उनका असीम स्नेह तो मैं आजीवन नहीं भूल पाऊँगा।

किंतु विधि के विधान के सम्मुख हम सभी विवश हैं। हम सब उसी परम पिता की धरोहर हैं। वह अपनी इच्छा से हमें इस संसार में भेजता है तो हमें अपने पास बुलाने में भी उसी की इच्छा सर्वोपरि है। अतः धैर्य धारण कर परिस्थितियों को सँभालने की चेष्टा करो।

तुम परिवार के बड़े पुत्र हो। घर सँभालने का उत्तरदायित्व तुम्हारा ही है। यद्यपि  इतनी अल्पायु में यह संभव नहीं है किंतु नैतिक रूप से इसे अनुभव करना अनिवार्य है। माताजी को इस समय विशेष रूप से तुम्हारी आवश्यकता है। छोटे भाई-बहनों का संपूर्ण उत्तरदायित्व भी अब तुम्हारे ही ऊपर आ पड़ा है। उनकी पढ़ाई-लिखाई तथा अन्य आवश्यकताओं की पूर्ति करना अब तुम्हारा परम कर्तव्य है। उन्हें पिता की कमी कभी भी महसूस न होने देना। हम सब लोग इस अपार दुख में हृदय से तुम्हारे साथ हैं।

ईश्वर से प्रार्थना है कि वह तुम्हें इस दुख को सहन करने की शक्ति दे। हमारे योग्य सेवा अवश्य लिखना

तुम्हारा मित्र

शरद

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